
कोरबा।हाथी के उत्पात ने जिले के ग्रामीण आदिवासियों का जीना मुहाल कर रखा है।जंगली हाथी कोरबा जिले के विकासखंड पौड़ी उपरोड़ा का कोई गांव नहीं है जहां पर हाथी उत्पात ना मचा रहे हो। खास तौर पर पसान , चोटिया, मोरगा क्षेत्र में आए दिन किसी न किसी की मौत हाथी द्वारा हो रही है। वन विभाग अपने अहिंसा के रास्ते को अपनाते हुए लाठी-डंडे से हाथी को भगाने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन वन विभाग भी अपने उत्तरदायित्व से या हाथी को भगाने से असफल साबित हो रहा है।रात्रि के समय वन विभाग की कोई भी कर्मचारी गांव के आसपास नहीं रहते, भगवान भरोसे और हाथी के भरोसे छोड़ कर अपने कार्य को इतिश्री कर लेते हैं। फिर सुबह उठने पर मौके वारदात पर आकर देखते कि हाथी ने कितना नुकसान किया है जब उनको दिखता है ज्यादा नुकसान हुआ है और उनको फायदा होने वाला है तब वह प्रकरण बनाते हैं मुआवजा का या अन्यथा वन विभाग के कान में जूं भी नहीं रहता कि हाथी को नियंत्रण कैसे करें आज इसी का परिणाम है कि विशेष जनजाति परिवारों को हाथियों के द्वारा वृहद रूप से नुकसान पहुंचाया गया। उनके बर्तन, उनके बकरी उनके परिवार को मारने के लिये हाथी के द्वारा किया गया बर्तन को तोड़ा गया, यहां तक कि जो लोग निस्तार के लिए पानी पीते थे हैंडपंप ,उसे भी हाथी ने नुकसान पहुंचा दिया है।
अब देखना है यह है कि छत्तीसगढ़ शासन वन विभाग और पसान के कर्मचारी अपने उत्तरदायित्व में कितना सफलता प्राप्त करते हैं लोगों को मुआवजा देने में । जब तक हाथियों का रहवास एवं स्थाई पर्यावरण के साथ उनको जोड़कर कार्ययोजना नहीं बनायी जाएगी तब तक या उत्पात और द्वंद हाथियों एवं वन में रहने वाले निवासियों के साथ होता रहेगा या तो हाथी हमें मारेगा या किसी कारण से हाथी मर गया तो वहां के क्षेत्र रहने वालों को भी संवैधानिक प्रक्रिया से काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है इसका जितना जल्दी हो सके निर्णायक निर्णय के साथ हाथी से जान माल की निजात दिलाने का छत्तीसगढ़ शासन को भी प्रयास करना महत्वपूर्ण कार्य है अन्यथा जंगली जानवरों के साथ आम जनता का संघर्ष लगातार चलता रहेगा।









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