हर नारी की पीड़ा समझे
ऐसी थी वो देवी,
श्वेत वस्त्र में सरस्वती सी
सचमुच लगतीं देवी,
खुद का जीवन दान किया जग को
बना छायावाद की बेदी
नतमस्तक थे कवि निराला ,पंत
और प्रसाद जी
सुभद्रा की प्रिय सखी थीं वो
कायस्थ वंश की बेटी ,
बापू की अनुयायी थीं वो
कहलाई महिला मुक्तिवादी
नीरजा, नीहार, रश्मि या
हो दीपशिखा, सांध्यगीत
अतीत के चलचित्र बनाया
स्मृति की रेखाएं खींच
मेरा परिवार से संस्मरण तक
थे पथ के साथी
गिल्लू,भक्तिन,या हो चीनी भाई
सबकी प्रिय और आदर्श थीं
महिला विद्यापीठ हो या
गांधी आंदोलन सबमें रही अग्रणी
नारी का आदर्श बनी
सदाचार अपना कर
गर्व से कहती ममता धन्य हुई मैं
जो शोध किया उन पर ,
नाम था जिसका महादेवी।
✍डाॅ ममता श्रीवास्तवा, सरूनाथ
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