हद हो गई होशियारी की…!

डॉ टी महादेव राव

होशियारी की पराकाष्ठा तक पहुंचने वालों की करतूतें कैसी होती हैं जानते हैं आप? श्मशान में कोविड मृतकों की लाशों का दहन कोई देख ले तो राज्य की प्रतिष्ठा मिट्टी में मिल जाएगी, सोचकर शमशान के चारों और पर्दे लगवाने तक फैली हुई है उनकी बुद्धिमत्ता का ज्ञान। आप कहोगे प्रतिष्ठा तो तब है जब आप जाती हुई जानें बचाओगे। चिता के ज्वालाओं को हथेलियों से छुपा कर किस प्रतिष्ठा की बात कर रहे हैं? इससे क्या होगा?

अगर कोई सवाल उठाए कि जनता को बचाने के लिए सरकार क्या कर रही है। तो इज्जत धूल में मिलेगी कि नहीं? इसीलिए हम मौतों को और चिताओं को छुपा रहे हैं। “कोरोना के हाथ पैर तोड़ कर हमने उसे कोने में फेंक दिया” कहकर प्रचार भी कर सकते हैं। कुछ भी हो आखिर उत्तरप्रदेश का प्रशासनिक तंत्र जो है, वह अपनी इज्जत और मान मर्यादा के लिए जान देने तैयार रहता है। हाथरस के बाधितों, पीड़ितों का आधी रात में क्रिया कर्म करें, या शमशान को पर्दे में ढके, सारा कुछ तो प्रतिष्ठा के लिए ही है, साख के लिए है।

जो काम किया जाना चाहिए अगर उसे नहीं करोगे तो ऐसे काम करने पड़ते हैं जिन्हें नहीं करना चाहिए। लखनऊ के शमशान के चारों ओर खड़े किए गए टीन टप्पर, गोरखपुर श्मशान को ढंकते हुए चारों तरफ लगाए गए बैनर, इस विषय में कहानियां ही कहानियां बताएंगे। मारक महामारी से जन बड़ी संख्या में मर रहे हैं, तब भी बेअसर निर्मम शासन की दक्षता का फल है यह श्मशानों को ढकने का अद्भुत विचार। आसमान तक उड़ती चिताओं के ज्वालाओं का यदि किसी ने चित्र खींचा और सामाजिक माध्यमों में डाले तो इज्जत की कितनी फजीहत होगी? इस खतरे से बचने के लिए ही रूद्र भूमि के चारों ओर पर्दे टांगे गए। इस कृति के वर्णन के लिए कोई शब्द, कोई विशेषण नहीं मिल रहे हैं। गोरखपुर श्मसान पर नजर से बचाने की गई इस व्यवस्था पर कई लोगों की टिप्पणियों से तंग आकर नगरपालिका अधिकारियों ने उन पर्दों को हटाया। कितनी मुसीबत? शासन अपनी इज्जत को पर्दों से ढाँक रहा है तो विपक्ष ने उनकी एक न चलने दी और आलोचना के बाण चला दिए। सारी ढकी हुई इज्जत उघाड़ दी।

  भूख से बिलबिलाते एक बदनसीब को रोटी देने वाले सज्जन को ले जाकर जेल में ठूंस दिया गया, राजा के सैनिकों ने पहले के दिनों में।  सज्जन चिल्लाता रहा लेकिन सैनिक  कहते रहे यहां किसी की भी सहायता करनी है तो केवल हमारे राजा ही करेंगे। तुम कौन हो बीच में मदद करने वाले? बिल्कुल इसी तरह के सैनिक खाकी कपड़े पहने उत्तरप्रदेश में पूरी निष्ठा के साथ अपने दायित्व का निर्वाह कर रहे हैं।  जौनपुर में विक्की अग्रहारी नाम के युवक पर हाल ही में पुलिस वालों ने नाना प्रकार की धाराएं लगाकर मामला दर्ज किया।  उस बेचारे का पाप  यही था कि वह कोविड रोगियों को मुफ्त में ऑक्सीजन सिलेंडर दे रहा था।  प्राणवायु के लिए जौनपुर जिला अस्पताल के सामने त्रस्त,  परेशान बदनसीबों की मदद कर कोविड निर्देशों का उसने उल्लंघन किया, यह कहना है पुलिस का।  उस विक्की की वजह से कोरोना के फैलने का अंदेशा है, कहकर वहां के अस्पताल के अधिकारियों ने शिकायत की।  सच है! यह तो बहुत बड़ा अपराध है, कहकर पुलिस ने मामला ठोंका।  मां खाने को तो देती नहीं,  भीख भी नहीं मांगने देती जैसी हालत हो गई।  कोई आकर मदद क्यों करें?  हमारी इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी जैसी ईर्ष्या  के अलावा क्या है इस मामले में?  अकेले विक्की ने तीस  लोगों को “सांसें”  दी और राजद्रोही जैसे उसे हथकड़ियों से सजा कर जेल में डाल दिया गया वहां के शासन और प्रशासन ने।  न भूतो न भविष्यति है ऐसी घटनाएं।  

इलाहाबाद के उच्च न्यायालय ने कहा ऑक्सीजन के अभाव में हो रही सारी मौतें सामूहिक हत्याकांड के बराबर हैं। चूंकि उच्च न्यायालय ने कहा है तो उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को न उगलते बन रहा है न निगलते।  अगर किसी और ने कहा होता तो उसकी चमड़ी उधेड़ देते।   अमेठी पुलिस ने एक युवक पर मामला दर्ज कर शांति और सुरक्षा बनाए रखा।  उस युवक ने ट्वीट किया था की उसकी दादी को ऑक्सीजन की जरूरत  है। वहां के पुलिस अधिकारियों ने सारे थानों को आदेश भेजा कि ऑक्सीजन की कमी के बारे में कोई भी दुष्प्रचार करे तो उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाए। आपात  समय में बहुत दायित्व से भरी कर्तव्यनिष्ठा ही तो है यह।  कमी है तो सरकार की जवाबदेही की।  बड़ी सी सुई लेकर अगर सारे लोगों के मुंह सी  दिए जाएं तो दुष्प्रचार को रोका जा सकता है।  राष्ट्रीय सुरक्षा कानून है और भी कई कानूनों के तहत मामले दर्ज करते रहें। लोगों को ऑक्सीजन पहुंचाने से ज्यादा जरूरी काम यही तो है - मामले दर्ज करना।  राजा चाहे तो कोड़ों की मार की क्या कमी?  लोकतंत्र है तो क्या।  राजा की तुलना में मुकुट और सिंहासन ही तो नहीं है।  बाकी राजपाट, प्रजा,  यातना सब मौजूद है।  इसलिए कोरोना  आए या कोई और भीषण समस्या, जनता को चाहिए कि आंसू न बहाये।  सहन न होने पर आंसू बहाया तो सरकार की इज्जत से खेलने का दंड रौरव आदि नरक में डाल दिया जाएगा।
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