आई संकट की घड़ी, कर संकट से पार ।
जग कल्याणी माँ करूँ, विनती बारंबार ।।
ज्योत जले जगमग सदा ,मां तेरे दरबार ।
हे माता जगदंबिके , गुण गाए संसार।।
सुमिरन तेरा मैं करुं, कर पूजा दिन रात।
कोरोना अब नाश हो, अंबे मेरी मात।।
विनती तेरी हम करें ,दे दें मां आशीष।
दूर हटे विपदा सभी , झुका रहे ये शीश।।
राक्षस का संहार कर, है कोरोना नाम।
देवी कष्ट निवारिणी, सुमरें तेरा नाम।।
कोरोना आया लगे , जैसे बनकर काल ।
माँ इससे रक्षा करो , हो रहा बुरा हाल ।।
नाव पड़ी मझधार में, जगदंबा कर पार।
तेरी राह निहारता , अब पूरा संसार ।।
सुरसा जैसी बढ़ रही, बीमारी दिन रात।
इसे खत्म कर देखना ,माँ देगी सौगात
अखिल विश्व से नाश हो , कोरोना का आज।
माँ सबकी रक्षा करो , बिगड़ न पाए काज।।

गायत्री शर्मा ‘प्रीत’






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