
कोरबा/ अमर शहीद हेमू कलानी की पुण्यतिथि पर आज उन्हें पूज्य सिंधी पंचायत द्वारा हेमू कालाणी नगर में अमर शहीद हेमू कालाणी का स्मरण किया और श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में किशनचंद्र दावड़ा ने कहा कि शहीद हेमू कालाणी का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। अल्प आयु में ही उन्होंने देश के लिए शहादत देकर एक मिशाल कायम की जो इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगी।

इससे पहले समाज के अध्यक्ष किशन दावड़ा पूर्व अध्यक्ष श्री कंवर राम मनवानी, परसराम रामानी, नरेश जगवानी, प्रेम रामचंदानी ओम प्रकाश गंवानी सहित समाज के प्रमुख लोगों ने उपस्थित होकर हेमू कालाणी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उनके शहादत को याद किया। इस अवसर पर लेखक सुरेशचंद रोहरा के उपन्यास फेंटेसी आओ शहीदे वतन हेमू कलानी का विमोचन कर पुस्तक अध्यक्ष किशन दावड़ा एमडी माखीजा व अन्य को भेंट की गई। श्री रोहरा ने हेमू कलानी पर लिखे उपन्यास के संदर्भ में अपने संबोधन में कहा कि यह एक फेंटेसी है जिसमें सिंधु संस्कृति और सभ्यता की रक्षा करने की एक रोचक कथा है। शहादत दिवस पर उपस्थित प्रमुख लोगों ने शहीद हेम् कलानी को श्रद्धांजलि दी जिनमें प्रमुख रूप से कंवर राम मनवानी, किशन दावड़ा, किशन सचदेव, चंदन दास कोटवानी, राजकुमार गनवानी, परसराम् रोहरा, रवि लालवानी, रूपेश मालानी, बनवारी पाहुजा, श्रीमती मीत रोहरा अध्यक्ष महिला मंडल व शालू टेवानी व अन्य की गरिमामय उपस्थिति रही।

इस अवसर पर पूज्य सिंधी पंचायत कोरबा के पदाधिकारियों श्री मुरलीधर माखीजा, श्री कंवर लाल मनवानी, श्री किशनचंद दावड़ा, श्री परसराम रामानी श्री सुरेशचंद्र रोहरा, स्वामी भाई बाजाराम दरबार के गादीनशीन संत श्री नारायण दास जज्ञासी एवं सिंधु महिला मंडल की अध्यक्षा श्रीमती मीत रोहरा ने सभा को सम्बोधित किया और कहा अमर शहीद वीर क्रांतिकारी हेमू कालाणी ने अल्पायु में ही देश की आजादी की लड़ाई में शामिल होकर अंग्रेजों के खिलाफ ऐसी मुहिम छेड़ी कि अंग्रेजी हुकूमत को मात्र उन्नीस वर्ष की आयु में ही फांसी के फंदे पर लटकाना पड़ गया। ऐसे महान एवं निडर क्रांतिकारी पर देश एवं समाज को गर्व है।











Comments are closed.