आम हड़ताल का एसईसीएल की खदानों में रहा मिला जुला असर, खदानों के बाहर यूनियन नेताओं और कर्मियों ने की आवाज बुलंद

आम हड़ताल का एसईसीएल की खदानों में रहा मिला जुला असर, खदानों के बाहर यूनियन नेताओं और कर्मियों ने की आवाज बुलंद

कोरबा। जिले की कोयला खदानों में देश व्यापी हड़ताल का व्यापक असर रहा। सुबह से श्रमिक संगठनों ने हड़ताल शुरू कर दिया। एसईसीएल के चारों केंद्रीय श्रमिक संगठन केंद्र सरकार की नई श्रम कानून नीतियों का विरोध कर रहे हैं। साथ ही सीएमपीडीआई के निजीकरण और आईपीओ का भी विरोध किया गया।एसईसीएल की दीपका, गेवरा और कुसमुंडा खदानों में सुबह से ही प्रदर्शन जारी रहा। सुरक्षा व्यवस्था के लिए मौके पर पुलिस और एसईसीएल गार्ड तैनात किए गए हैं। पहली पाली से ही हड़ताल का मिला जुला असर दिखाई दिया। श्रमिक नेताओं ने कहा कि यह एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल है। सरकार मजदूरों के अधिकारों को छीन रही है। निजी कंपनियों के कर्मचारियों ने भी हड़ताल का समर्थन किया है।29 पुराने श्रम कानूनों को हटाकर नए कानून लाए गए हैं। यूनियन नेताओं ने कहा कि बीएमसी, एटक, इंटक, एचएमएस, सीटू के अलावा छोटे संगठन भी हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं। कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को समझा रहे हैं कि मजदूरों के हित में कानून बनाया जाए। आम हड़ताल को सफल बनाने के लिए जिले में संयुक्त कोयला मजदूर संगठनों ने तैयारियां तेज कर दी थी। हड़ताल के समर्थन में श्रमिकों को एकजुट करने एक जुलाई से व्यापक जनसंपर्क और जागरूकता अभियान शुरू किया गया था, जिसका हड़ताल में असर देखने को मिला।एसईसीएल के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन, गेट मीटिंग और बाइक रैलियों के माध्यम से मजदूरों को हड़ताल में भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया था। ट्रेड यूनियन नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार श्रम संहिताएं मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने वाली हैं। इसी तरह न्यूनतम वेतन, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की उपेक्षा जैसे मुद्दों को लेकर यह आंदोलन किया जा जा रहा है। इसमें इंटक, सीटू, एटक, एचएमएस, एआईयूटीयूसी सहित अन्य राष्ट्रीय यूनियन के पदाधिकारी व सदस्य शामिल रहे। आंदोलन में भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) शामिल नहीं रही। यूनियन नेताओं का कहना है कि कोरबा में संचालित एसईसीएल की खदानों में आंदोलन का व्यापक प्रभाव पड़ा है।

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