बात सन 1982 के आसपास की है। वर्तमान कोरबा जिले के सारे न्यायालयीन कार्य बिलासपुर न्यायालय में ही हुआ करते थे। क्योंकि कोरबा मात्र तहसील हुआ करता था ,सेशन न्यायालय से सम्बन्धित सारे कार्य के लिए उन्हें बिलासपुर आना होता था। तब वरिष्ठ अधिवक्ता पीके अग्रवाल मुझे सेशन ट्रायल करते हुए कोर्ट में देखकर काफी खुश हुए और अपने कुछ कार्यों की जिम्मेदारी मुझे दे दी ,तब वे कहते अभी लोअर कोर्ट का काम पहले करना , खासतौर पर जमानत व अग्रिम जमानत के कार्य जिसे मैंने सम्पूर्ण किया था , माह में एक दो बार आते ,बार रूम में बैठकर राजनीति पर खूब चर्चा करते समीक्षा आलोचना सभी , वह समय मेरा प्रारंभिक काल रहा ,अग्रवाल जी सीनियर भी वकालत कार्य के लिए ख़ूब मेहनत करते ,सुबह अपने ऑफिस में दोपहर कोर्ट में शाम व रात देर तक पढ़ाई करते ऐसा उन्होंने बताया , किसी भी कार्य को छोटा नही समझना चाहिए।
उनका कहना था तहसील के भी कार्य करना चाहिए जूनियर को सारे काम सीखना चाहिए ।
कालान्तर में अग्रवाल जी की मेहनत और लोंगो के साथ सम्बन्ध रंग लाई , वे एक सफल वकील, सबसे मंहगे वकील बने। विशेष रूप से कम्पनियों व बैंकों के काफी कार्य रहते थे। कई जूनियर उनके अधिनस्थ कार्य करते थे। ये मैने कटघोरा में रहते हुये जाना ,क्योकि कोरबा जिला बनने के बाद बिलासपुर आना बहुत कम हो गया , मैं भी कटघोरा में विवाह पश्चात रहने लगी ,यहां न्यायालय में इत्तफाक होता तो सीनियर हमेशा हालचाल पूछा करते ,उन्होंने मुझे एक दिन कहा भी की आपको हाई कोर्ट आना चाहिए , फिर अग्रवाल सीनियर बिलासपुर में शिफ्ट हो ,कोरबा बिलासपुर दोनों ही स्थान में कार्य करते हुए यश , मान , धन और प्रसिद्धि प्राप्त की। हम उन्हें नमन करते हैं, मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करती हूँ ।








Comments are closed.