देखो देखो आप लोकतंत्र का नया अवतार
खून से सने हाथ लेकर वो प्रेम सीखा रहे हैं
वंचित व बेरोजगारों के आवाज़ को दबा रहे
जाति-धर्म के नाम पर ये देश जला रहे हैं।।
अजीब विडंबना आज लोकतंत्र का होता जा रहा
माँगते रहे हैं जो एक आतंकवादी के लिए इंसाफ
आज वो देश को लोकतंत्र का पाठ पढ़ा रहे हैं
आखिर कैसी आजादी अब दे इनको साथियों ?

देखो किसी भी देश के विकाश में युवाओं का
भूमिका प्रमुख होती है लेकिन आज देखो ना
बड़ी बड़ी डिग्री लेकर युवा बेरोजगार बैठा है
और दसवीं फेल शान से ये देश चला रहे हैं ।।
वर्षों तक खाते रहे हैं देश को दीमक के जैसे
वही आज चौकीदार चोर है के नारे लगा रहे हैं
बेरोजगारी ,गरीबी और देश में तनाव कितना है
लेकिन नेता जी एसी में बैठ कर भाषण दे रहे है।।
देखो ना अजीब विडंबना है कि जब भी आप
रोजगार बोलोगे तो वो पाकिस्तान मुर्दाबाद कहेंगे
आखिर कैसे हमारा देश विश्वगुरु बनेगा ऐसे में ?
संभल जाओ लोकतंत्र को बचा लो देशभक्तो।।
विक्रम चौरसिया – दिल्ली विश्वविद्यालय- अध्येता.






Comments are closed.