इंडस पब्लिक स्कूल दीपका में मदर्स-डे के उपलक्ष्य में हुए विभिन्न कार्यक्रम

सभी कार्यक्रम हुए ऑनलाइन । आईपीएस दीपका के अभिभावकों एवं विद्यार्थियों ने प्रकट किया माँ के प्रति सम्मान ।आईपीएस दीपका के विद्यार्थियों ने माँ के सम्मान में बनाए विभिन्न आकर्षक चित्र, लिखे मनभावक स्लोगन ।आई.पी.एस. के बच्चों ने आर्ट एण्ड क्राॅफ्ट से अपने माँ के सम्मान में बनाए विविध नजराने ।आईपीएस दीपका में मदर्स-डे के अवसर पर सभी ने किया माँ को नमन ।

बच्चों के लिए कभी अपना प्यार कम नहीं करती लेकिन सारे बच्चे मिलकर भी माँ को थोड़ा प्यार नहीं दे पाते — डाॅ. संजय गुप्ता

माँ का पूरा दिन हमारी जरूरतों को पूरा करने में बीत जाता है — श्रीमती ज्योति नरवाल ।

माँ की दुआओं का खजाना कभी कम नहीं होता ।– डाॅ. संजय गुप्ता ।

जीवन का प्रत्येक क्षण माँ का ही दिया हुआ उपहार होता है– डाॅ. संजय गुप्ता ।

दीपका । एक माँ हर एक की सबसे अच्छी दोस्त होती है । क्योंकि वह हर एक चीज का ध्यान रखती है जिसकी हमें जरूरत होती है । इसलिए उन्हें धन्यवाद और आदर देने के लिए वर्ष का एक दिन समर्पित किया गया है जिसे हर साल हम मातृ-दिवस के रूप में मनाते हैं । हम लोग बिना अपनी माँ के प्यार और देखभाल के नहीं रह सकते हैं । वह हमारा बहुत ध्यान रखती है वह बहुत खुश हो जाती है जब हम लोग हँसते हैं तथा बहुत दुखी हो ताजी है जब हम लोग रोते हैं । इस दुनिया में माँ एकमात्र ऐसी इंसान होती है जो हमें कभी अकेला नहीं छोड़ती । माँ अपने बच्चों के लिए पूरी निष्ठावान होती है । भारत में हर वर्ष मई महीने के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाता है । हम जीवनभर एवं कई जन्मों तक माँ के एहसानों का बदला नहीं चुका सकते । वह धरती पर भगवान का जीता जागता स्वरूप होता है ।

दीपका स्थित इंडस पब्लिक स्कूल में वैसे तो प्रत्येक वर्ष विश्वभर की माँ के प्रति मदर्स डे के अवसर पर स्नेह एवं सम्मान व्यक्त किया जाता है लेकिन इस वर्ष का मदर्स डे विद्यालय के लिए कई दृष्टिकोण से खास रहा । पहली बात तो यह कि इस पैडेमिक सिचुएशन में भी विद्यालय ने माँ के प्रति सम्मान व्यक्त करने में वर्चुअल सेमिनार का आयोजन किया और दूसरी सबसे रोचक बात यह थी कि विद्यालय के छात्र-छात्राओं सहित अभिभावकों ने भी मातृ-दिवस के अवसर पर अने-अपने तरीके से अपनी भावनाओं को व्यक्त किया । विद्यार्थियों ने विभिन्न आकर्षक चित्रों और स्लोगन के माध्यम से माँ के प्रति सम्मान व्यक्त किया । कई विद्यार्थियों के चित्र इतने आकर्षक थे कि वे स्वयं में बहुत कुछ अभिव्यक्त करती है ऐसा प्रतीत होता था । कई विद्यार्थियों ने अपने चित्रों में वृध्दाश्रम को भी प्रदर्शित किया और यह संदेश देने का प्रयास किया कि हमारे मन में अपनी जननी के प्रति इतना सम्मान, स्नेह व प्रेम होना चाहिए कि दुनिया में वृध्दाश्रम की आवश्यकता ही न हो ।
उच्च एवं उच्चतर कक्षा के विद्यार्थियों ने माँ पर समर्पित कविता का वाचन कर माँ के प्रति सम्मान व्यक्त किया ।
पूरा कार्यक्रम ऑनलाइन आयोजित किया गया । कार्यक्रम में उपस्थित अभिभावकों ने भी क्रमशः अपने-अपने विचार व्यक्त किए ।

