उत्सव और उन्माद का एक और दिन


राम मंदिर के सहारे राजनीति करते हुए सत्ता के शिखर तक पहुंचे राष्ट्रभक्तों के लिए बुधवार एक अक्टूबर का दिन एक बार फिर उन्माद और उमंग का दिन साबित होने वाला है. देश के इतिहास को अपने ढंग से लिखने की इस कोशिश के 28 साल बाद इस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत का फैसला आने वाला है. फैसला क्या आएगा ,इसकी भविष्यवाणी नहीं की जा सकती लेकिन अनुमान सभी को है .छह दिसम्बर 1992 को विवादित ढांचा ढहाने के कथित षड्यंत्र, भड़काऊ भाषण और पत्रकारों पर हमले के 49 मुकदमों में सीबीआई की विशेष अदालत बुधवार को अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाएगी। इन बीते 28 वर्षों में 49 अभियुक्तों में से 17 की मृत्यु हो चुकी है। लगभग पचास गवाह भी दुनिया से विदा हो चुके हैं। पूरी दुनिया की नहीं तो कम से कम देश की हिंदी पट्टी की निगाह लखनऊ की विशेष सीबीआई कोर्ट के इस आने वाले फैसले पर लगी हुई है।
आज एकदम जवान हो चुकी पीढ़ी को इस घटना का पता नहीं होगा लेकिन एक पीढ़ी है जो इस वारदात में शामिल भी हुई और इसकी गवाह भी रही .मै स्वयं उसी पीढ़ी का हिस्सा हूँ जिसने एक ढाँचे को गिराने के लिए देश में उमड़े उस उन्माद को अपनी आँखों से देखा था .देशभर से आये कार सेवकों ने एक ढांचे को इस उन्माद से गिराया था जैसे वे किसी जंग के मैदान में दुश्मन को धराशायी कर रहे हों. छह दिसम्बर, 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा पूरी तरह ध्वस्त होने के बाद राम जन्मभूमि, अयोध्या के थाना प्रभारी पीएन शुक्ल ने शाम पांच बजकर 15 मिनट पर लाखों अज्ञात कार सेवकों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा कायम किया। इसमें बाबरी मस्जिद गिराने का षड्यंत्र, मारपीट और डकैती शामिल है।
उत्तरप्रदेश की तत्कालीन उत्तरदाई सरकार की पुलिस ने विवादित ढांचे के सम्पूर्ण विध्वंस के लगभग 10 मिनट बाद अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विष्णु हरि डालमिया, विनय कटियार, उमा भारती और साध्वी ऋतंभरा नामजद आरोपी बनाए गए। भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए ,153बी, 505, 147 और 149 के तहत मुकदमा दर्ज किया इन सब पर राम कथाकुंज सभा मंच से धार्मिक उन्माद भड़काने वाला भाषण देकर ढांचा गिरवाने का आरोप लगाया था .ये मुकदमा रायबरेली में चला। बाद में इसे लखनऊ सीबीआई कोर्ट में चल रहे मुकदमे में शामिल कर लिया गया .
इन मामलों के अलावा पत्रकारों और फोटोग्राफरों ने मारपीट, कैमरा तोड़ने और छीनने आदि के 47 मुकदमे अलग से कायम कराए। ये मामले लखनऊ सीबीआई कोर्ट से जुड़े रहे। सरकार ने बाद में सभी केस सीबीआई को जांच के लिए दे दिए। सीबीआई ने रायबरेली में चल रहे केस नंबर 198 की दोबारा जाँच की अनुमति अदालत से ली। उत्तर प्रदेश सरकार ने 9 सितम्बर 1993 को नियमानुसार हाईकोर्ट के परामर्श से 48 मुकदमों की सुनवाई के लिए लखनऊ में विशेष अदालत के गठन की अधिसूचना जारी की। लेकिन इस अधिसूचना में केस नंबर 198 शामिल नहीं था, जिसका ट्रायल रायबरेली की स्पेशल कोर्ट में चल रहा था।
विवादित ढांचा गिरने के बाद जिस राम मंदिर के लिए आंदोलन शुरू हुआ था ,उस मंदिर के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भूमिपूजन भी हो चुका है लेकिन मस्जिद का अभी कोई अतापता नहीं है .मस्जिद के भूमिपूजन में प्रधानमंत्री जी को बुलाया जाएगा या नहीं ये भी किसी को पता नहीं ,लेकिन ढांचा गिराने वाले लोग बहुप्रतीक्षित मामले का फैसला आने के बाद एक बार फिर उसी उन्माद को दोहराने की तैयारी कर रहे हैं जो उन्होंने 28 साल पहले अनुभव किया था .
उत्तरप्रदेश की भाजपा सर्कार को इस उन्माद की जानकारी है इसीलिए एहतियात के तौर पर अयोध्या और दुसरे जिलों में पीएसी की 70 कंपनियां तैनात कर दी गयीं हैं ताकि पहले से अराजकता का शिकार उत्तरप्रदेश में कहीं कोई गड़बड़ न हो .अयोध्या के अलावा मथुरा, वाराणसी तथा अन्य जिलों में भी पूरी सतर्कता बरती जा रही है।किसान आंदोलन से जूझ रही केंद्र सरकार को बचाने के लिए भाजपा बाबरी मस्जिद ध्वंश मामले के फैसले का इस्तेमाल एक नए मुद्दे के तौर पर कर सकती है .कुल जमा कल यानि बुधवार का दिन संयम दिखाने का दिन है .
आपको ये जानकार हैरानी होगी की बाबरी मस्जिद गिराने के माले में नामजद किये गए अभियुक्तों में से अधिकांश कालांतर में विधानसभाओं और संसद में चुनकर भेजे गए,कुछ को मंत्री पद भी मिला.हमारे मध्यप्रदेश में ऐसे ही एक सज्जन श्री जयभान सिंह पवैया हैं .पवैया के अलावा ज आरोपी जीवित हैं उनमें पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, महंत नृत्य गोपाल दास, डॉ. राम विलास वेदांती, चंपत राय, महंत धर्मदास, सतीश प्रधान, पवन कुमार पांडेय, लल्लू सिंह, प्रकाश वर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दुबे, गांधी यादव, रामजी गुप्ता, ब्रज भूषण सिंह, कमलेश्वर त्रिपाठी, रामचंद्र, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाश पांडेय, अमरनाथ गोयल, स्वामी साक्षी महाराज, विनय कुमार राय, नवीन भाई शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आचार्य धर्मेंद्र देव, सुधीर कुमार कक्कड़ व धर्मेंद्र सिंह गुर्जर का नाम शामिल है .
दुनिया में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहां लोग एक विवादास्पद ढांचा गिराकर सांसद,विधायक,मुख्यमंत्री,केंद्रीय मंत्री और मंत्री बने .इसलिए इसे राजनीति के इतिहास का एक अध्याय तो कहा ही जाता है .आने वाली पीढ़ियां मुमकिन है इस सच्चाई पर यकीन न करें और विस्मय से हांसे भी ,लेकिन जो हकीकत है सो है भले ही अब उसका रूप अफ़साने का हो चुका है .
@राकेश अचल

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