रूस और चीन की तानाशाही दुनिया के लिए एक सबक…

प्रश्न- राधिका वर्मा, पामगढ़, जिला जांजगीर चांपा
संपादक जी,आज दुनिया एक दफा पुनः विश्व युद्ध के कगार पर पहुंच चुकी है। रुस और यूक्रेन का युद्ध मुझे चिंतित कर रहा है। आखिरकार क्या है यह सब।
- आपकी चिंता जायज़ है। आज सचमुच दुनिया में विश्व युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। रूस और यूक्रेन का युद्ध हम सभी को चिंतित कर रहा है और दुनिया का हर शांति प्रिय नागरिक चाहता है कि रूस और यूक्रेन का बेवजह का युद्ध बंद हो जाए। मेरी नजर में रूस और यूक्रेन का यह युद्ध बिल्कुल बेवजह है। रुस की दीदेदिलेरी की परिणति है यह।
एक बात और कहना चाहता हूं कि आज अगर रूस में लोकतंत्र होता तो यह परिदृश्य निर्मित नहीं हो पाता। रूस में आज कोई लोकतंत्र नहीं है वहां ब्लादिमीर पुतिन की तानाशाही का राज चल रहा है कुछ ऐसी परिस्थिति बनी की लोकतांत्रिक सरकार का शमन हो गया और पुतिन के अहंकार और सम्राज्य वादी सोच के कारण स्थितियां बिगड़ी है रूस की जनता में युद्ध के प्रारंभ में इसकी जबरदस्त खिलाफत की थी और जनता सड़कों पर निकल आई थी यह बहुत बड़ा सच है मगर जहां जहां तानाशाही सोच कि सरकार होती है वहां स्वतंत्र निष्पक्ष आवाज को कुचल दिया जाता है। यही सब कुछ आज रूस में हो रहा है जहां एक समय में कम्युनिस्ट शासन था और दुनिया के मजदूरों एक हो जाओ जैसी आवाज बुलंद हुई थी। उस मानवतावादी सोच और दृष्टि को कुचल कर के आज तानाशाही की सोच बन चुकी है जो दुनिया के लिए एक खतरे का सबक है।
प्रश्न – शिवदास महंत, कुसमुंडा, कोरबा
संपादक जी, दो माह से अधिक हों गए रूस जैसी महाशक्ति और यूक्रेन जैसा छोटा सा देश आपस में गुत्थमगुत्था है। क्या कोई शांति का विकल्प नहीं हो सकता है।
-आपने अपने इस छोटे से सवाल से एक तरह से दुनिया के सामने एक यक्ष प्रश्न रखा है। मेरी दृष्टि में आपका यह प्रश्न अनमोल है और दुनिया की ताकतों के सामने एक छोटा सा दिया दीपक जो यह पूछ रहा है कि आप अमेरिका हो, आप रूस हो, आप जर्मनी और ब्रिटेन हो, आप दुनिया की महाशक्तियां हैं आप खामोश क्यों हैं आप खुल करके बोलते क्यों नहीं हैं और आपके मौन रहने के कारण ही रूस आज यूक्रेन पर अत्याचार कर रहा है।
आज दुनिया के इस समय में जब मानवतावादी ताकते शक्तिशाली हो रही हैं। इसके बावजूद अगर कोई शक्ति अथवा अपने आप को महाशक्ति समझने वाला देश अगर छोटे देश पर आक्रमण कर देता है तो यह आंख बंद करके देखने का मसला नहीं होना चाहिए। अगर इसका प्रतिकार दुनिया की इन महान ताकतों में से कोई एक भी सामने आकर करता तो शायद रूस यह हिमाकत नहीं करता।
दरअसल, बार-बार चेतावनी देने का काम अमेरिका करता रहा दुनिया को भी यह बताता रहा कि रूस यूक्रेन पर हमला करने जा रहा है। अमेरिका यह सब डर डर कर गीदड़भभकी के आचरण की वजह से स्थितियां हाथ से निकलती चली गई अमेरिका का गम नहीं अगर मोर्चा संभाल लेता और इसे संयुक्त राष्ट्र संघ में लेकर पहुंच जाता नाटो की बैठक करवा देता तो स्थिति बदल सकती थी।
प्रश्न – राधेश्याम जायसवाल, दुर्ग, छत्तीसगढ़
-संपादक जी, क्या आपके पास रूस और यूक्रेन के शांति के लिए या युद्ध समाप्ति के लिए कोई योजना है।
-निसंदेह आपने बहुत ही प्रासंगिक प्रश्न रखा है इसके लिए आप बधाई के पात्र हैं। सच्चाई तो यह है रूस और यूक्रेन के आज के युद्ध की स्थितियों पर महात्मा गांधी के सिद्धांत के तहत शांति की स्थापना की जा सकती है।
