
बात तो निस्संदेह सोलह आना सच है
कि गरीबी ,मानव मात्र के लिए अभिशाप है
राष्ट्र के पवित्र भाल पर कलंक का धब्बा है
अनेक समस्याओंसे मानवजीवन आक्रांत रहता है
उनमे गरीबी की समस्या काफी शोचनीय है
गरीब ,आर्थिक समस्याओं से ग्रसित रहता है
यही अति गरीबी …..बाल श्रम की जननी है
दो वक्त रोटी की व्यवस्था हो जाय जब दुष्कर
बच्चों से भी,करवाते हैं काम मांबाप मजबूर होकर
खेलने कूदने की उम्र वाले उनके छोटे सपूत सहायक बनकर बन जाते हैं उनके कमाऊ पूत
कठोर परिश्रम के कारण ….नाबालिग बच्चे बेचारे
हो जाते हैं मजबूरन शिकार कुपोषण के
न मिलपाता है पौष्टिक आहार बावजूद मेहनत के
बच्चों को प्राथमिक शिक्षा से भी वंचित करना
जीवन यापन हेतु बच्चों को भागीदार बनाना
खिलने के पहले ही मासूम पुष्प को मुरझाने देना
कहां तक उचित है ? ………..सोचो कोई जरा
गरीबीउन्मूलन से ही संभव है समस्याका समाधान
हर नागरिकको देनाहोगा अपना बहुमूल्य योगदान
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