
राम जी का लाख-लाख शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को अपनी गलतियां सुधारने का अवसर और साहस दोनों प्रदान किये .प्रधानमंत्री जी ने योग दिवस पर देश को सम्बोधत करते हुए जिस ‘मिशन इंद्रधनुष ‘ का ऐलान किया है यदि उसके बारे में वे पहले ही सोच लेते तो आज हजारों लोग अकाल मौत से बच सकते थे,खैर ! देर आयद,दुरुस्त आयद .
प्रधानमंत्री जी ने मिशन इंद्रधनुष की घोषणा देर से की और उसमें भी कुछ न कुछ नुक्श छोड़ दिए ताकि विपक्ष और हम जैसे रोज दिहाड़ी मजूर की तरह लिखने वाले लोग कुछ लिख सकें .प्रधानमंत्री ने नौवीं बार देश से बातचीत की है. उन्होंने कहा कि-‘कोरोना की दूसरी लहर से हम भारतवासियों की लड़ाई जारी है। कई लोगों ने अपने परिजनों को, परिचितों को खोया है। ऐसे सभी परिवारों के साथ मेरी संवेदना है। बीते 100 वर्षों में आई ये सबसे बड़ी महामारी है। ऐसी महामारी आधुनिक विश्व ने न देखी थी और न अनुभव की थी।
प्रधानमंत्री जी ने मिशन इंद्रधनुष का ऐलान करते हुए अपनी नाकामियों को भी अपनी उपलब्धि बताते हुए अपने हाथों से अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश की . मोदी ने कहा कि हमारे पास अपनी वैक्सीन नहीं होती तो भारत जैसे बड़े देश में क्या होता? आप पिछले 50-60 साल का इतिहास देखेंगे तो पता चलेगा कि भारत को विदेशों से वैक्सीन प्राप्त करने में दशकों लग जाते थे। विदेशों में वैक्सीन का काम पूरा हो जाता था तब भी हमारे देश में वैक्सीनेशन का काम शुरू नहीं हो पाता था.दुनिया जानती है कि हमारे यहां टीकाकरण की वस्तुस्थिति क्या है ?
गनीमत ये है कि प्रधानमंत्री जी ने पहली बार देश को बताया है कि – जरूरी दवाओं के उत्पादन को कई गुना बढ़ाया गया है । दूसरे देशों से उन्हें लाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी गई। कोरोना जैसे अदृश्य दुश्मन के लिए सबसे प्रभावी हथियार एहतियात ही है। इस लड़ाई में वैक्सीन हमारे लिए सुरक्षा कवच की तरह हैं। आज देश में 7 कंपनियां, विभिन्न प्रकार के टीके का उत्पादन कर रही हैं। तीन और टीके का ट्रायल भी एडवांस स्टेज में चल रहा है।ये बात अलहदा है कि उन्होंने देश में वैक्सीन संकट को लेकर पैदा हुए हालात का कोई जिक्र नहीं किया.
बीते डेढ़ महीने से आम जनता की आलोचनाओं के बाद अपनी गलतियों को सुधरते हुए प्रधानमंत्री जी ने कहा कि-ने कहा कि ये निर्णय लिया गया है कि राज्यों के पास वैक्सीनेशन से जुड़ा जो 25 फीसदी काम था, उसकी जिम्मेदारी भी भारत सरकार उठाएगी। ये व्यवस्था आने वाले 2 सप्ताह में लागू की जाएगी। इन दो सप्ताह में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर नई गाइडलाइंस के अनुसार आवश्यक तैयारी कर लेंगीप्रधानमंत्री जी की घोषणा के मुताबिक़ अब 21 जून, सोमवार से देश के हर राज्य में, 18 वर्ष से ऊपर की उम्र के सभी नागरिकों के लिए, भारत सरकार राज्यों को मुफ्त वैक्सीन मुहैया कराएगी। वैक्सीन निर्माताओं से कुल वैक्सीन उत्पादन का 75 फीसदी हिस्सा भारत सरकार खुद ही खरीदकर राज्य सरकारों को मुफ्त देगी। देश की किसी भी राज्य सरकार को वैक्सीन पर कुछ भी खर्च नहीं करना होगा। अब तक देश के करोड़ों लोगों को मुफ्त वैक्सीन मिली है।आपको याद होगा कि ये मांग मैंने पिछले महीने की थी .
