शत शत तव वंदन माँ
जयति जय भारत माँ
हिमगिरि मस्तक शोभित
कन्ठहार सुरसरिता l
यमुना, भीमा, महानदी
रूप धरे करधनी का l
सागर पद प्रक्षाले 2
नित नित विनय भरा l
शत..
उद्भट वीरों की जननी
विद्व जनों की माता l
जग जिनके कर्मो की
गाथा को अपनाता l
जिसके दम जग का तम
एक क्षण नही ठहरा l
शत..
स्वयं की उपमा स्वयं ही
कोई न सानी भव में l
अखिल विश्व नर्तन करता
माँ तेरे किंकिणि रव में l
प्रीत पगी भाषा मीठी
मुख निःसृत सदा l
शत..

आशीष दे हे जगजननी
धीर वीर बनें हम l
सत्य अहिंसा के पथ से
कभी न विचलित होएं हम l
रण भूमि में गए बिखर.
यहीं पाएं जन्म नया l
शत..
प्रभात कटगीहा
कटगी






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