तिल्दा-नेवरा क्षेत्र में फर्जी पत्रकारों की भरमार, डराने धमकाने की मिल रही शिकायत

तिल्दा/नेवरा से निखिल वाधवा की रिपोर्ट

तिल्दा/नेवरा/ क्षेत्र में इन दिनों फर्जी पत्रकारों की संख्या बढ़ती जा रही है। फर्जी पत्रकारों के द्वारा लोगों को डराने,धमकाने की भी शिकायत मिल रही है। अपने आप को पत्रकार बताकर तथाकथित फर्जी पत्रकार विभिन्न अखबारों, चैनलों और न्यूज पोर्टलों का फर्जी आईडी कार्ड लेकर तिल्दा-नेवरा शहर सहित आसपास के गांवों में घूम रहे है। बता दें कि ऐसे स्वघोषित पत्रकार न तो किसी मेनस्ट्रीम मीडिया संस्थानों से जुड़ें है और न ही उन्हें कोई जानता है। ऐसे लोगों को पत्रकारिता की समझ भी नहीं है। पत्रकारिता की आड़ में ये लोग विभिन्न गैरकानूनी कार्यों में संलिप्त भी है। पत्रकारिता की धौंस दिखाकर लोगों को डरा धमकाकर अवैध उगाही करने का धंधा क्षेत्र में तेजी से फल फूल रहा है। इतना ही नहीं ऐसे फर्जी पत्रकारों के पास एक नहीं बल्कि कई चैनलों के फर्जी आईडी कार्ड भी रहते हैं। ये लोग न तो कोई घटना कवरेज करते है और न ही इनका कोई समाचार प्रकाशित होता है। पत्रकार का तमगा लिए ये लोग घूम-घूमकर पुलिस थानों और शासकीय कार्यालयों में भी धौंस जमाते देखा जाता सकता है। ऐसे लोग अपने गाड़ियों में भी आगे-पीछे प्रेस लिखकर अवैध वसूली कर रहे है। तिल्दा-नेवरा क्षेत्र के सभी पत्रकारों ने क्षेत्र में सक्रिय फर्जी पत्रकारों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग उठाई है। वहीं इस मामले में तिल्दा-नेवरा थाना प्रभारी मोहसिन खान ने भी कहा कि अगर कोई फर्जी पत्रकार किसी को डराता धमकाता है तो वे थानें में आकर शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत के बाद पुलिस द्वारा फर्जी पत्रकारों के ऊपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

क्या कहना है क्षेत्र के पत्रकारों का

क्षेत्र के एलेक्ट्रानिक मिडिया के वरिष्ठ पत्रकार राजू वर्मा ने कहा कि तिल्दा-नेवरा क्षेत्र में फर्जी पत्रकारों की बाढ़ सी आ गई है। जिन्हें पत्रकारिता का एबीसीडी भी मालूम नहीं ऐसे लोग पत्रकारिता कर रहे हैं। फर्जी पत्रकारों के कारण ही वरिष्ठ पत्रकारों को भी बदनाम किया जा रहा है। फर्जी पत्रकारों द्वारा खुद को पत्रकार बताकर खबर छाप देनें की धमकी देकर लोगों को परेशान किया जा रहा है। कई फर्जी पत्रकार पत्रकारिता की आड़ में अवैध धंधा भी कर रहे है। ऐसे लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मिडिया के पत्रकार निखिल वाधवा ने कहा कि पत्रकारिता की आड़ में अवैध उगाही करने का मामला आए दिन सामने आ रहा है। फर्जी पत्रकारों से शहर और गांव के हर वर्ग के लोग परेशान है। ऐसे तथाकथित पत्रकारों पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है। तभी पत्रकार और पत्रकारिता दोनों सुरक्षित रह पाएगा। कार्रवाई के अभाव में फर्जी पत्रकारों के हौसले दिनों दिन और बुलंद होता जा रहा है। ऐसे लोगों को क्षेत्र में उगाही की नियत से वीडियो बनाते या फोटो खींचते सहज ही देखा जा सकता है। ऐसे लोगों के चैनलों या पोर्टलों के नाम पते की जानकारी भी ठीक से नहीं मिल पाती। कुछ फर्जी पत्रकार दूसरे चैनलों के लोगो का भी इस्तेमाल करते दिख जाते है।

युवा पत्रकार केशव पाल ने कहा कि कुकुरमुत्तों की तरह गांव-गांव और घर-घर में हर रोज नए न्यूज पोर्टल उग रही है। न्यूज पोर्टलों के आने से ही फर्जी पत्रकारों की बाढ़ आई है। पत्रकारिता के बिना शिक्षा-दीक्षा लिए बेखौफ घूम रहे फर्जी पत्रकारों से आज हर ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि परेशान हैं। नियमतः न्यूज पोर्टल संपादक न तो प्रेस आईडी कार्ड जारी कर सकता है और न ही माईक आईडी। यहां तक कि संवाददाता भी नियुक्त नहीं कर सकता। हां पहचान के लिए केवल बिना प्रेस लिखे सामान्य आईडी कार्ड ही दे सकता है। जिन्हें पत्रकारिता का क.ख.ग.भी मालूम नहीं ऐसे लोगों के पास एक नहीं बल्कि कई फर्जी आईडी कार्ड मिल ही जाएगा। पंचर दुकान वाले से लेकर सब्जी विक्रेता भी स्वघोषित पत्रकार बन फिर रहे है। न्यूज पोर्टलों के मॉनिटरिंग के लिए शासन-प्रशासन को ठोस कदम उठानी चाहिए। तभी फर्जी पत्रकारों पर लगाम लग पाएगी।

पत्रकार अजय नेताम ने कहा कि फर्जी पत्रकारों द्वारा फर्जी आईडी कार्ड दिखाकर कभी विज्ञापन के लिए तो कभी खबर प्रकाशन कर देने के नाम पर लोगों को परेशान किया जा रहा है। ऐसे लोग पैसे देकर फर्जी आईडी कार्ड और माईक बनवा लेते है और इन्हें लेकर घूमते रहते हैं। मौका देखकर अवैध वसूली से भी नहीं चुकते। फर्जी पत्रकार त्यौहारों के सीजन में विज्ञापनों के लिए गांव-गांव का चक्कर लगाते हैं। ऐसे लोगों का नाम पता भी किसी को मालूम नहीं रहता। ऐसे तथाकथित फर्जी पत्रकारों पर पुलिस को ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।

वरिष्ठ पत्रकार रितेश वाधवा ने कहा कि कुछ फर्जी पत्रकार ऐसे भी है जो अपने आप को उस अखबार या चैनल का पत्रकार बताता है जिस अखबार या चैनल का अधिकृत पत्रकार उस क्षेत्र में पहले से ही नियुक्त है। इसलिए लोग फर्जी पत्रकारों को भी सहीं पत्रकार मान बैठते है और डर जाते है। कुछ फर्जी पत्रकार ऐसे भी है जिनके अखबार या चैनलों के बारें में ठीक से पता भी नहीं चल पाता। न तो उनके संपादक का नाम पता चल पाता है न ही उनके चैनल के बारें में सहीं जानकारी ही मिल पाती है। फर्जी पत्रकारों पर कड़ी कार्रवाई करने की आवश्यकता है

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