छत्तीसगढ़:- पांच साल बाद राज्य में अहाता नीति लागू, कांग्रेस सरकार ने बनाई थी अहाता नीति,भाजपा ने किया लागू

रायपुर/ भाजपा सरकार के आते ही आबकारी विभाग में बड़े फेरबदल किए गए हैं। एफएल-10 से लेकर ट्रांसपोर्ट तक के ऑनलाइन टेंडर निकालकर नए लोगों को काम सौंप दिया गया है। इसके साथ अहाता नीति को भी लागू कर दिया गया। बता दें कि यह नीति कांग्रेस सरकार ने 2019 में बनाई थी, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया था। भाजपा के महामंत्री रामू रोहरा का कहना है कि कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के दबाव में यह नीति लागू नहीं हुई थी। प्रदेश में अनधिकृत अहाते संचालित हो रहे थे। जिनसे वहां के स्थानीय नेताओं को मोटी रकम मिलती थी। भाजपा ने इस नीति को लागू कर ऑनलाइन टेंडर किए। अब सरकार को हर साल 100 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व मिलेगा। यानी कांग्रेस सरकार ने अपनों को उपकृत करने के लिए 500 करोड़ के राजस्व का नुकसान किया। आने वाले समय में भ्रष्टाचार के हर रास्ते को भाजपा बंद करेगी।

80 अहातों के लिए फिर निकलेंगे टेंडर

राज्य में पांच साल बाद फिर से एक बार अहाता नीति लागू कर दी गई है। इसके तहत टेंडर मंगाने से लेकर आवंटन तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन की जा रही है। इसी कड़ी में प्रदेश के 28 जिलों में 457 अहातों को लाइसेंस जारी किया गया है। बता दें कि आबकारी विभाग के तहत छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) ने राज्य के विभिन्न जिलों में 537 अहातों के लिए ऑनलाइन टेंडर मंगाया था। इसमें से 457 के लिए ही ऑनलाइन टेंडर आए थे।

एनआईसी के जरिए पारदर्शिता के साथ टेंडर खोले गए और अधिक दर वाले ऑफर को लाइसेंस जारी कर दिया गया है। शेष 80 अहातों के लिए फिर से ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाकर इनको आवंटित किया जाएगा। आबकारी अफसरों का कहना है कि पूरी पारदर्शिता के ऑनलाइन टेंडर अहातों के लिए बुलवाया गया, शुक्रवार को एनआईसी के जरिए ऑनलाइन टेंडर की प्रक्रिया पूरी की गई। अब अहाता लाइसेंस धारक ही चलाएंगे। किसी भी तरह का अवैध अहाता या चखना सेंटर जैसी व्यवस्था नहीं चलेगी। इससे कानून व्यवस्था और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर कोई शिकायत नहीं आएगी।

राज्य को एक अरब से ज्यादा की कमाई

अहातों की ऑनलाइन टेंडरिंग प्रक्रिया से राज्य सरकार को 103 करोड़, 54 लाख, 17 हजार 300 रुपए का राजस्व मिला। विभागीय अफसरों का कहना है कि आबकारी नीति में सार्वजनिक स्थलों पर लोग शराब का सेवन न करें इसे देखते हुए राज्य में 2017 में अहाता नीति को लागू किया गया था। इसमें स्पष्ट उल्लेख था कि इसके लिए ऑनलाइन टेंडर के जरिए अहाता संचालित करने का लाइसेंस जारी किया जाए।

अहाता संचालक को शराब बेचने का अधिकार नहीं

आबकारी अफसरों ने स्पष्ट किया कि अहातों की व्यवस्था केवल शराब पीने के लिए बनाई गई है। शराब बेचने का अधिकार अहाता संचालक को नहीं रहेगा। यदि ऐसी कोई शिकायत मिलती है तो अहाता का लाइसेंस तत्काल निरस्त कर दिया जाएगा। इसके अलावा हर अहाते में एसी और सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे। एमआरपी से अधिक पर सामान बेचने पर भी फूड विभाग कार्रवाई करेगा।

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