आज देश भर में नशे के शिकंजे में आने वाले युवाओं की संख्या निरंतर बढ़ती ही जा रही है ,जोकि दोस्त एक बड़ी चिंता का विषय है। इस वक्त दोस्तों ड्रग्स नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और बॉलीवुड को लेकर हंगामा देश में हुआ है, हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। इसी दौरान केंद्र सरकार ने भी लोकसभा में नशे के बारे में आंकड़े पेश करके चौंकाने वाला खुलासा किया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 15 करोड़ बालिक लोग सिर्फ अल्कोहल के शौकीन है। दोस्त नशा एक ऐसी बुराई है, जिससे इंसान का अनमोल जीवन समय से पहले ही मौत का शिकार हो जाता है। आज नशे के लिए समाज में शराब ,गांजा ,भांग अफीम जर्दा गुटखा तंबाकू और धूम्रपान बीड़ी सिगरेट हुक्का चिलम सहित सरस कोकीन ब्राउन शुगर जैसे घातक मादक दवाओं और पदार्थों का समाज में जहरीले और नशीले पदार्थों का प्रयोग किया जा रहा है। इस जहरीले और नशीले पदार्थों के सेवन से व्यक्तियों को शारीरिक मानसिक और आर्थिक हानि पहुंचने के साथ ही सामाजिक वातावरण भी प्रदूषित होता है। इसके साथ ही स्वयं का और परिवार का भी सामाजिक और आर्थिक स्थिति को भी बहुत नुकसान पहुंचता है। दोस्त एक पूर्ण नशा मुक्त व्यक्ति ही अपने परिवार , समाज एवं राष्ट्र की सर्वाधिक सेवा कर सकता है और राष्ट्र तथा समाज के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकता है।
अगर हम विज्ञान की नजर से देखें तो नशे की लत एक बीमारी है, जिसमें व्यक्ति का स्वयं पर नियंत्रण नहीं रहता है। आज नशाखोरी भारतीय समाज में बड़ी समस्या बनती जा रही है। अक्सर देखने में आता है कि लोग जीवन के तनाव या विफलताओं से पीछा छुड़ाने के लिए नशे की लत का सहारा लेते हैं, जिसका परिणाम दोस्त यह होता है कि उन्हें नशा एक दिन गुलाम बना देती है। आज दोस्त हमारे समाज में 80 फ़ीसदी से अधिक अपराध लोग नशे की हालत में ही करते हैं, या किसी अपराध को अंजाम तक पहुंचाने के लिए लोग नशा करते हैं। यह भी सत्य है कि आप किसी नशेड़ी व्यक्ति को तर्क के आधार पर पराजित नहीं कर सकते, उनके पास इतने सारे कुतर्क होते हैं कि जिनके जवाब आपके पास नहीं होंगे, वह बोलते हैं कि हम तो अपने गम भुलाने के लिए पीते हैं, नशा करने से दिमाग हल्का हो जाता है टेंशन दूर हो जाती है। दोस्तों पिछले कुछ वर्षों से मैं भी अपने समय में से कुछ समय निकालकर इन नशेड़ी लोगों को नशा छुड़ाने के लिए काम कर रहा हूं, ऐसे ऐसे इनके कुतर्क होते हैं कि मुझे हाथ जोड़ जोड़ कर अनुरोध करना पड़ता है। पिछले वर्ष में ही पूरे भारत में नशा मुक्ति , महिला सशक्तिकरण और बाल श्रम जैसे सामाजिक समस्याओं को लेकर जागरूक और काम करने के लिए मुझे 2019 का राष्ट्रीय कैमूर रत्न से खनन एवं उत्खनन मंत्री जी ने सम्मानित किया था। आपको बता दें दोस्तों की सिविल सर्विसेज की परीक्षा के तैयारी के साथ ही प्रतिदिन 15 मिनट समाज में जागरूकता लाने के लिए काम करता हूं दिल्ली के मुखर्जी नगर में सिगरेट और तंबाकू के दुकानों पर जा -जा कर लोगों को प्रेरित करता रहता हूं इसमें आप सभी भी अपना सहयोग दें । दोस्त याद रखना किसी भी देश के विकास में युवाओं की प्रमुख भूमिका होती है अगर हमारा युवा ही खत्म तो देश ही खत्म इसलिए हमे अपने युवाओं को बचाने के लिए हमें आगे आना ही होगा। आप दोस्त अभी उस परिवार की कल्पना कीजिए जिसमें पांच से छह सदस्य हो तथा घर का एकमात्र मुखिया जो