
हम इंसान पुरुषार्थ का पुतला है, हमारी शक्ति , साहस व सामर्थ्य का कोई अंत है ही नहीं, हम इंसान तो बड़े से बड़े संकटों से अपने साहस के बल पर लड़कर जीत सकते हैं,तो इस कोविड 19 से उपजी वैश्विक महामारी कोरोना से क्यों नहीं ? हम जीतेंगे , मेरे आत्मीय साथियों हम सभी हर असंभव के बीच भी संभव की अभिनव किरणें उत्पन्न कर सकते हैं, हमारे लिए शर्त सिर्फ इतना ही है कि हम सभी अपने को समझें और अपनी सामर्थ्य को मूर्त रूप देने के लिए साहस को आज से ही कार्यान्वित करे। साथ ही आज हर तरफ आत्मनिर्भर होने की बात की जा रही है , तो इसके लिए सबसे पहली आपको ही खुद को पहचानना होगा, जैसे आप हो वैसे ही खुद को स्वीकार करना होगा, इससे आप अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बन जायेंगे ,याद रखे अपने अंदर ये भावना या विचार कभी भी न लाये की परिस्थितियां आपके अनुकूल नहीं हैं, खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करें और अपने आप से प्यार करे।यह भी आप जानते हो ही की आत्मनिर्भर लोग घमंडी नहीं होते और न ही वो ये मानते है की सारी मानव जाति क्रूर है ,आत्मनिर्भर लोग वो होते है जो देख सकते हैं की देश व इस दुनियां में क्या अच्छा है और क्या बुरा है और सतर्क होकर उनके और दूसरों के लिए मजबूती से चुनाव करते हैं , अगर आप दूसरों पर भरोसा नहीं करते हैं और सिर्फ अपने बारें में सोचते हैं तो आप आत्मनिर्भर नही हो सकते ,आप आज से संसार को स्वीकार करना सीखें और शक्तिशाली या कहे की सबल बनने का आज ही निर्णय लें लीजिए। याद रखना अगर आप अपने दिमाग में यही सोच बनाये रखेंगे की लोग क्या सोचेंगे तो आप खुद को अपने आपसे ही दूर करते रहेंगे ,आप हमेशा यह सोचे की आप सर्वश्रेष्ठ हैं, ऐसा सिर्फ सोचें ही नहीं बल्कि खुद को साबित भी करने का लगातार प्रयास करते रहिए , आपके विचार ही आपको भी सबसे ज्यादा प्रेरित करते हैं अपने विचारों को अपनी सफलता का ज़रिया बनायें इसकी शुरुआत आप खुद पर भरोसा रखकर अपनी जिम्मेदारियों को निभाकर करें और फिर सफलतापूर्वक अपना लक्ष्य हासिल करने की कोशिश करें, हम अधिकांश लोग अन्दर से जोश और अनिश्चितता से भरें हैं हाँलाकि जोश और अनिश्चितता सफलता पाने के लिए काफी नहीं हैं लेकिन ये आपको हार भी नहीं मानने देते है, दुसरी बात आप भी महसूस करते ही होंगे की अन्य लोगों को हमारे व आपके सफलता से कोई सरोकार नही होता , यह तो हम जानते ही है की दुनियां के किसी भी क्षेत्र के सबसे सफल लोग हमेशा से प्रतिभाशाली या आकर्षक नहीं रहे है। यदि आप तरक्की का लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं तो इसे स्वयं ही हासिल करना होगा । एक प्रेरणास्त्रोत या रोल मॉडल आपको जीवन जीने की कला के लिए प्रेरित कर सकता है आप जिसके प्रशंसक हैं और जिससे अपने मूल्य साझा करते हों ऐसे किसी व्यक्ति को अपना रोल मॉडल बनाना कोई बुरी बात नहीं है लेकिन आख़िर में ज़रूरी है की आप खुद को अपना रोल मॉडल बनायें,एक ऐसा इंसान जो भी वो करना या कहना चाहे उसमें करने की काबिलियत हो ,स्वयं बनने का लक्ष्य रखें और सबसे अच्छा करने की कोशिश करें,अगर आप खुद को नहीं देखेंगे तो आत्मनिर्भर नहीं बन पाएंगे । अंत में एक बात कहना चाहूंगा कि यदि आप तेजी से आगे बढ़ रहे हैं , आपकी ख्याति दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है आप लोगप्रिय होते जा रहे हैं, सुंदर व कुशाग्र बुद्धि के हैं ,तो आपकी आलोचना जरूर होगी, लेकिन आप इस आलोचना को भी प्रशंसा ही मान लीजिए, क्योंकि हमने कहीं पढ़ा था या अपने जीवन में भी अनुभव किया हूं कि ईर्ष्या भी प्रशंसा का ही एक दुसरी रूप होती है, यही तो वह समय है जब हम सभी के आंतरिक शक्ति की परीक्षा हो रही है, इसीलिए यहां मैं कह रहा हूं कि आप शांत भाव से धैर्य का रास्ता अपनाकर मन को एकाग्र कर चेहरे पर हमेशा मुस्कुराहट रखते हुए ईश्वर का स्मरण कर लगातार अपने संकल्प की पूर्ति में लगे रहिए यह बुरे दिन भी गुजर जाएंगे।
विक्रम चौरसिया







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