यह शीर्षक बिलकुल उपयुक्त है, जो मैं कहने जा रहा हूँ उसके लिए। कोरोना महामारी के शुरू होते ही जितनी भी सावधानियां लेनी चाहिए और जो भी सतर्कता बरतनी चाहिए सारा कुछ अपनाने के बाद भी अगर कोरोना वही कोविड 19 हो जाये तो आप क्या कहेंगे? यही न कि कोरोना कहीं से भी आक्रमण कर सकता है। मेरे साथ भी बिलकुल यही हुआ। पूरी सावधानी और सतर्कता बरतने के बावजूद अगस्त के शुरुआत में हल्के बुखार से शुरू होकर सांस लेने में मुश्किल और हृदयगति बढ़ना जैसे लक्षणों से स्वास्थ्य खराब होने लगा। कोविड 19 जांच करवाया तो पता चली पोजिटिव है और कोरोना का असर 12 से 15% के बीच है। सलाह दी गई की अस्पताल में भर्ती हो जाएँ। शहर के बहुत से अस्पतालों में जगह नहीं, सुन सुन के मेरी तबीयत और खराब होने लगी। संयोगवश एक कॉर्पोरेट अस्पताल में एक अकेला कमरा मिला। भर्ती हो गया। एकांतवास में पाँच दिनों तक डॉक्टरों, नर्सों और अस्पताल के कर्मियों ने बड़ी सेवा की, बड़ी अच्छी दवाइयाँ दी और इलाज़ किया। हर दो घंटे में डॉक्टर आकर देखते चाहे दिन हो या रात। पाँच दिनों में सारी दिक्कतें जाती रहीं। तीन चार बार रक्त की जांच करके उन्होने पुष्टि की की अब कोरोना नेगटिव है और पांचवें दिन शाम को मैं केवल कमजोरी के साथ अस्पताल से मुक्त हुआ और घर आ गया। अब बिलकुल सानंद और स्वस्थ हूँ। दोस्तों की और परिजनों की दुआएं ऐसे वक्त पर ही तो काम करती हैं।

अनलॉक के बाद तो हम जनता ने अनुशासन और और सावधानियों को ताक पर रखकर बस भेड़ बकरियों की तरह सड़कों, गलियों, दुकानों और बाज़ारों में भारत की जनसंख्या का नमूना दिखाने कूद पड़े। न मास्क, न शील्ड और न सेनीटाइजर, बस जैसे आज़ादी आज ही मिली हो सारा शहर जैसे मेले में व्यस्त हो, लोग सड़कों पर हैं। सरकार ने जो करना था कर दिया लॉक डाउन के दौरान। अब अनलॉक करके चेतावनी दी है की अब अपनी सुरक्षा आप करो, सावधानी बरतो, कुछ छूट है पर कोरोना अभी भी अपनी पूरी शिद्दत के साथ कारगर है। अनलॉक को आज़ादी मानकर स्वच्छंद और विशृखल होकर बर्ताव करना क्या हमारे अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं हैं?
मेरे शहर विशाखपटनम और विशाखापटनम ज़िले की बात करें तो पिछले 5 दिनों से प्रतिदिन कोरोना मरीजों की संख्या 400 से 500 के बीच है, जो कि पहले यानी अगस्त माह में और सितंबर के शुरुआत में प्रतिदिन लगभग 1000 हुआ करती थी। यहाँ उल्लेख करना आवश्यक है कि विशाखपटनम ज़िले में प्रतिदिन 6000 से 7000 सैंपल का परीक्षण किया जाता है। अब तो इलाज़ के लिए भी पूरी पूरी सुविधाएं पूरे शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी मुहैया कराई गई हैं। अब मृत्यु दर भी पहले की बनिस्बत कम है। स्वस्थ होकर लौटने वाले मरीजों का प्रतिशत 82% है जबकि मृतकों का प्रतिशत 1 से भी कम है। वेंटिलेटर और आईसीयू के मरीजों की संख्या दिन ब दिन कम हो रही है। ये सब शुभ और सकारात्मक संकेत हैं। मरीजों की संख्या और भी कम हो सकती है अगर सारी जनता अनुशासनबद्ध होकर सतर्क रहे और सावधानियाँ बरते तो कोरोना के जाने और पुरानी खुशियों के लौटने के दिन दूर नहीं।







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