केन्द्र सरकार के नए “कृषि अध्यादेश के विरुद्ध” किसानों का आन्दोलन…

पहले कान्ट्रेक्ट शिक्षक फिर कान्ट्रेक्ट कर्मचारी और अब कान्ट्रेक्ट फॉर्मिंग, अब यह कान्ट्रेक्ट फॉर्मिंग क्या है ? आईए इस पर चर्चा करते हैं के हरियाणा के किसान इस नए कृषि अध्यादेश का विरोध क्यों कर रहे हैं। पिछले दिनों सरकार ने कृषि क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए कृषि मंडियों के बाहर अपनी फसल बेचने और कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग को लेकर किसानों के लिए अध्यादेश जारी किए हैं।

इस अध्यादेश से किसान अपना उत्पाद मंडी समिति में बेचने को मजबूर नहीं होंगे किसान कार्पोरेट कंपनियों के साथ एग्रीमेंट कर सकेंगे, वन इंडिया वन एग्री मार्केट का सपना पूरा होगा और किसान देश भर में कहीं भी, कभी भी बेचने में सक्षम होंगे।

क्या काॕन्ट्रेक्ट फॉर्मिगं के अंतर्गत कृषि छेत्र में विदेशी निवेश भी होगा ? इसके अलावा आवश्‍यक वस्‍तु अधिनियम में संशोधन के जरिए किसानों के लिए रेगुलेटरी व्‍यवस्‍था को उदार बनाया गया है। 5 जून को सरकार ने कृषि सुधार से जुड़े दो अध्यादेश अधिसूचित किए गए थे,अध्यादेश के मुताबिक किसानों को अपनी पसंद के बाजार में उत्पाद बेचने की छूट मिलेगी. आधिकारिक बयान के मुताबिक, “कृषि उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सुविधा) अध्‍यादेश 2020 को अधिसूचित किया गया है. इसके तहत किसान अपनी पसंद के बाजार में उपज बेच पाएंगे, सरकार को उम्मीद है कि किसानों को फसलों का बेहतर दाम मिलेगा।
एक और अध्यादेश “मूल्‍य आश्‍वासन पर किसान समझौता और कृषि सेवा अध्‍यादेश 2020” को भी अधिसूचित किया गया है. इस अध्यादेश के तहत किसानों को एक राष्ट्रीय ढांचा मिलेगा. जिससे कृषि व्यवसाय से जुड़ी कंपनियां, प्रोसेसर, थोक व्यापारी और निर्यातकों और किसानों के बीच पहले से तय कीमतों पर समझौते की छूट होगी,सरकार का कहना है कि किसानों को बेहतर दाम वाले अपनी पसंद के बाजार में उपज बेचने के विकल्प देने से संभावित खरीदारों की संख्या बढ़ेगी।

