
कोरबा/ डीएमएफ में हुए घोटालों को लेकर ईडी की छानबीन बढ़ती जा रही है। ईडी की जांच की आंच में कोरबा जिले के चन्द कारोबारी भी झुलसने वाले हैं। खासकर कोरोना संक्रमणकाल के दौरान आपदा को अवसर में बदलने वाले चुनिन्दा ठेकेदारों, सप्लायरों और व्यापारियों को ईडी ने अपनी राडार पर रखा है। कोरोना संक्रमणकाल के दौरान क्वारंटाईन सेंटर, कोविड हॉस्पिटल का निर्माण से लेकर दवाईयों, किट, बेड, ऑक्सीजन सिलेंडर आदि की सप्लाई में बेतहाशा घपलेबाजी डीएमएफ के मद में की गई।
इसमें कटघोरा के निवासी व बिलासपुर में भी बसे महेश दुहलानी को ईडी ने बिलासपुर स्थित निवास से पूछताछ के लिए उठा लिया है। यह खबर काफी तेजी से फैलते ही अन्य शामिल लोगों में खलबली मच गयी है। शहर के एक नामचीन दवा विक्रेता सह सप्लायर के साथ-साथ एक बड़े होटल व्यवसायी को भी ईडी ने अपनी राडार में रखा है। आपदा में अवसर तलाशने वाले इन चन्द लोगों ने अवैध रूप से कमाए गए धन से बड़े पैमाने पर बेशकीमती जमीनों की खरीदी की और प्लॉटिंग कर बेचा जा रहा है। ईडी ने डीएमएफ के घोटाले में अपनी जांच का दायरा बढ़ाया है तो इन्हें संरक्षण देने वाले प्रशासनिक अधिकारी से लेकर फाइल चलाने वाले बाबू तक भी लिस्ट में शामिल हो रहे हैं। बता दें कि कोरबा जिले में 2 हजार करोड़ रुपए डीएमएफ से खर्च हुए हैं जिसमें 500 से 600 करोड़ रुपए की कमीशनखोरी सामने आई है। ठेकेदारों/सप्लायरों ने टेण्डर हासिल करने के लिए 25 से 40 प्रतिशत का चढ़ावा अधिकारियों को चढ़ाया है। प्याज के छिलकों की तरह अब घोटालों की परत खुलने लगी है और आम जनता भी चाहती है कि परदे के पीछे से डीएमएफ में डाका डालने वाले सफेदपोशों और भ्रष्ट
अधिकारियों/कर्मचारियों को बेनकाब होना ही चाहिए
पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर के द्वारा पत्रों के जरिए स्थानीय प्रशासन से लेकर प्रधानमंत्री तक डीएमएफ में हो रहे घोटालों पर नाम सहित ध्यानाकर्षण कराया जाता रहा। जब जांच की बात चली है तो वन विभाग भी इसके दायरे में शामिल होना चाहिए। कटघोरा वनमंडल में तत्कालीन डीएफओ शमा फारूखी ने डीएमएफ से लेकर कैम्पा और विभागीय मद में करोड़ों का घोटाला किया, इसमें स्टापडेम निर्माण प्रमुख है। जंगल में तालाब निर्माण, मजदूरी घोटाला कटघोरा व कोरबा वनमण्डल में खूब हुआ। जंगल में सड़क निर्माण में करोड़ों में गबन हुए। स्टॉप डेम का मामला कांग्रेस की सरकार में भाजपा के विधायक धरम लाल कौशिक ने उठाया लेकिन बाद में मसला ठंडा पड़ गया। अब भाजपा की सरकार में इस घोटाले की फाइल के साथ-साथ विधानसभा में डीएफओ द्वारा स्टॉप डेम की गलत जानकारी देकर गुमराह करने का प्रकरण भी उछला लेकिन इसके बाद शिकायत कर्ता से लेकर श्री कौशिक की खामोशी रहस्यमय हो गई है। फर्जी मजदूरों के नाम असली भुगतान हुए और असली मजदूर अपनी मजदूरी के लिए भटक रहे हैं,लेकिन अधिकारी उदासीन हैं। मनरेगा में जमकर खेल हुआ है और हो रहा है, अमृत सरोवर से लेकर जल आवर्धन योजना भी भेंट चढ़ी है।









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