दानी कर्ण,सर्वस्व दान कर बना महान है
तो एकलव्य ने अपना अंगुठा दे पाया मान है
गुरु ने सदियों से किया विद्या का दान है
इसलिए गुरु सर्वकालिक सर्व शक्तिमान है
गुरू का जीवन त्याग व तप से भरा है
गुरु अपने शिष्यों के लिये सदा लड़ा है
वो देश व काल से कभी नही डरा है
गुरु हमेशा सत्य के मार्ग पर चला है
ईश्वर ने गुरु बन अपने को धरा में उतारा है
गुरु, शत्रु से नहीं अपने शिष्यों से ही हारा है
गुरु सारा जीवन शिष्यों पर करता कुर्बान है
इसलिए गुरु सर्वकालिक सर्व शक्तिमान है
गुरु में ऊंच-नीच न जाति-धर्म का भेदभाव है
न ही अमीर, गरीब किसी के प्रति झुकाव है
गुरु की दृष्टि में सबके लिए समभाव है
इन्हें अपने सभी शिष्यों से बहुत लगाव है
जीवन में अनुशासन व शीलता का प्रभाव है
अपने शिष्यों की सफलता इनका अभिमान है
इसलिए गुरु सर्वकालिक सर्व शक्तिमान है
गुरु दीप बन विद्या का प्रकाश फैलाता है
भागीरथ बन ज्ञान की गंगा धरा मे बहाता है
गुरु घर घर में शिक्षा का अलख जगाता है
वो एक चित्र में बुद्धि व विद्या का रंग भरता है
गुरु, शिष्यों में अपने सुनहरे सपने को संजोता है
प्रलय व निर्माण दोनो गुरु के गोद में पलता है
गुरु सदा एक सभ्य समाज का करता निर्माण है
इसलिए गुरु सर्वकालिक सर्व शक्तिमान है
गुरु को मेरा नमन और बारम्बार प्रणाम है
अनिल कुमार मिश्रा








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