इस संबंध में मेरी राय यह कि सरकार ने जो कृषि सुधार किए हैं उससे किसानों को कुछ लाभ ज़रुर होगा लेकिन वह साथ ही जो सरकार ने किया है वह ठोस नहीं है, “निश्चित तौर पर सरकार के फैसलों का किसानों को लाभ होगा,किसान अपनी फसल को खुले बाजार में बेच पाएगा और बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी जिससे दाम अच्छा मिलेगा.” सरकार इन सुधारों को कैसे लागू करवाती हैं प्रश्न इसी बात का है, यह देखना पड़ेगा | एक उदाहरण इस तथ्य से लें, एक सुंयुक्त परिवार एक सौ से अधिक एकड़ की जमीन पर कपास, ज्वार, हल्दी, तूर, सोय की खेती करता है, “लेकिन अब जमीन परिवार के सदस्यों के बीच बंट चुकी होती है तो इस हालत में साल दर साल किसानी करने वालों को लाभ भी कम होता जाते हैं , इस अध्यादेश में “सरकार ने जो कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को लेकर फैसला किया गया है वह सही है लेकिन यह बहुत पहले हो जाना चाहिए था, मैं तो यह कहूंगा कि सरकार ने अनिच्छा से यह काम किया है. कोरोना वायरस की वजह से देश की जो हालत बिगड़ी है और अर्थव्यवस्था का जो हाल है वह देखते हुए सरकार ने मजबूरी में यह कदम उठाया है, कृषि भूमि सीलिंग कानून की वजह से देश बर्बाद हो चुका है तो अगर यह कन्ट्रेक्ट फार्मर (व्यापारियों) पर जो बीस एकड़ से अधिक ज़मीन के मालिक होंगे या रख सकते हैं तो दूसरे क्यों नही रख सकते हैं ?अगर कन्ट्रेक्ट फार्मर पर सिलींग एक्ट लागू नही होता तो दूसरों पर क्यों लागु होंगें ? यदी नही तो सिलींग एक्ट का अब क्या औचित्य रह जाता है ? “देश के 85 फीसदी किसान दो एकड़ कृषि भूमि के नीचे है.” सीलिंग कानून के तहत हर राज्य अपने हिसाब से कृषि भूमि की सीमा तय करता है.”जमीन के छोटे टुकड़े के साथ किसानों का जीना नामुमकिन जैसा है. छोटे जमीन वाले किसान ही तो शहर की ओर आए थे और अपना पेट पाल रहे थे, लॉकडाउन हुआ तो वे फिर गांव लौट गए ,जो छोटे किसान होते हैं उनको तो बैंक भी कर्ज नहीं देता है और दो से चार एकड़ की जमीन पर साल भर कैसे गुजारा होगा यह अपने आप में सोचने वाला विषय है, खेती एक नुकसानदायक काम है और इसमें बड़ी कंपनियां नहीं आती है मंडी की वजह से किसानों का नुकसान हुआ है और बाजार खुलने से किसानों को जरूर लाभ होगा ,यह सरकार तो छह साल से सत्ता में है लेकिन अब क्यों किसान के हित में फैसले ले रही है? ऐसा इसलिए क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई और अब किसान याद आ रहे हैं.”
पिछले दिनों कृषि मंत्री ने कृषि सुधारों को लेकर सभी मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर इन सुधारों को सफल तरीके से लागू करने में सहयोग का आग्रह किया था।
अब इस अध्यादेश के लागू होने के बाद जो सबसे अहम प्रश्न सामने आता है वह यह है क्या है यह कॉन्ट्रेक्ट फॉरमिंग कौन होंगें कॉन्ट्रेक्ट फॉर्मर को किस तरह की छूट होगी ? कॉन्ट्रेक्ट फार्मिगं के नाम पर लिए गए किसानो की ज़मीन को अनुबंधित समय सिमा पूरी होने के बाद किसानो को पुनः सुरक्षित वापस मिलने का क्या प्रव्धान होगा ? जब किसान अपनी ज़मीन व्यपारीयों को दे देगा तो किसान खुद क्या करेंगे ? क्या किसान खुद अपने खेतों में एक मज़दूर बनकर खेती करेंगे ?
Written by
Zafar Hasan

  • Related Posts

    पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के स्वर्ण सिटी निवास पर होली मिलन पर उमड़ा जनसैलाब

    कोरबा। ऊर्जा की नगरी कोरबा में इस बार होली केवल रंगों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक आत्मीयता और जनसंवाद का भी बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। शहर में जगह-जगह…

    Read more

    कोरबा में होली पर नशेड़ियों का तांडव: चाकू और सर्जिकल ब्लेड से हमला, चार युवक गंभीर रूप से घायल

    कोरबा, 04 मार्च होली के त्यौहार के बीच शहर में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब सिटी कोतवाली क्षेत्र के सीतामढ़ी इमलीडुग्गू इलाके में 4 से 5 नशेड़ी युवकों ने…

    Read more

    Comments are closed.

    You Missed

    पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के स्वर्ण सिटी निवास पर होली मिलन पर उमड़ा जनसैलाब

    पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के स्वर्ण सिटी निवास पर होली मिलन पर उमड़ा जनसैलाब

    कोरबा में होली पर नशेड़ियों का तांडव: चाकू और सर्जिकल ब्लेड से हमला, चार युवक गंभीर रूप से घायल

    कोरबा में होली पर नशेड़ियों का तांडव: चाकू और सर्जिकल ब्लेड से हमला, चार युवक गंभीर रूप से घायल

    खरसिया के परासकोल में युवक के अंधे हत्या का खुलासा,आरोपी गिरफ्तार

    खरसिया के परासकोल में युवक के अंधे हत्या का खुलासा,आरोपी गिरफ्तार

    स्व-सहायता समूह की दीदियों ने कलेक्टोरेट और जिला पंचायत में लगाया प्राकृतिक रंगों से बने गुलाल का स्टॉल

    स्व-सहायता समूह की दीदियों ने कलेक्टोरेट और जिला पंचायत में लगाया प्राकृतिक रंगों से बने गुलाल का स्टॉल

    कलेक्टर ने कोटपा एक्ट के सख्त पालन के निर्देश, शैक्षणिक परिसरों को एक माह में तंबाकू-मुक्त बनाने का लक्ष्य

    कलेक्टर ने कोटपा एक्ट के सख्त पालन के निर्देश, शैक्षणिक परिसरों को एक माह में तंबाकू-मुक्त बनाने का लक्ष्य

    Amarjeet Bhagat : छत्तीसगढ़ राज्यसभा टिकट के लिए कांग्रेस में घमासान, दिल्ली दरबार पहुंचे अमरजीत भगत

    Amarjeet Bhagat : छत्तीसगढ़ राज्यसभा टिकट के लिए कांग्रेस में घमासान, दिल्ली दरबार पहुंचे अमरजीत भगत
    error: Content is protected !!