
विशाखापटनम। लंबे समय से सक्रिय हिन्दी साहित्य संस्था सृजन की मासिक ईसाहित्य चर्चा का आयोजन आज ( एक अगस्त 2021) किया गया। आरंभ में सचिव डॉ टी महादेव राव ने उपस्थितसभी का स्वागत किया और कहा पिछले उन्नीस वर्षों से अधिक समय से कार्यरतसृजन की यह 134 वीं बैठक है। संस्था के सक्रिय साहित्यकार पदाधिकारियों के रूप मेंअपनी सेवायें दे रहे हैं। ई साहित्य चर्चा कासंचालन सृजन के अध्यक्ष नीरव कुमार वर्मा ने किया । सबसे पहले डॉ मोपिदेवी विजयगोपाल ने दो कवितायें आज के मानव प्रवृत्तियों पर औरवर्तमान समय की सुरक्षा पर प्रस्तुत किया। श्रीमती मधुबाला कुशवाहा ने “फुर्सत में बतियाना” शीर्षक कविता में बाल्य स्मृतियों संग और स्वयं कीउदासी को भूलने पुरानी यादों संग संवाद को रेखांकित किया। एल चिरंजीवी राव ने कुछमुक्तक पढे और “सावन” कविता में बरसते सावन में विविध बिम्बों को प्रस्तुत किया। यूट्यूब किस्सागोई स्तम्भ के लिए प्रधानमंत्री से प्रशंसा पाने वाले निशिकांतअग्रवाल ने चायवाले और चाय को प्रतीकों केरूप में दो सुंदर मुक्तक सुनाये। श्रीमतीके लता तेजेश्वर रेणुका ने मुक्तक सुनाये और अपनी पर्यावराण पर आधारित कविता मेंबालमन और पर्यावरण का खाका खींचा। श्रीमती भारतीशर्मा ने खूब सूरत ग़ज़ल प्रस्तुत किया जानतेहैं हम भी हम में ऐब हैं लेकिन, दिल पर हाथ रखकर कोईशिकवा कीजिये। श्रीमती सीमा वर्मा ने रेत को सहेली के रूपमें चित्रित करते हुये एक भावपूर्ण कविता “ रेत मेरी सहेली” पढ़ा। श्रीमती मीना गुप्ता ने भारतीय संस्कृति और सभ्यताकी दृढ़ता को रेखांकित करती कविता “पेपरवेट” प्रस्तुत किया। डॉ टी महादेव राव ने अपनी रचना “श्रोता बनाने का दुख” में श्रोताओं को सतानेवाले वक्ताओं पर व्यंग्य कसा। नीरव कुमार वर्मा ने दो कवितायें “तलाश पगडंडियों की”और “एक प्रश्न” में वर्तमान स्थितियों और विसंगतियों पर बिंबमय प्रस्तुति की। अंत में निशिकांत अग्रवाल ने उपस्थित सभीका आभार माना और सभी को रचना सृजन के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा इस तरहमिलजुल कर भले ही आभासी मंच हो हम साहित्य सृजन की ओर अग्रसर हो सभी हमारी प्रतिभाका और सर्जना का सही अर्थ सामने आएगा। इस कार्यक्रम का संयोजन निशिकांत अग्रवाल औरसदानंद तिवारी का था। डॉ टी महादेव राव, सचिव – सृजन उक्त आशय की जानकारी दी।







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