
कोरबा / वर्तमान माह नवंबर 2022 में जिला कोरबा के प्रत्येक विकासखंड पर संचालित लगभग सभी शासकीय उचित मूल्य की दुकानों में माह नवंबर 2022 का खाद्यान्न आधा माह खत्म होते हुए 15 तारीख हो जाने के बाद भी अभी तक दुकानों में भंडारण ना हो पाने के कारण हितग्राहियों को वितरण नहीं हो पा रहा है। उचित मूल्य दुकानदारों का कहना है कि जिन जिन दुकानों में पहले से बचा हुआ खाद्यान्न वेबसाइट में दिख रहा है उन सभी दुकानों में माह नवंबर का खाद्यान्न नहीं भेजा जा रहा है। जबकि जिला कोरबा के सभी विकासखंडों पर संचालित ज्यादातर दुकानों में खाद्यान्न का स्टॉक केवल कागजों, वेबसाइटो में ही है शायद इन्हीं के आधार पर पीडीएस दुकानों में खाद्यान्न उपलब्ध होना मान कर नवंबर माह में खाद्यान्न भंडारण नहीं कराया जा रहा है। जिसके कारण सभी स्थानों के हितग्राहियों को खाद्यान्न नहीं मिल पा रहा है। खाद्य विभाग के अधिकारियों, निरीक्षकों के द्वारा भौतिक सत्यापन की शतप्रतिशत जानकारी कहीं ना कहीं छुपाई जा रही है। कई दुकानों में विगत कई वर्षों से चावल, चना, नमक, शक्कर आदि खाद्यान्न या तो एनआईसी में दर्ज मात्रा से कम है या तो है ही नहीं। लेकिन खाद्य विभाग, नागरिक आपूर्ति निगम, एवं निगरानी समितियों के द्वारा जिले में प्रत्येक विकासखंडों पर संचालित पीडीएस दुकानों का सही तरह से भौतिक सत्यापन ना तो किया जा रहा है और ना ही वेबसाइटों में खाद्यान्नों की सही मात्रा दर्ज किया जा रहा है।
युवा नेता ने कहा है कि विभागीय अधिकारी कर्मचारियों के कारण जो भी खामी करी गई है जांच के बाद ही पता चल सकेगा की इतनी बड़ी- बड़ी मात्रा में खाद्यान्नों की कमी दुकानों में कैसे हो गई। जबकि विगत कई सालों से हर माह खाद्यान्न का भौतिक सत्यापन कर अपने अधिकारियों के संरक्षण में खाद्य निरीक्षको के द्वारा झूठा एवं गलत घोषणा पत्र तैयार किया जाता रहा और संबंधित विभागों को गुमराह किया जाता रहा। इसके कारण ही आज पूरे जिले के ग्रामीण दुकानों में एनआईसी में दर्ज मात्रा के अनुरूप खाद्यान्न दुकानों में नहीं है। आज PDS की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है यदि समय रहते कोई बड़ी कमेटी बनाकर जांच नहीं की गई तो हितग्राहियों को किसी भी कीमत पर उनके हक का खाद्यान्न नहीं मिल पाएगा। जिले में संचालित सैकड़ों दुकानों में चावल, चना, शक्कर आदि खाद्यान्न या तो कम दिए जा रहे हैं या तो दिए ही नहीं जा रहे हैं और इसका मुख्य कारण है दुकानों में पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न का ना होते हुए उल्टा भ्रष्टाचार का बड़े पैमाने पर होना जो खाद्यान्न एनआईसी के वेबसाइट में भी दिख रहा है। यह भ्रष्टाचार केवल कागजों तक ही नही वरन भौतिक रूप से भी प्रदर्शित हो रहा है। मेरे द्वारा दर्जनो शिकायतें जिले से लेकर प्रदेश एवं देश स्तर पर की गई है। कुछ पर कार्यवाही केवल औपचारिकता निभाने के लिए की गई क्योंकि भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे अधिकारियों के कान में जूं तक नहीं रेंग रहा है और स्थिति भयावह होते चली गई है। कुछ दलाल किस्म के लोग एक सिंडिकेट के रूप में कार्य करते हुए शासकीय खाद्यान्नों की कालाबाजारी दिन-रात कर रहे हैं जिसके लालच में आकर PDS दुकान संचालक से लेकर हितग्राही तक शासकीय खाद्यान्नों की खरीदी बिक्री कर रहे हैं कई बार शासकीय खाद्यान्नों की अफरा-तफरी करते हुए कई लोग एवं वाहन पकड़े गए लेकिन सख्त कार्रवाई ना होने के कारण काला बजारी में लगे लोगों के हौसले आज भी बुलंद है। पूरे जिले में लगभग सैकड़ों PDS दुकान संचालकों के द्वारा शासकीय खाद्यान्न की चोरी व कालाबाजारी की गई है और प्रकरण तैयार कर वसूली के लिए लगा है लेकिन शिथिल प्रशासनिक व्यवस्था के कारण उन पीडीएस दुकान संचालकों से अभी तक ना तो वसूली हो सकी है और ना ही उनके इस जघन्य कृत्य करने पर FIR हो सका है। जबकि अन्य प्रदेशों में एवं कोरबा के पड़ोसी व छ.ग. के अन्य जिलों में शासकीय खाद्यान्न की अफरा-तफरी एवं कालाबाजारी करने वाले PDS दुकान संचालकों के ऊपर सख्त से सख्त व वैधानिक कार्रवाई की गई है। लेकिन कोरबा जिला में सख्त कार्यवाही ना होना समझ के परे है। इसके कारण भी उनके हौसले बुलंद होते चले जा रहे हैं।
भाजपा सहकरिता प्रकोष्ठ के जिला सह संयोजक ने आरोप लगाया कि पूरे जिले में धान उपार्जन से लेकर कस्टम मिलिंग एवं सीएमआर के चावल का वेयरहाउस (नान) के गोदामों में भंडारण एवं गोदामों से लेकर PDS दुकानों के माध्यम से हितग्राहियों के वितरण तक पूरा शासकीय सिस्टम भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ चुका है। जिसके कारण जनता में आक्रोश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ प्रदेश व सरकार की छवि भी खराब हो रही है जो आने वाले समय में और भी विकराल रूप धारण कर सकती है। इससे जिले के साथ-साथ प्रदेश की भी बदनामी होनी तय है। समय रहते जिले की सभी दुकानों के खाद्यान्नों का भौतिक सत्यापन करा कर सही सही मात्रा एनआईसी की वेबसाइटों में दर्ज करवाने की कृपा करें। जांच में यदि किसी प्रकार की भी कोई अनियमितता, कालाबाजारी या भ्रष्टाचार किया गया हो तो संबंधित दोषी व्यक्तियों, संस्थाओं अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने की कृपा करें। क्योंकि सभी संबंधित शासकीय विभाग किसी भी प्रकार की कार्यवाही व जवाबदेही से मौखिक व लिखित रूप से हमेशा बचते आ रहे हैं और अपने कर्तव्यों का परिपालन नहीं कर रहे हैं।









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