मिल्‍खा सिंह की जीत से ज्‍यादा हार की होती है चर्चा, ‘एक आदत’ ने तोड़ दिया था सपना

नई दिल्‍ली. भारत के महान धावक फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर मिल्‍खा सिंह ने दुनिया को अलविदा कह दिया है. अपने करियर में बड़ी से बड़ी और मुश्किल से मुश्किल रेस जीतने वाले मिल्‍खा से हार गए. वह जिंदगी की रेस में भी जीत के लगभग करीब पहुंच चुके थे, मगर 91 साल का ये महान एथलीट जीतते जीतते रोम ओलिंपिक की तरह हार गया और एक बार फिर कभी न भुला पाने वाला दर्द भी दे गया. भारत ने अपना महान खिलाड़ी खो दिया है.
4 बार के एशियन गोल्‍ड मेडलिस्‍ट मिल्‍खा सिंह ने अपने करियर में कई खिताब जीते, मगर आज भी उनकी एक हार की चर्चा पूरी दुनिया भर में होती है. वो हार जिसका दर्द आज भी देश नहीं भुला पाया. मिल्‍खा सिंह ने 1956, 1960 और 1964 ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्‍व किया था. 1960 रोम ओलिंपिक का नाम आते ही मिल्‍खा सिंह की 400 मीटर की फाइनल रेस की यादें ताजा हो जाती है.
मिल्‍खा सिंह से थी गोल्‍ड की उम्‍मीद
हर किसी को उम्‍मीद थी कि मिल्‍खा गोल्‍ड मेडल जीतेंगे, मगर वो चौथे स्‍थान पर रहे. जबकि इस रेस में कई रिकॉर्ड टूट गए थे. वह सेकंड के कुछ हिस्‍से से ओलिंपिक मेडलिस्‍ट बनने से चूक गए. रोम ओलिंपिक में मिल्‍खा सिंह पांचवी हीट में दूसरे स्‍थान पर रहे थे. क्‍वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में भी दूसरे स्‍थान पर रहे थे. 1960 में 400 मीटर का फाइनल दो दिन बाद हुआ. इन दो दिनों में मिल्‍खा थोड़े से दबाव में भी आ गए थे. फाइनल रेस में कार्ल कॉफमैन पहली लेन, अमेरिका के ओटिस डेविस दूसरी लेन, मिल्‍खा सिंह पांचवीं लेन और जर्मनी का एथलीट छठी लेन थे.
200 मीटर तक लीड कर रहे थे मिल्‍खा
मिल्‍खा करीब 200 मीटर तक लीड कर रहे थे. मगर तभी उनके मन में ख्‍याल आया कि वह काफी तेज दौड़ रहे हैं और हो सकता है कि वह रेस पूरा नहीं पाएं. बीसीसी को काफी समय पहले एक इंटरव्‍यू में मिल्‍खा सिंह ने बताया था कि इसी वजह से उन्‍होंने अपनी गति को थोड़ा कम किया था और एक बार पीछे मुड़कर देख लिया था. इसके बाद उन्‍होंने देखा कि तीन चार खिलाड़ी उनसे आगे निकल गए हैं. उन्‍होंने उनसे आगे निकलने की कोशिश की, मगर तब बहुत देर हो गई थी.
फोटो फिनिश से हुआ फैसला
भारत के हाथ से उसी समय मेडल भी फिसल गया था. यह बहुत नजदीकी रेस थी. शुरुआती चार स्‍थानों का फैसला फोटो फिनिश से हुआ. सेकंड के सौवे हिस्‍से से डेविस ने कॉफमैन को पीछे छोड़कर गोल्‍ड जीता. कई बार कॉफमैन दूसरे और स्‍पेंस तीसरे स्‍थान पर हे. मिल्‍खा सिंह 45.73 के साथ चौथे स्‍थान पर रहे. इसी के साथ भारत को कभी न भुला पाने दर्द मिल गया.

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