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“जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे”/ श्रद्धा, भक्ति एवं दिव्य आस्था के पावन संगम का प्रतीक, भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा का पावन पर्व एक बार फिर संपूर्ण भारतवर्ष में भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। इस शुभ अवसर पर महाप्रभु श्री जगन्नाथ, भाई श्री बलभद्र एवं बहन माता सुभद्रा की दिव्य रथयात्रा जनमानस के लिए अलौकिक अनुभूति का क्षण लेकर आती है।
भक्तगण इस अवसर पर भगवान के विशाल रथ को खींचने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं, जिसे परम पुण्यदायी और मोक्षदायक माना जाता है। यह रथयात्रा न केवल ओडिशा के पुरी धाम में, बल्कि देश के विभिन्न भागों में भी पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाती है।
इस पावन पर्व पर सभी श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा गया—“प्रभु श्री बलभद्र जी, माँ सुभद्रा जी एवं महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी की कृपादृष्टि आप सभी पर सदैव बनी रहे।जय जगन्नाथ! जय जगन्नाथ!”
यह रथयात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, समानता, एकता और समर्पण का एक भव्य प्रतीक है, जो जन-जन को जोड़ती है और प्रभु के सान्निध्य का एहसास कराती है।








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