कोयला घोटाले में बड़ा खुलासा: मास्टरमाइंड विनोद सहाय का करीबी शेख जफर गिरफ्तार, नामचीन कंपनियों के दिए फर्जी बिल

भोपाल। देश के बहुचर्चित कोयला घोटाले में एक और अहम गिरफ्तारी हुई है। भोपाल पुलिस की टीम ने सोमवार को छत्तीसगढ़ के गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के मरवाही से शेख जफर नामक आरोपी को दबोचा है। शेख जफर, इस बड़े घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता विनोद सहाय का करीबी सहयोगी बताया जा रहा है, जिसकी गिरफ्तारी के बाद अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद है।

इससे पहले 25 जून 2025 को भोपाल पुलिस ने इस घोटाले के मास्टरमाइंड विनोद सहाय को झारखंड की राजधानी रांची से गिरफ्तार किया था। शेख जफर की गिरफ्तारी को इस मामले में एक और महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है, क्योंकि वह विनोद सहाय के साथ मिलकर इस बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहा था।

करोड़ों की फर्जी बिलिंग का  मामले में CBI का बड़ा एक्शन, 35 लोग नामजद 

जांच में खुलासा हुआ है कि अनूपपुर, मध्यप्रदेश निवासी शेख जफर और विनोद सहाय ने मिलकर करोड़ों रुपये का कोयला व्यापार फर्जी बिलों, शेल कंपनियों और जाली दस्तावेजों के माध्यम से दर्शाया। इस खेल में दो फर्जी कंपनियां, अंबर कोल डिपो और अनम ट्रेडर्स, जबलपुर के रानीताल पते पर पंजीकृत थीं। इन्हीं कंपनियों के नाम से अभिजीत ट्रेडर्स, मां रेवा ट्रेडर्स और नमामि ट्रेडर्स के साथ भी फर्जी व्यापार दिखाया गया।

विनोद सहाय की कंपनी जेएमकेडी कोल ने बिलासपुर की भटिया कोल, खालसा कोल, अनूपपुर की जैन वॉशरी, आर्यन वॉशरी और रायगढ़ की हरिजिका कोल जैसी संस्थाओं के साथ भी कागजी लेन देन दर्शाया था।

कई नामचीन कंपनियों को भी दिए फर्जी बिल

जांच में सामने आया है कि शेख जफर द्वारा निम्न संस्थानों को कोयला आपूर्ति के नाम पर फर्जी बिल दिए गए थे:

 * प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड, चांपा

 * नेशनल फर्म (प्रोप्राइटर अक्कू जेठानी)

 * एमएसपी पावर प्लांट, रायगढ़

 * बीएस सिंघल पावर प्लांट, रायगढ़

अन्य आरोपी भी जांच के दायरे में

इस घोटाले में राजा सरावगी (बुढार), अशोक चतुर्वेदी (बुढार) और राजेश कोटवानी (बिलासपुर) के नाम भी सामने आए हैं। इन लोगों के नाम पर भी कोयला क्रय दर्शाकर फर्जी बिल तैयार किए गए थे। फिलहाल, शेख जफर को पुलिस रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की जा रही है, जिससे कोयला घोटाले से जुड़े कई और बड़े नामों और उनके लिंक का खुलासा होने की संभावना है।

यह संगठित फर्जीवाड़ा छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और झारखंड के उद्योग समूहों तक अपनी जड़ें फैला चुका है। अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियां भी इस नेटवर्क पर पैनी नजर रखे हुए हैं। इस गिरफ्तारी के बाद आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

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