छत्तीसगढ़ की औद्योगिक तीर्थ कोरबा नगरी से एक दशक से दैनिक लोक सदन का प्रकाशन अबाध गति से जारी है। बीते 30 जनवरी को महात्मा गांधी की 73 वी पुण्यतिथि पर संपादक सुरेशचंद्र रोहरा ने एक अग्रलेख लिखा,-” लोक सदन महात्मा गांधी के श्री चरणों में समर्पित”
दरअसल, अखबार को एक नई दिशा देते हुए गांधीवादी सुरेशचंद्र रोहरा ने अखबार को ” राष्ट्र का एकमेव महात्मा गांधी के सिद्धांतों का संवाहक”अखबार घोषित कर प्रथम पृष्ठ पर यह स्लोगन प्रकाशित करना शुरू कर दिया है। उन्होंने जो संपादकीय अग्रलेख लिखा है शब्दशः प्रस्तुत है। पढ़िए और देखिए अखिर पत्रकारिता का यह प्रयोग और प्रयास किस मुकाम को हासिल करता है।
कुल जमा एक दैनिक समाचार पत्र महात्मा गांधी के जीवन मूल्यों पर समर्पित हो कर क्या दशा और दिशा निर्धारित करेगा यह देखना दिलचस्प होगा।
घनश्याम

अग्रलेख ——सुरेशचंद्र रोहरा
“लोक सदन” महात्मा गांधी के श्री चरणों में समर्पित….
आज 30 जनवरी 2021 से लोक सदन एक नए संकल्प भावना और आस्था के साथ आपके समक्ष आ रहा है। देश में, दुनिया में समाचार पत्र तो जाने कितने हैं। और कहा भी गया है कि “खींचो ना तीर कमान से ना तलवार निकालो
जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो”
क्योंकि यह माना गया है कि अखबार, समाचार पत्र,पत्रिकाएं दरअसल, शब्दों की यह साधना, एक भावना और सिद्धांत को लेकर के प्रकाशित किए जाते हैं। जिसका एकमात्र उद्देश्य देश और दुनिया को बेहतर बनाना होता है।
समाज में एक नई दिशा की स्थापना एक नई रोशनी और बेहतरी की कोशिश होती है यही वजह है कि आधुनिक काल के महत्वपूर्ण कवि माधव मुक्तिबोध कहते हैं-
” जो है उससे बेहतर चाहिए
सारी दुनिया की सफाई
के लिए मेहतर चाहिए।”
शायद यही कारण है कि अब जब “लोक सदन” नए स्वरूप में आज से आपके सामने है तो हम प्रकाशकीय और संपादकीय टीम के एक नए भाव के साथ आपके समक्ष आ रहे हैं, यह भाव है महात्मा मोहनदास करमचंद गांधी के दर्शन को जन जन तक पहुंचाने का हम अपनी पूरी ताकत और शिद्दत के साथ राष्ट्रपिता के जीवन और उनके संघर्ष को जनमानस तक पहुंचाने का प्याज करना चाहते हैं।
हमारे राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी का जीवन जैसा कि हम जानते हैं एक खुली हुई किताब था उन्होंने कहा था मेरे जीवन को देखना मुझे देखना और चलने समझने का प्रयास करना।
सो से पाठकों! हमने लोक सदन के बरअक्स महात्मा गांधी को देखने का समझने का और उनके सिद्धांतों को जीवन संघर्ष को जन जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया है…. हम दृढ़ता पूर्वक यह संदेश आज आपके समक्ष रख रहे हैं कि “लोक सदन” अब महात्मा गांधी के विचारों का संदेश का संवाहक होगा। गांधी के जीवन और संघर्ष को आज के मायने में जन जन तक पहुंचाने का काम हम करेंगे। इस तरह “लोक सदन” एक ऐसा मंच बनाने का प्रयास किया जाएगा जो गांधी की सर्व सिद्धांतों को जमीनी हकीकत बनाने का प्रयास करेगा। निसंदेह यह एक कठिन काम है क्योंकि गांधी का चिंतन, दर्शन विराट है। उन्होंने जहां खादी, सत्य, अहिंसा सत्याग्रह की बात कही है, वहीं ऐसी ऐसी छोटी छोटी बातें भी बड़ी ही प्रमुखता के साथ जी है जो मनुष्यता के लिए एक संदेश है।
