कोरबा(पाली) । भ्रष्टाचार की इन्तिहा देखनी है तो ज्यादा दूर जाने की जरूरत नही है। जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी में ही देखने को मिल जाएगी। जंहा खनिज न्यास मद से बनाये गए स्कूल भवन की दीवार स्कूल के उद्घाटन से पहले ही अपनी कहानी खुद बया करने लगी है। खनिज न्यास मद का कितना उपयोग अधिकारी कर रहे है। इसका जीता जागता उदाहरण ग्राम पंचायत लाफा है।

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार पाली के ग्राम पंचायत लाफा में बच्चों के शिक्षा को लेकर लम्बी लड़ाई लड़ी गई थी। उसके बाद भी ग्राम पंचायत को स्कूल भवन की सौगात नही मिल पा रही थी। इसके लिए कई बार प्रयास किया गया जिसके फलस्वरूप खनिज न्यास मद से 134.71 लाख की लागत से स्कूल भवन बनाये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई थी। इस काम के लिए निविदा का आमंत्रण भी किया गया था। कि ठेकेदारों ने निविदा भरकर कार्य किये जाने की सहमति प्रदान की थी। लेकिन कुछ अधिकारियों की मिली भगत के कारण अधिकारी के चहेते ठेकेदार को काम प्रदान किया था।
काम प्रदान किये जाने के एवज में ठेकेदार ने उक्त अधिकारी को मोटी रकम प्रदान की थी। यही कारण है कि ठेकेदार के काम में उक्त अधिकारी ने कोई हस्तक्षेप नही किया। जिसका नतीजा ये निकला की स्कूल भवन की दीवार गुणवत्ताहीन बना दी गई। जो स्कूल तैयार होने के दौरान ही दीवारों में दरारें आनी शुरू हो गई थी। लेकिन भ्रष्टाचार की जद में दीवारों की दरारे भी मिटा दी गई। लेकिन कहते है बुराई लाख छुपाई जाए पर एक दिन वो सामने आ ही जाती है। इस काम मे भी यही हुआ। ठेकेदार ने स्कूल भवन तो बना कर तैयार कर दिया। पर गुणवत्ता में किये गए समझौत ने अपनी कहानी खुद बया करने लगी है।
स्कूल भवन बनकर तैयार हो गया है उसका उद्घाटन किया जाना बाकी है। पर दीवारों में आ रही दरार ठेकेदार व अधिकारी की मिली भगत की कहानी बताने को बेताब नजर आ रहा है। जब दीवारों की दरार के बारे में ठेकेदार को जानकारी हुई। तो ठेकेदार ने उन दरारों को पुट्ठी से छुपाने का काम शुरू किया है। हम यंहा ये बताना चाहते है कि जो भ्रष्टाचार की कहानी हम सुना रहे है। ये कोई पहला भ्रष्टाचार नही है। बल्कि इससे पहले भी ठेकेदार व अधिकारियों की मिली भगत से कई गुणवत्ताहीन कार्यो को अंजाम दिया जा चुका है। जिसकी जांच कराई जाए तो पूरा माजरा ही खुलकर सामने आ जायेगा। पर कहते है ना जब सैया भये कोतवाल तो डर कहे का ये कहावत पाली के ग्राम पंचायत लाफा में चरितार्थ हो रही है। जिला प्रशासन ऐसे कार्यो को अंजाम देने वाले ठेकेदार व अधिकारियों पर कोई ठोस कार्यवाही करती है नही ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा।







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