
तिल्दा नेवरा से निखिल वाधवा की रिपोर्ट-
तिल्दा/ नेवरा/ डॉक्टर्स डे सामुदायिक स्वास्थ केंद्र तिल्दा में डाक्टरों और कर्मचारियों के द्वारा केक काटकर एक दूसरे को डाक्टर दिवस की बधाई देकर मनाया गया । नगर पालिका अध्यक्ष लेमिक्षा गुरु डहरिया ने सामुदायिक स्वास्थ केंद्र तिल्दा के सभी डॉक्टर्स के साथ साथ नगर में संचालित ख़ुशी हॉस्पिटल -ज्योति हॉस्पिटल के भी डॉक्टरों को श्रीफल और शाल भेट कर सम्मान किया । एल्डरमेन संजय दुबे ने भी अपने जन्म दिन और डकटर्स डे के अवसर पर फलो का वितरण किया ।
बीऍमओ आशीष सिन्हा ने कहा की इस दिन को पहली बार 1991 में मनाया गया था। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. बीसी रॉय को सम्मान देना है। असल में, वे एक महान डॉक्टर तो थे ही साथ ही उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान दिया था। इसके साथ ही वे पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। उनका जन्म 1 जुलाई 1882 में हुआ था और 1962 में इसी दिन को उन्होंने आखिरी सांस ली थी। ऐसे में उनकी जन्मदिन और पुण्यतिथि दोनों एक ही दिन होने पर उनके सम्मान के तौर पर 1 जुलाई को हर साल ‘डॉकर्ट्स डे’ के नाम से मनाया जाने लगा।एच् एल जांगड़े ने कहा की राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस जीवन की सेवा में डॉक्टरों की भूमिका और जिम्मेदारियों के प्रति ध्यान देने के लिए मनाया जाता है। यह दिन उनके कार्यों और दायित्वों को पहचानने के लिए मनाया जाता है। कोरोना के प्रकोप के बीच हमारे डॉक्टर सप्ताह के सात दिन 24 घंटे काम कर रहे हैं और अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों की जान बचाने का काम कर रहे हैं। अपनी जान की परवाह किए बिना डॉक्टरों ने जिस भावना और समर्पण से काम किया आज उन्हें बहुत बहुत धन्यवाद । डा;श्रीमती उमा पैकरा ने कहा की महामारी के बीच कई ऐसे वीर थे जो हमें घातक वायरस से बचाने के लिए सफेद लैब कोट में उभरे. इसलिए, मानव जाति के प्रति उनके योगदान के लिए उन्हें धन्यवाद देने और उन्हें सलाम करने के लिए, राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस मनाया जाता है. ये विशेष दिन 1 जुलाई को मनाया जाता है. इस दिन को पहली बार 1991 में स्थापित किया गया था और तब से प्रतिवर्ष पूरे देश में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाता है. नगर पालिका के अध्यक्ष लेमिक्षा गुरु डहरिया ने कहा की किसी के बीमार होने पर सबसे पहले डॉक्टर के पास जाया जाता है। असल में, एक डॉक्टर छोटी से लेकर बड़ी बीमारी से बचाने का काम करते हैं। एक डॉक्टर किसी की जिंदगी बचाने के लिए अपनी पूरी जी-जान लगे देता है। शायद इसलिए डॉक्टर को धरती में भगवान के समान दर्जा दिया गया है। वहीं दुनियाभर में फैले कोरोना से लोगों को बचाने के लिए डॉक्टर्स अपना रात-दिन एक कर दिए हैं। वे कड़ी मेहनत व खुद की जान जोखिम में डालकर मरीजों को सुरक्षित रखने का काम कर रहे हैं डॉक्टर्स का शुक्रिया वैसे तो हम सब ठीक होने पर करते ही हैं, लेकिन ये जरूरी है कि आज के दिन हम डॉक्टर्स का शुक्रिया जरूर करें। डॉक्टर्स ने हर समय अपने कर्तव्यों का निष्ठा से पालन किया जिसकी वजह से जीवन में हमें एक और मौका देखने को मिलता है और ये बात दोनों ही रूप में सच है।
जन्म लेने पर भी हम सब डॉक्टर्स के ही पास होते हैं जो हमें इस दुनिया में लाते हैं, । मृत्यु से पहले के समय भी हम इनके ही पास जाते हैं क्योंकि हमें ये विश्वास होता है कि ‘मालिक का दूसरा रूप’ माने जाने वाले ये डॉक्टर्स हमारे स्वास्थ्य को ठीक कर देंगे। आज इतने खास दिन पर आप डॉक्टर्स को शुक्रिया और सभी को शुभमनाये । एल्डरमेन संजय दुबे ने कहा की दवाएं बीमारियों का इलाज करती हैं, लेकिन केवल डॉक्टर ही मरीजों को ठीक कर सकते हैं । हमारे डॉक्टर और स्वास्थ्य कार्यकर्ता COVID-19 महामारी के ऐसे कठिन समय के दौरान हमारे साथ खड़े रहे कि हम उन्हें कितना भी स्वीकार करें या धन्यवाद दें, उन्होंने देश के लिए जो कुछ भी किया है, उसे चुकाना मुश्किल होगा । कार्यक्रम में डा;श्रीमती उमा पैकरा, डा एच् एल जांगड़े, डा एस गंधर्व, डा कोटवानी, -डा डाली, और स्वास्थ विभाग तिल्दा के अधिकारी एवं कर्मचारी, ब्लॉक शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवादास टंडन, एल्डर मेन श्रीमती स्वेजा परवीन- एल्डर मेन दिलीप देवांगन, अविनाश केशरवानी, अमजद खान उपस्थित थे







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