पत्रकार छेदीलाल अग्रवाल से साक्षात्कार- प्रिंट मीडिया कल भी थी, आज भी है और कल भी रहेगी


छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता के प्रमुख स्तंभ अंचल के दैनिक अखबार मितान के प्रधान संपादक छेदीलाल अग्रवाल लगभग 50 वर्ष से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। आप छत्तीसगढ़ के “सेपा” पत्रकार संगठन के अध्यक्ष हैं। जन्म जयंती के अवसर पर हमारे संपादक सुरेशचंद्र रोहरा द्वारा उनसे खास बातचीत की गई जो यहां प्रस्तुत है-
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? आप पत्रकारिता में कब और कैसे आ गए।
-पत्रकारिता में मैं आया नहीं, एक तरह से मुझे लाया गया। मुझे याद आता है जब मैं सातवीं आठवीं कक्षा में अध्ययनरत था युगधर्म और नवभारत समाचार पत्रों में लोकवाणी , जनवाणी में लिखने लगा था। वह छोटे-छोटे पत्र इतनी प्राथमिकता के साथ प्रकाशित होते थे और लोग पढ़ते थे। धीरे-धीरे मेरा सम्मान बढ़ता चला गया और मेरी रुचि भी।
? यह कब की बात है और कहां की।
-मेरा जन्म सक्ती में हुआ मेरे बड़े भाई नगर पालिका परिषद के 10 वर्ष से अधिक समय तक अध्यक्ष भी रहे जब मैंने होश संभाला तो लेखन के प्रति रुचि जागृत हुई और मैं समाचार पत्रों में लिखता चला गया। इसके बाद दिल्ली की पत्रिका दिनमान, माधुरी में भी मैंने बहुत लिखा।
? उस समय की महत्वपूर्ण लेखनी और समय की क्या समस्याएं थी।
-हां, आपका यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। मैं आपको बताऊं मैं लोकवाणी और जनवरी में कश्मीर के मसले पर बहुत लिखता था उस समय फारूक अब्दुल्ला मुख्यमंत्री हुआ करते थे और कश्मीर के हालात अच्छे नहीं थे और मुझे जम्मू कश्मीर की समस्या पर लिखने में खुशी होती थी।
? फिर आखिर ऐसा क्या हुआ कि आप एक पत्रकार के रूप में सामने आए।
? मैं उन दिनों स्कूल में ही पढ़ता था कि रायपुर से प्रकाशित युगधर्म के प्रतिनिधि, स्टाप स्कूल आए और मुझसे चर्चा की उन्होंने मुझे अपना संवाददाता प्रतिनिधि बनाने का अआफर दिया। मैं इसके बाद पत्रकारिता में स्कूल के समय से ही आ गया. आपको एक महत्वपूर्ण बात बताऊं मैं सक्ती के समाचार भेजा करता था और हर माह रायपुर युगधर्म से कोई प्रतिनिधि आता एक दफा उन्होंने मुझसे कहा आप पत्रकार का और अथारिटी कार्ड कभी नहीं मांगते ऐसा क्यों? तब मुझे पता चला कि ऐसा कोई कार्ड भी होता है… मैंने कहा मुझे इसकी कोई आवश्यकता ही नहीं, मगर उन्होंने मुझे मेरे जीवन का पहला अथॉरिटी कार्ड प्रदान किया था।
? आपकी परिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में भी कृपया पाठकों को बताएं।
-जैसा कि मैंने बताया मेरे भाई साहब नगर पालिका परिषद के सक्ती जिला चांपा जांजगीर के अध्यक्ष थे। यही नहीं वे अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बिलासपुर जिला के अध्यक्ष थे
मैं बचपन से ही जहां व्यवसाय से जुड़ा वही पत्रकारिता से भी जुड़ कर काम करने लगा था.
? आज की पत्रकारिता पर आपका क्या विचार है।
-पत्रकारिता कल भी मिशन थी और आज व्यवसाय के झंझावातों के बीच भी एक मिशन है। हां हो सकता है कुछ लोग भटक गए हो कुछ लोग उंगली टेढ़ी करने लगे हों, मगर मूल रूप से पत्रकारिता एक जनसेवा मिशन है। इसीलिए उसका सम्मान भी है। एक समय था जब समाचार 5 दिनों में छप कर आता था और फोटो के लिए ब्लॉक बनने के लिए रायपुर फोटो भेजा जाता था और आज एक समय है जो देखते ही देखते समाचार दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंच जाता है।
? आपकी दृष्टि में पत्रकारिता के सामने क्या चुनौती है.
-जी हां सबसे बड़ी चीज होती है प्रतिष्ठा की स्थापना आज प्रतिष्ठा पर बड़ा प्रश्न लगा हुआ है… बात स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि लघु और मध्यम छोटे समाचार पत्र और ग्रामीण स्तर छोटे नगरों के पत्रकार इतने दोषी नहीं हैं जितने की देश प्रदेश की राजधानियों में बैठे हुए पत्रकार… बड़े बड़े अखबार आज व्यवसाय से ग्रस्त हो गए हैं और संपादक की जगह मैनेजर स्थापित हो गए हैं.
? जिस तरीके से सोशल मीडिया आज प्रभावी होते जा रहे हैं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आ चुकी है तो प्रिंट का क्या भविष्य है.
-(हंसते हुए कहते हैं) सोशल मीडिया क्षणिक है इलेक्ट्रानिक मीडिया सीमित है मगर प्रिंट मीडिया एक विस्तार लिए हुए हैं प्रिंट मीडिया में वृहद भाव से अपनी बात को लेखक पत्रकार रख सकते हैं रखते हैं। मगर सोशल मीडिया में ऐसा संभव नहीं है। मेरा मानना है कि प्रिंट मीडिया कल भी थी आज भी है और कल भी रहेगी, यह अपरिहार्य है।
?भूपेश बघेल सरकार ने पत्रकारों के लिए सुरक्षा कानून की बात कही थी।
-मैं यह कहता हूं कि आज डॉक्टर सुरक्षा कानून की मांग कर रहे हैं और सरकार भी उनके लिए सुरक्षा कानून की हिमायत कर रही है। मेरा मानना यह है कि चाहे पेशा कोई भी हो 20% लोग ही बदमाशी करते हैं । पेशे की छवि खराब करते हैं। अब हम अगर चिकित्सक की बात करें तो आज छोटे बड़े हॉस्पिटलों में मरीज को आईसीयू में भर्ती कर दिया जाता है वेंटीलेटर की तैयारी जाती है। इलाज शुरू हो जाता है। मगर हॉस्पिटल में पारदर्शिता की कमी है। अगर यह ठीक कर ली जाए तो सुरक्षा की आवश्यकता ही नहीं रहेगी। ऐसे ही पत्रकारिता में भी आत्मा शमन की आवश्यकता है।
? आपने किन-किन अखबारों में सेवाएं दी पत्रकारिता यात्रा के बारे में भी हमारे पाठकों को बताएं.
-जैसा कि मैंने बताया पत्रकारिता का आगाज दैनिक युगधर्म में रायपुर से हुआ था इसके पश्चात सक्ती नगर में मैं नवभारत का संवाददाता रहा। आगे जब परिस्थितियां बदली तो मैं कोरबा शहर आ गया, यहां मैंने सप्ताहिक निष्पक्ष वार्ता का संपादन प्रकाशन प्रारंभ किया और हां , कोरबा में सबसे पहला “केबल नेटवर्क” भी हमने ही प्रारंभ किया था। आगे चलकर के लगभग 20 साल पहले दैनिक मितान का प्रकाशन प्रारंभ हुआ है।

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