अदम्य है अटूट है,
अथाह है ये मित्रता।
आभार है प्रेम का,
प्रवाह है ये मित्रता।।
तीव्र ज्योत सूर्य की,
शीतल है सलिल-सा।
बसंत का उल्लास है,
उन्माद है ये मित्रता।।
शून्यहीन अतुल्य है,
प्रकाश का ये पुंज है।
है भावों की समग्रता,
अमूल्य है ये मित्रता।।
है जात-पात से परे,
है ऊँच-नीच से बड़े।
है अश्रुओं का भार तो,
हँसी का ये बुलबुला।।
न हार-जीत है कभी,
न उम्र की सीमा कोई।
समुद्र सी गंभीरता तो,
आकाश सी बड़ाई भी।।
उंगलियों में गिन लो तुम,
या मुट्ठियों में भर लो तुम।
है प्रीति का प्रतीत ये,
अहंकार भी है मित्रता।।
न आप तुम न आप मैं,
है हम का भाव ये लिए।
हो मित्र की सौभाग्य तो
वो भाग्यवान है मित्रता।।

- सोनी किरण।







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