
दिल्ली/ देश की अग्रणी साहित्यिक संस्था हिंदी की गूँज के संयोजक व वरिष्ठ कवि लेखक नरेंद्र सिंह नीहार ने संत फिलोमिना कॉलेज की फिलो हिंदी क्लब, हिंदी विभाग मैसूरु द्वारा आयोजित राष्ट्रीय व्याख्यान माला कार्यक्रम के अंतर्गत आधुनिक कविताओं में राष्ट्रीय चेतना के स्वर विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा –
मुर्दा है वह देश, जहाँ साहित्य नहीं।
अंधकार है वहाँ, जहाँ आदित्य नहीं।
राष्ट्रीय चेतना और देश प्रेम से ओतप्रोत अपने व्याख्यान में नीहार जी ने भारतेन्दु युग से लेकर सम्प्रति कवियों की कलम से निकली काव्य रचनाओं के मोतियों को चुन चुन कर क्रमबद्ध तरीके और बड़े सुन्दर ढंग से बताया। उनका बहुआयामी व्याख्यान बहुत ही ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी रहा। उन्होंने बड़े ही प्रभावशाली ढंग से राष्ट्र चेतना के अर्थ को उद्घाटित करते हुए कहा कि आजादी के पहले झंडा उठाकर देश की आजादी के लिए नारे लगाना राष्ट्रीय चेतना की मुखर अभिव्यक्ति था मगर आजादी मिलने के बाद देश की एकता, अखंडता, पर्यावरण, स्वच्छता, भ्रष्टाचार उन्मूलन और समस्त नागरिकों के कल्याण को सुनिश्चित करना ही राष्ट्रीय चेतना कहा जा सकता है।आधुनिक हिन्दी कविता के सिरमौर मैथिलीशरण गुप्त, जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, शिवमंगल सिंह सुमन, दुष्यंत कुमार, भारतेंदु बाबू हरिश्चंद्र की कविताओं के साथ-साथ मुंशी प्रेमचंद जी की रचनाओं का भी उल्लेख किया, जिसने सभी को अपने पढ़ाई के समय की पुरानी स्मृतियों से जोड़ दिया । नीहार जी ने जिस तरह से हिन्दी साहित्य में कविता के स्थान तथा महत्व को बताया वर्तमान समय में आवश्यकता है ऐसे वक्तव्य की, विद्यार्थियों की रूचि हिन्दी साहित्य में बढाने के लिए।
इस मौके पर उक्त कॉलेज के रेवरेंट फादर बर्नाड प्रकाश बार्नीस, रेक्टर मैनेजर, रेवरेंट फादर मारिया ज़ेवियर वाईस रेक्टर, रेवरेंट फादर जॉन पौल
कैम्पस एडमिनिस्ट्रेटर, डॉ अल्फोंसूस दीसोउजा
प्रांशुपालक, विद्याधर संजय नायर उप प्रांशुपालक व कार्यक्रम संयोजक व हिंदी विभाग की विभागाद्यक्ष डॉ पूर्णिमा उमेश आदि मौजूद रहे।
श्रोता के रूप में निर्मला जोशी, गिरीश जोशी,जी आर शर्मा, डॉ विनोद चौहान प्रसून, डॉ ममता श्रीवास्तवा,प्रमोद चौहान, तरूणा पुंडीर,भावना अरोरा,रोचिका शर्मा आदि ने जुडकर अपने संदेशों के माध्यम से नरेन्द्र सिंह नीहार जी के वक्तव्य की प्रशंसा की तथा उन्हें शुभकामनाएँ प्रेषित की।







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