इतिहास में 11 मार्च

1985 – मिखाईल गोर्बाचेव कोंस्तान्तिन चेरेंकों की मौत के बाद सोवियत संघ के सर्वोच्च नेता चुने गए। जब कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव के रूप में उनका नाम सामने आया तो दुनिया को बड़ा अचरज हुआ क्योंकि इस वक्त गोर्बाचेव महज़ 54 साल के थे। परंपरा के विपरीत गोर्बाचेव ने चेरेंकों की मृत्यु की घोषणा के एक दिन बाद अमरीका के साथ परमाणु हथियारों पर पूर्वनिर्धारित बात को निरस्त नहीं किया। जब गोर्बाचेव ने काम-काज संभाला था तब किसी को अंदाज़ नहीं था कि वो शीत युद्ध के दौरान अमरीका विरोधी महाशक्ति के आखिरी नेता होंगें।  गोर्बाचेव ने रूस और अमरीका के परमाणु हथियारों को कम करने के लिए कई संधियां कीं । बदलते हालातों के बीच गोर्बाचेव को 25 दिसंबर 1991 को इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। उसी साल 31 दिसंबर के दिन सोवियत संघ का झंडा आखिरी बार फहराया गया।


2011-  जापान में प्रशांत तट पर तोहोकू के पास समुद्र में रिक्टर पैमाने पर 9 का भूकंप आया था। यह जापान के इतिहास में दर्ज अब तक का सबसे शक्तिशाली भूकंप था। इस भूकंप की वजह से समुद्र में सुनामी उठ खड़ी हुई जिसकी लहरें 133 फीट तक ऊंची थीं। इस भूकंप की वजह से पास ही में स्थित फुकुशिमा दईची परमाणु ऊर्जा संयंत्र को भीषण नुकसान पहुंचा और विकिरण वातावरण में रिसने लगा। इस परमाणु हादसे के कारण इस संयंत्र के चारों तरफ 80 किलोमीटर के दायरे में फैले लोगों को वहां से हटा दिया गया. जापान की नेशनल पुलिस एजेंसी के अनुसार भूकंप और सुनामी के चलते 15 हजार 850 लोग मारे गए थे।

1960-पायनियर-5 को केप कैनेवरल, फ्लोरिडा से सौरमंडल के अध्ययन के लिए अंतरिक्ष में छोड़ा गया।

1920-  अमेरिकी भौतिकशास्त्री निकोलास ब्लोएमबर्गन का जन्म हुआ, जिन्हें विद्युत चुम्बकीय विकिरण के द्रव्य के साथ अन्योन्य क्रिया पर स्पेक्ट्रोस्कोपिक अध्ययन के लिए अमेरिका के आर्थर लियोनार्ड शावलोव तथा स्वीडन के कार्ल मैने बोर्जे सीगबॉन के साथ वर्ष 1981 का नोबेल पुरस्कार मिला।

1730-जर्मन-डैनिश जीवविज्ञानी ओट्टो फ्रेड्रिक मुलर का जन्म हुआ, जिन्होंने जीवाणुओं के प्रेक्षण पर ध्यान दिया। इसके पहले ल्यूवेनहॉक द्वारा ये धुंधले रूप में देखे गए थे। उस समय की सूक्ष्मदर्शियों की क्षमता उतनी अच्छी नहीं थी लेकिन मुलर पहले व्यक्ति थे जिन्होंने जीवाणुओं को स्पष्ट तौर पर देखा तथा उनका वर्गीकरण भी प्रस्तुत किया। (निधन-26 दिसम्बर 1784)

1955 – स्कॉटलैण्ड के जीवाणुविज्ञानी सर ऐलेक्ज़ैन्डर फ्लेमिंग का निधन हुआ,   जिन्होंने 1928 में पेनिसिलिन की खोज की। इंफ्लुएन्ज़ा के विषाणु पर काम करते हुए उन्होंने देखा कि स्टेफाइलोकोकस के पालन की प्लेट में फफूंद अकस्मात ही अपने आप ही उत्पन्न हो गए, और उन्होंने अपने चारों तरफ जीवाणुरहित वृत्त बना लिया था। उन्होंने फिर प्रयोग में पाया कि वह फफूंद, स्टेफाइलोकोकस की वृद्धि को रोकता है। उन्होंने उस पदार्थ का नाम पेनिसिलिन रखा। (जन्म- 6 अगस्त 1881)

1892-स्कॉटलैण्ड के रसायनज्ञ  आर्किबेल्ड स्कॉट कूपर का निधन हुआ, जिन्होंने आगस्ट केकुले से अलग कार्बन की चतु:संयोजकता और कार्बन के अणुओं की एक दूसरे से बंध बनाकर लंबी-लंबी श्रृंखलाएं बनाने की खासियत के बारे में बताया। इससे जैव पदार्थों में पाए जाने वाले यौगिकों के आधार को समझने में मदद मिली। उन्होंने ही तत्वों के प्रतीक में बंध को एक छोटी रेखा से दिखाने की शुरूआत की। (जन्म- 31 मार्च 1831)

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