
रायपुर / विश्व स्तनपान सप्ताह को लेकर स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास द्वारा नियमित रूप से जागरूकता की पाठशालाओं का आयोजन कर गर्भवती महिलाओं और शिशु की माताओं को स्तनपान कराने के प्रति जागरूक किया जा रहा है। साथ ही स्तनपान नवजात शिशुओं के लिए बहुत ही ज़्यादा लाभकारी होता है के विषय पर आपसी चर्चा भी करवाई जा रही है ।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.मीरा बघेल ने कहा, ‘’जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करने वाले नवजात शिशुओं में मृत्यु की संभावना लगभग 20 प्रतिशत तक कम हो जाती है। इसके साथ ही पहले छह महीने तक केवल स्तनपान करने वाले शिशुओं में डायरिया एवं निमोनिया जैसी संक्रमण से होने वाली मृत्यु की संभावना 11 से 15 गुना तक कम हो जाती है। स्तनपान करने वाले शिशुओं का समुचित ढंग से शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है एवं वयस्क होने पर उसमें गैर संचारी (एनसीडी) बीमारियों के होने की भी संभावना बहुत कम होती है। इसके साथ ही स्तनपान कराने वाली माताओं में स्तन एवं गर्भाशय (ओवरी) कैंसर का खतरा भी नहीं के बराबर होता है।‘’
जिला मीडिया प्रभारी गजेंद्र डोंगरे ने बताया, ‘’विश्व स्तनपान सप्ताह पर मितानिन द्वारा नियमित रूप से स्तनपान कराने के लाभ पर पाठशालाओं का आयोजन कर गर्भवती महिलाओं और शिशु की माताओं को स्तनपान कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है | जिसमें मितानिन नवजात शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद स्तनपान कराये जाने के लाभ को बता रहीं हैं | प्रसव के प्रथम घंटे के अन्दर स्तनपान नवजात के जीवन में अमृत के समान माना जाता हैं। स्तनपान को बढ़ावा देने का उद्देश्य नवजात शिशुओं को गंभीर बीमारियों से बचाना है । स्वास्थ्य विभाग 01 से 07 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह के रूप में मना रहा है, जिसमें नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य में स्तनपान की भूमिका के प्रति लोगों को जागरूकता प्रदान कर सामुदायिक भागीदारी को सुनिश्चित किया जाने का प्रयास किया जा रहा है ।‘’
दानवीर भामाशाह वार्ड क्रमांक 26 के आंगनबाड़ी केंद्र में विश्व स्तनपान दिवस मनाया गया जिसमें वार्ड पार्षद सुंदरलाल जोगी उपस्थित हुए, स्तनपान दिवस मनाने की महत्ता पर उन्होंने भी अपना संदेश दिया तथा स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता में 6 माह से कम उम्र के जो शिशु थे और जिनका वजन सामान्य में था उनको भी उपहार दिया गया। उन्होंने इस अवसर पर कहा “प्रसव के तुरंत बाद एक घंटे के अंदर स्तनपान कराना जरूरी होता हैं। साथ ही जन्म से लेकर 6 माह तक केवल मां का ही दूध पिलाना नवजात शिशुओं के लिए अतिआवश्यक होता है। वहीं 6 महीने पूर्ण होने पर संपूरक आहार के साथ स्तनपान कम से कम दो वर्षों तक कराना जरूरी होता है। ताकि बच्चों के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे”। वहीँ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जया सिन्हा के द्वारा शीघ्र स्तनपान, केवल स्तनपान एवं सतत स्तनपान के महत्त्व बारे में बताया गया |
इस मौके पर गुढ़ियारी सेक्टर की पर्यवेक्षक रीता चौधरी ने बताया, ‘’गुढ़ियारी सेक्टर की 28 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर विश्व स्तनपान सप्ताह को लेकर क्षेत्र स्तर पर स्तनपान में बढ़ावा देने के लिए प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है ।आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाली सभी हितग्राहियों को 2 वर्षो तक की स्तनपान कराने के लिए प्रेरित कर रही है । डोर टू डोर भ्रमण कर गर्भवती और धातृ माताओं को छ: महीने तक केवल स्तनपान कराने के महत्व के बारे में जानकारी देने का काम करेगी।‘’








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