कमाता हो , उसे नशे की लत लग गई है, उसके परिवार के सभी सदस्य उस मुखिया के घर आने का इंतजार कर रहे हैं जिससे चूल्हा जलाया जाए, मगर यदि वही हाथ में शराब की बोतल अश्लील बातें कहते हुए घर में आकर मारपीट शुरू कर दे, परिवार के सदस्यों का जीवन कैसा होगा। दोस्तों मैंने ऐसे परिवार अपनी छोटी सी उम्र में बहुत से देखी है, जिनके बच्चे भूख से तड़प रहे हैं और घर का मुखिया शराब पीकर कहीं रोड पर पड़ा हुआ है। दोस्त ऐसे लोगों को शारीरिक चोट से ज्यादा मान सम्मान का भी नुकसान होता है, पड़ोसी लोग उन पर हंसने लगते हैं, शराबी की बीवी बेटा जैसे शब्दों से संबोधित किया जाता है। आज हमें संकल्प करना है कि हम एक नए विचारों का समाज बनाएंगे,जिसमें इन सामाजिक बुराइयों का कोई स्थान ही नहीं होगा , जो भी व्यक्ति नशेड़ी हमें दिखे हम अपने स्तर पर कोशिश करेंगे कि उन्हें यह लत छुड़ाएं तथा हम एक अच्छे समाज का सदस्य होने के नाते उन्हें कठिनाई भरे जीवन पर बुरे कमेंट करने की बजाय उस व्यक्ति के इस बुराई को पीछा छुड़ाने में हम मदद करें। जिस प्रकार से आज मिजोरम और बिहार में कानूनी रूप से शराब और तंबाकू पर प्रतिबंध लगाया गया है उसी प्रकार से पूरे देश में देशव्यापी लगाने की जरूरत है। आज सरकार अपनी राजस्व को बढ़ाने के लिए जिस प्रकार से शराब परोस रही है वह समाज के हित में कतई नहीं है क्योंकि विश्व स्वास्थ संगठन भी कई बार बोल चुका है कि जितना सरकार राजस्व नहीं कमा पाती है इस जहरीली शराब से उससे कहीं अधिक इन नशेड़ी लोगों के जीवन को बचाने में खर्च हो जाता है और समाज में अलग-अलग बुराइयां फैलती है वह हम सभी के सामने हैं। दोस्त नशे की समस्या से जुड़ी चुनौतियों का दायरा आज निरंतर बढ़ता जा रहा है । नशे की समस्या आज फिल्म इंडस्ट्री तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह असल में एक सामाजिक समस्या भी है जो परंपरागत पारिवारिक ढांचों के बिखराव , सामाजिक अलगाव ,जीवन शैली आदि पर भी हावी हो रही है व नैतिक मूल्यों के पतन के साथ और भी बढ़ती जा रही है। सरकार और समाज दोनों को इस समस्या से निपटने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई करने की जरूरत है। वैसे दोस्तों यह समझ अब तक पैदा हो ही जानी चाहिए था। अगर आगे भी नहीं हुआ तो देश का हर तीसरा युवा नशे में लिप्त होगा, यह तो आप भी जानते हैं कि किसी भी देश के विकास में युवाओं का प्रमुख भूमिका होता है जिस देश का युवा खत्म उस देश का क्या हालात होता है आप जानते हैं। याद रखना मेरे बात को अगर देश का युवा खत्म तो देश भी खत्म इसीलिए देश के सभी सम्मानित जागरुक साथियों से अनुरोध करता हूं कि आप अपने सामर्थ्य अनुसार देश के युवाओं को जागरूक करने के लिए कम से कम 10 से 15 मिनट का समय जरूर निकालें। आज हम देखते हैं कि अधिकतर पढ़े लिखे लोग लोकतंत्र में अपने अधिकारों की बात तो करते हैं लेकिन कहीं ना कहीं कर्तव्यों को भूलते जा रहे हैं, लोग बोलते हुए मिल जाते हैं मुझे की संविधान के इस अनुच्छेद में हमारा यह अधिकार है लेकिन यह नहीं बोलते कि हमारा यह भी कर्तव्य है कि देश को समृद्ध बनाने के लिए हमारा यह यह कर्तव्य भी है, यह हम सभी का कर्तव्य है कि हम अपने देश के युवाओं को प्रेरित करें कि कैसे वह अपनी क्षमताओं को विकसित करके परिवार समाज और राष्ट्र के विकास में अपनी भागीदारी बना सकते हैं।

विक्रम चौरसिया







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