हो विरोध, प्रदर्शन,
हो भले ही अनशन /
पर हिंसा को रोकिए,
कर रहा हूँ वंदन /
हिंसा में जो खोयेंगे,
वो भी अपना होगा /
ऐसे न सही वैसे
हमें ही भरना होगा /
नहीं फंसेगा हंसने वालों,
का कभी भी गर्दन/
माना गलत है कुछ,
तभी विरोधी स्वर/
चाहिए बात करें,
बिन किए अगर मगर/
तभी इस अवरोध से,
होगा मुक्त वतन/
अड़े रहेंगे पक्ष दोनों,
शत्रु टांग अड़ाएगा/
अमन में इस देश की,
ग्रहण कोई लगाएगा/
गूंजेगा चतुर्दिश तब,
रुदन और क्रंदन/
हुकूमत झुके थोड़ा
थोड़ा झुको आप भी,/
झुक जाने से बने
पेचीदा बात भी,/
बडे बडे मसलों का
ऐसे हुआ शमन/
वासियों के हाथ में
देश का विकास है/
और उन्ही के कर कमल
देश का विनाश है /
चाहिए क्या आपको
कर लीजिये मनन /
देख के कृत्य माँ
बिफर के रोयी होगी
नैराश्य भाव को हृदय,
में पुनः बोई होगी
बह चले होंगे सतत
नैन से पीर सघन /

प्रभात कुमार शर्मा
कोरबा नगर







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