आपको मैं बताऊं जब गांधी भाई युवा थे और बैरिस्टर की परीक्षा पास कर दक्षिण अफ्रीका गए तो वहां जो साझेदारी फर्म का वाद निराकृत करने का केस मिला था उसे उन्होंने अध्ययन करने के बाद आपसी समझौता करवा कर सुलझाया था।
महात्मा गांधी का यह मानना था कि कोई भी वाद-विवाद आपसी संवाद से हल किया जाता है कोर्ट कचहरी, पैसे और समय के अपव्यय का कारण बनते हैं।
अब आपके सामने उदाहरण है रूस और यूक्रेन का युद्ध इस युद्ध में अरबों रुपए खर्च हो चुके हैं कितनी ही जनहानि हुई है दुनिया का मानवता का, अंतहीन नुकसान हुआ है जिसका कोई लेखा-जोखा शायद कभी भी ना हो पाए।
महात्मा गांधी ने लगभग 100 साल पहले जीवन में अपने कर्म से उदाहरण बंद करके दुनिया को जो संदेश दिया था हम सब जानते हैं मगर अनदेखा करते हैं और पछताते हैं। रूस ने जो गलतियां की है उसका एकमात्र हल आपसी समझदारी समझौते का ही है।
प्रश्न – कमल सरविद्या, कोरबा महंगाई आज बढ़ती जा रही है। जब इंदिरा गांधी की सरकार थी तब भी महंगाई का रोना था, राजीव गांधी और चाहे अटल बिहारी बाजपेई या फिर आज मनमोहन सिंह के बाद नरेंद्र भाई मोदी की सरकार है, महंगाई बढ़ती ही चली जा रही है।
-आपका सवाल सवाल सौ आने सही है। पंडित नेहरू की सरकार थी समय के अखबार आप पलटें तो आपको महंगाई के दर्शन हो जाते हैं इसी तरह श्रीमती इंदिरा गांधी की सरकार के समय भी महंगाई एक ज्वलंत प्रश्न था।
नरेंद्र दामोदरदास मोदी के आज के प्रधानमंत्रित्व कालीन समय में भी मंहगाई एक विराट प्रश्न है।
अगर आप गौर करेंगे तो यह पाएंगे कि पहले की अब की महंगाई में बड़ा अंतर है पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी के समय की महंगाई आज की तरह भयावह रूप में नहीं थी कृत्रिम मंहगाई नहीं थी।
देश की जनता को परेशान करने के लिए को हवा देने का काम सरकारें नहीं करती थी उस समय की महंगाई धीरे-धीरे आगे बढ़ती थी उस पर सरकार का अंकुश हुआ करता था। मगर
आज महंगाई को खुला छोड़ दिया गया है।
प्रश्न- राजीव सिन्हा, अंबिकापुर सरगुजा
संपादक जी, आप हर एक समस्या व्याधि का जवाब गांधीजी में ढूंढते हैं। मेरे हिसाब से यह गलत है। हर समस्या का निराकरण भला महात्मा गांधी के पास कैसे हो सकता है?
-दुनिया में जो भी महान व्यक्ति हुए हैं उनके पास हर समस्या का निदान है इसीलिए वह महान है और दुनिया उन्हें चाहती है नमन करती है… उन्ही में एक मोहनदास करमचंद नामक एक साधारण व्यक्ति भी है जिसके बारे अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था कि आने वाली पीढ़ियां शायद यह आश्चर्य करेंगी कि कोई चलता फिरता व्यक्ति यह गांधी था…
जिस तरह बच्चों के सामने कोई समस्या आती है तो वे अपने माता पिता, गुरु, मार्गदर्शक की तरफ देखते हैं वैसे ही हमें अपने महान मार्गदर्शकों की ओर देखना चाहिए। मैं मानता हूं कि महात्मा गांधी वह सारी खूबियां थी जो किसी भी समस्या की दवा हो सकती हैं।
प्रश्न – रूचि शर्मा, जशपुर छत्तीसगढ़
संपादक जी, क्या आज की केंद्र सरकार नरेंद्र मोदी की सरकार महात्मा गांधी को अपना आदर्श मानती है?
रुचि जी,आप जरूर कोई एडवोकेट होंगी…!!
जो बात पूछी है आपने उसका जवाब मेरे पास भला कैसे हो सकता है, इसका तो आपको सही सही जवाब हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी ही दे सकते हैं।
अच्छा हो कि आप हमारे माननीय प्रधानमंत्री से एक पत्र लिख कर के इस प्रश्न का प्रति उत्तर प्राप्त करें।
और हां, अगरचे आपके प्रश्न का जवाब ना मिला तो आप इस नाचीज़ को स्मरण करिएगा।
gandhishwar.rohra@gmail.com









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