कोरोना काल में अध्ययन को मचल रहे बच्चे और भी मायूस हो गए है,
मराठा आरक्षण बिल के घेरे में प्रवेश प्रक्रिया को तरस रहे है।
राजनीति का कीड़ा शिक्षा पर भारी पड़ गया है,
यह कैसा आंदोलन है जो अपने स्वार्थ के अहम पर अड गया है।

मानवता का भयावह दृश्य तेजी से वायरल हो रहा है,
इंसान ही इंसान के भक्ष का कारण बन रहा है।
दैनियता का रूप विक्रालता में प्रविष्ट हो रहा है,
सोचनीय विचार है! मेरे देश का यह कैसा चित्र साकार हो रहा है।
क्या खो रहे है हम इसका भी इल्म ना रहा है,
भरोसे के नाम पर हर कोई धोखा ही खा रहा है।
कीर्ति शर्मा ( प्रित )






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