अभिभावक श्रीमती ज्योति नरवाल ने कहा कि माँ इस शब्द से ही हमारे जीवन की शुरूआत होती है । जिसके बिना हम जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकते । कहते हैं कि, भगवान सब जगह नहीं हो सकते इसलिए उन्होंने माँ को बनाया । माँ एक ऐसी हस्ती है जिससे ऊँचा तो खुदा का कद भी नहीं हो सकता क्योंकि खुदा जिसे आदमी बनाता है माँ उसे इंसान बनाती है । वो माँ ही है जो खुद दुःख झेलकर अपने बच्चों को सुख देती है ।

अभिभावक श्रीमती स्वाति जायसवाल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि माँ शब्द ही अद्वितीय प्यारा व स्वयं में संपूर्ण है । यदि कहें कि पूरी सृष्टि में इससे प्यारा कोई और शब्द नहीं है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी । माँ कहना व बनना दोनों ही पल जिंदगी का अनमोल व अद्वितीय पल होता है । हमें ताउम्र अपनी माँ के प्रति स्नेह, सम्मान व कृतज्ञता व्यक्त करना चाहिए ।

अभिभावक श्रीमती खुशबु गौतम ने कहा कि देखा है मैंनें अपनी माँ को बड़े करीब से जब भी घर में चार रोटियाँ हुआ करती थी, तो चारों की चारों रोटियाँ मुझे खिलाकर खुद पानी पीकर मुस्कुराकर सो जाया करती थी, यह बोलकर कि मुझे भुख नहीं है ।

अभिभावक श्रीमती श्रध्दा तिवारी सच में माँ जैसी त्याग स्नेह व समर्पण की जीती जागती मिसाल हमें दुनिया में कहीं नहीं मिलेगी । मेरे ख्याल से जिसने आपके जीवन को बनाने में पूरी जिंदगी लगा दी उसके लिए एक दिन तो क्या अगर हम अपनी पूरी जिंदगी भी लगा दे तो भी कम है ।

अभिभावक श्रीमती कल्पना साहु ने कहा कि हर एक के जीवन में माँ एक अनमोल इंसान के रूप में होती है । सुबह के समय वह बहुत प्यार से हमें बिस्तर से उठाती है और रात को प्यारे सपनों के साथ कहानियाँ सुनाकर सुलाती है ।

अभिभावक श्रीमती बी.स्निग्धा ने कहा कि हमारे जीवन में माँ की भूमिका हमेशा अलग होती है और जीवन में शामिल दुसरे लोगों से अनमोल होती है । माँ का पूरा दिन हमारी जरूरतों को पूरा करने में बीत जाता है । वो अपने बच्चो से कुछ भी वापस पाना नहीं चाहती बल्कि हमें खुले दिल से प्यार करती है ।

अभिभावक श्रीमती सिखा चौहान कहा कि हमने भगवान को कभी नहीं देखा और देखने की जरूरत भी नहीं क्योंकि माँ की सुरत के जैसे ही भगवान की मुरत होगी । माँ का पूरा दिन हमारी जरूरतों को पूरा करने में बीत जाता है ।

विद्यालय के यशस्वी प्राचार्य डाॅ. संजय गुप्ता ने कहा कि एक माँ का जीवन त्याग, प्रेम और देखभाल जैसी चीजों के बीच होता है । एक माँ अपने बच्चों को बिना किसी शर्त के प्यार करती है । माँ के चरणों को स्वर्ग से भी सुंदर माना गया है । कहा भी जाता है -जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गदपि गरीयसि । माता के समान कोई छाया नहीं है, माता के समान कोई सहारा नहीं है, माता के समान कोई रक्षक नहीं है । माँ भगवान की सबसे सुंदर रचना है । हमें भूल से भी अपनी माँ का दिल नहीं दुखाना चाहिए । मा हमारे लिए सुरक्षा कवच की तरह होती है क्योंकि वह हमें सभी परेशानियों से बचाती है । माँ एक मात्र एक ऐसी इंसान है जिनका काम बिना किसी तय समय असीमित होता है । कए बच्चे को जन्म देने लेकर उसे एक अच्छा इंसान बनाने तक सभी पड़ावों में माँ अपने जीवन में अहम भूमिका निभाते हैं ।

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