हिन्दी है ख्वाबो के अरमान
हिन्दी है भारत की पहचान !
ये है प्यास हमारी
ये है प्राण सांस हमारी !!

ये गरिमा ये महिमा !
ये संस्कार संस्कृति !
ये राष्ट् की संपुर्ण अभिव्यक्ति !!
ये हिन्दी शान हिन्द की
ये हिन्दी गुमान हिन्द की
ये हिन्दी जान सब की !
वक्त ने करवट बदली
पश्चिमी सभ्यता ने दस्तक दी
जान कहते थे जिन्हें लोग
आज़ वो हिन्दी अपने घर में ही
देखिए किस तरह से बैगाना बन गयी !!
अपनी सभ्यता अपनी संस्कृति
हर कोई भूलाकर अपनी गरिमा
मिटाने पर लगें हैं हिन्द कहने वाले ही
आज़ अपनी हिंदी को भुलाए बैठे हैं !
घर में बोलें जाने वाली
भारत का सिरताज कहलाने वाली
अंग्रेजी के आगमन से आज़
अपने घर आंगन की बगियां में ही
गुमनामी के कगार पर देखिए आकर है खड़ी !!
अंजु दास गीतांजलि पूर्णियां बिहार की क़लम से ???







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