मिशन इंद्रधनुष का स्वागत करते हुए मै कहना चाहता हूँ कि इसमें एक खोट आखिर रह ही गयी ,क्योंकि अब भी देश में बन रही वैक्सीन में से 25 फीसदी प्राइवेट सेक्टर के अस्पताल सीधे ले सकेंगे , ये व्यवस्था जारी रहेगी। प्राइवेट अस्पताल, वैक्सीन की निर्धारित कीमत के उपरांत एक डोज पर अधिकतम 150 रुपए ही सर्विस चार्ज ले सकेंगे। इसकी निगरानी करने का काम राज्य सरकारों के ही पास रहेगा।सरकार यदि सौ फीसदी वैक्सीन निशुल्क मुहैया करने और निजी अस्पतालों को भी सर्विस चार्ज अपनी और से देने की व्यवस्था कर देती तो सोने में सुहागा होता .लेकिन सरकार की अपनी मजबूरियां हैं. सरकार को अपने उन दानदाताओं का भी तो ख्याल रखना पड़ता है जो निजी क्षेत्र में चिकित्सा सेवाएं मुहैया करा रहे हैं .
दिल्ली में घर-घर राशन पहुँचाने की योजना की टांग तोड़ने के बाद वाह-वाही लूटने के लिए मोदी ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अब दीपावली तक आगे जारी रखने का ऐलान भी कर दिया.हम इसकी भी सराहना करते हैं क्योंकि आखिर इसका लाभ मिला तो ग़रीबों को ही है ,भले ही वो प्रधानमंत्री जी के नाम से मिले.। इस योजना के तहत नवंबर तक 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को, हर महीने तय मात्रा में मुफ्त अनाज उपलब्ध होगा।
प्रधानमंत्री जी ने सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये कही है कि – जब नीयत साफ होती है, नीति स्पष्ट होती है, निरंतर परिश्रम होता है तो नतीजे भी मिलते हैं।काश ! हकीकत में ऐसा होता तो जो अराजकता देश ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान देश में देखि उसे न देखना पड़ता .कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने भी मिशन इंद्रधनुष को लेकर जो सवाल किया है वो मै पहले ही कर चुका हूँ ,यदि मुकिन हो तो सरकार को समय रहते मिशन इंद्रधनुष की इस खामी को दूर कर लेना चाहिए .
माननीय प्रधानमंत्री जी ने जब देश को सम्बोधित किया है तब उनके हाथों के तमाम तोते उड़ चुके हैं. प्रधानमंत्री जी के सामने कोरोना की मार से कराहता देश तो है ही साथ ही 2022 में अनेक विधानसभाओं के वे चुनाव भी हैं जो किसी चुनौती से कम नहीं हैं .2021 में बंगाल का रणन हार कर प्रधानमंत्री जी अब कोई जोखिम नहीं लेना चाहते,शायद इसीलिए उनकी पार्टी ने चुनाव से पहले देश में एक लाख स्वास्थ्य सेवकों का लश्कर भी तैयार करने का फैसला किया है .प्रधानमंत्री के ऐलान से कुछ समय पहले ही पार्टी अध्यक्ष जी प्रधानमंत्री जी से मिले थे .दुःख की बात ये है कि इतने गंभीर समय में हमारे देश के राष्ट्रपति जी को कोई नहीं पूछ रहा.कोई उनसे सौजन्य भेंट करने भी नहीं जाता.बेचारे राजप्रसाद में तन्हा बैठे सारे हालात को टुकुर-टुकुर देख रहे हैं .होता है ,ऐसा कभी-कभी होता है .
हम सब उम्मीद कर सकते हैं कि प्रधानमंत्री जी विधानसभा चुनावों की तैयारी से कहीं ज्यादा ध्यान देश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने पर देंगे. पार्टी देखने के लिए तो अध्यक्ष और मार्गदर्शन के लिए संघ पहले से मौजूद है ही. देश स्वस्थ्य रहेगा तो चुनावों का भी मजा आएगा ,अन्यथा एक तरफ रैलियां होंगी और दूसरी तरफ असमय मरने वालों का न रुकने वाला सिलसिला शुरू हो जाएगा. हमें अतीत के अनुभव से सबक लेना ही चाहिए .
@ राकेश अचल







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