मगर हम उसे महसूस करना नहीं चाहते देख कर भी अनदेखा करते हैं। यही काम हमारे देश की सरकार भी कर रही है। अगर हम सच्चे अर्थों में गांधी के देश के बच्चे हैं तो हमें अपने श्रद्धेय बापू के सिद्धांतों को कुछ तो आत्मसात करना चाहिए। बस यही विचार हमारे इस संकल्प का कारण बना है।
राष्ट्रपिता गांधी जी की पुण्यतिथि संपूर्ण देश में मनाई जा रही है उनके संदेश को दोहराया जा रहा है बताया जा रहा है। मगर वही हमारे आसपास और देश में अंधेरे की कमी नहीं है अंधेरा और भी बहुत घना होता चला जा रहा है, जो एक रौशनी की मांग कर रहा है।लोक सदन समाचार पत्र एक नन्हे रोशनी के दिए की मानिंद अपना काम करेगा ऐसा हमारा संकल्प है।
यह अपने आप में एक बेहद मुश्किल, दुष्कर कार्य है समाचार पत्र का काम यह माना गया है कि वह आपको खबर दें और अपना मुंह बंद कर ले। आमतौर पर यही माना जाता है कि अखबार सिर्फ सूचना मात्र देने का एक माध्यम है। मगर मेरा यह आत्म कथन है कि एक अखबार सूचना स्रोत के साथ-साथ आपको चिंतन करने की भी औषधि मुहैय्या करवाएं। बहुतेरे अखबार यह काम बड़ी ईमानदारी से करते हैं। हम यह प्रयास करेंगे कि आप तो बेबाक और निष्पक्ष विचारों से अवगत कराते हुए आज के संदर्भ में गांधी के मूल्यों का एहसास भी कराते चलें।
निसंदेह कठिन कदम है क्योंकि जब मैंने लोक सदन अखबार को “गांधी के पथ” पर ले चलने का संकल्प कुछ मित्रों को बताया तो वह स्तब्ध रह गए… बात आगे बढ़ी तो एक मित्र ने कहा,-” ठहरो और सोच लो।”
एक अन्य शुभचिंतक ने इस विचार पर साफ साफ शब्दों में कहा कि-” यह कदम आत्मघाती हो सकता है।”
और एक मित्र ने तो यह भी कह दिया कि-” आप ऐसा न ही करें।”
वही कुछ सहयोगी और मित्र हमारे इस संकल्प से उत्साहित भी नजर आए और उन्होंने कहा,-” नहीं यह कदम आज की आवश्यकता है।”
मगर हमारे संकल्प कुछ आत्मीय मित्रों के प्रतिकार के बावजूद साकार रूप ले रहा है और यह मानना है कि यह संदेश आगे चलकर उन्हें भी मनभावन लगेगा। जयपुर के हमारे एक महत्वपूर्ण साहित्यकार श्री भगवान अटलानी एवं दिल्ली से श्री लोकमित्र, बिहार से श्री जफर हसन विशाखापट्टनम से डॉक्टर टी.महादेव राव, हमारे छत्तीसगढ़ के श्री नरेशचंद्र “नरेश” आदि ने हमें एक संबल प्रदान किया है । हमें विश्वास है कि जो रास्ता हमने निश्चित किया है उससे देश और दुनिया को एक रौशनी मिलेगी लोक सदन एक प्रकाश स्तंभ बन कर सामने आएगा।
gandhishwar.rohra@gmail.com
07747920885







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