आई0पी0एस0 दीपका द्वारा ‘‘फादर्स डे‘ के अवसर पर निबंध व कविता प्रतियोगिता का ऑनलाइन आयोजन रखा गया

आईपीएस के विद्यार्थियों ने अपने पिता के साथ साझा की अनेक मनभावन तस्वीरें ।कोई अपने पिता के साथ योगा करते दिखा तो कोई खेलते,तो कोई मस्ती के मूड में।आई.पी.एस. के बच्चों ने  ‘‘फादर डे के अवसर पर अपनी भावनाएं व्यक्त कर महत्वपूर्ण पलों को संजोया ।अपने बच्चों की खुशियों के लिए अपना जीवन के खुशियों कुर्बान करने को ही पिता कहते है-डाॅ. संजय गुप्ता ।जब हम नए व्यक्ति से मिलते है, वो यहि पूछता है कि तुम किसके बच्चे हो पिता का स्थान परिवार में वृक्ष के बीज या जड़ के रूप में समान – डाॅ. संजय गुप्ता ।
 
 
दीपका/ वैसे तो हमारी भारतीय संस्कृति में माता-पिता का स्थान पहले ही सर्वोच्च रहा है, किन्तु आजकल भौतिकता के प्रभाव में हम विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय दिवसों को भी ख़ुशी-ख़ुशी सेलिब्रेट करते हैं. वैसे भी हमारी संस्कृति हर तरह के सद्विचारों और मूल्यों का स्वागत करती रही है और इस लिहाज से प्रत्येक वर्ष जून के तीसरे रविवार को ‘इंटरनेशनल फादर्स डे’ का दिन प्रत्येक व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है. आखिर, हर कोई किसी न किसी की ‘संतान’ तो होता ही है और इसलिए उसका फ़र्ज़ बनता है कि वह अपने पिता के प्रति अपने जीवित रहने तक सम्मान का भाव रखे, ताकि अगली पीढ़ियों में उत्तम संस्कार का प्रवाह संभव हो सके. अक्सर गलतियों पर टोकने, बाल बढ़ाने, दोस्तों के साथ घूमने और टी.वी. देखने के लिए डांटने वाले पिता की छवि शुरु में हम सबके बालमन में हिटलर की तरह रहती है. लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं, हम समझते जाते हैं कि हमारे पिता के हमारे प्रति कठोर व्यवहार के पीछे उनका प्रेम ही रहता है. बचपन से एक पिता खुद को सख्त बनाकर हमें कठिनाइयों से लड़ना सिखाता है तो अपने बच्चों को ख़ुशी देने के लिए वो अपनी खुशियों की परवाह तक नहीं करता. एक पिता जो कभी मां का प्यार देते हैं तो कभी शिक्षक बनकर गलतियां बताते हैं, तो कभी दोस्त बनकर कहते हैं कि ‘मैं तुम्हारे साथ हूं’. इसलिए मुझे यह कहने में जरा भी संकोच नहीं कि पिता वो कवच हैं, जिनकी सुरक्षा में रहते हुए हम अपने जीवन को एक दिशा देने की सार्थक कोशिश करते हैं. कई बार तो हमें एहसास भी नहीं होता कि हमारी सुविधाओं के लिए हमारे पिता ने कहाँ से और कैसे व्यवस्था की होती है. यह तब समझ आता है, जब कोई बालक पहले किशोर और फिर पिता बनता है |
जाहिर है, अपने बच्चे के लिए तमाम कठिनाईयों के बाद भी पिता के चेहरे पर कभी शिकन नहीं आती. शायद इसीलिए कहते हैं कि पिता ईश्वर का रूप होते हैं, क्योंकि खुद सृष्टि के रचयिता के अलावा दुसरे किसी के भीतर ऐसे गुण भला कहाँ हो सकते हैं. हमें जीवन जीने की कला सिखाने और अपना सम्पूर्ण जीवन हमारे सुख के लिए न्योछावर कर देने वाले पिता के लिए वैसे तो बच्चों को हर समय तत्पर रहना चाहिए, लेकिन अगर इतना संभव न हो तो, कम से कम साल में एक खास दिन (International father’s day) तो हो ही! उनके त्याग और परिश्रम को चुकाया नहीं जा सकता, लेकिन कम से कम हम इतना तो कर ही सकते हैं कि उनके प्रति ‘कृतज्ञता व्यक्त कर सकें. हालाँकि ‘फादर्स डे’ मनाना हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं रहा है, और मूल रूप से यह यू.एस. में जून महीने के तीसरे रविवार को मनाया जाता है, लेकिन आधुनिक ज़माने की संस्कृति ने हमें ‘फादर्स डे’ के रूप में अगर यह अवसर दिया है, तो हमें अच्छी चीजों और परम्पराओं का स्वागत करना चाहिए! इससे हम अपनी भावनाएं जो चाहकर भी नहीं कह पाते, वह इस अवसर पर कह सकते हैं. उन्हें वो अपनापन महसूस करा सकते हैं, जिससे वो अपने आपको बुढ़ापे में सुरक्षित महसूस कर सकें. उनको ये एहसास करा सकते हैं कि ‘आज मैं जो भी हूं’ वो आपके बिना संभव नहीं था. जाहिर है, हर मनुष्य के भीतर फीलिंग होती है, और अगर किसी को उसकी संतान शुभकामनाएं दे तो उसे अच्छा ही लगेगा.
 
पिता शिक्षक भी है दोस्त भी गुरु भी –
 
पिता हमारी जिंदगी में वो महान शख्स है जो हमारे सपनो को पूरा करने के लिए अपनी सपनो की धरती को बंजर ही छोड़ देता है, नीम के पेड़ की तरी कड़वा होता है परंतु छाया व ठंडी देता है। हमें कभी कोई चीज मांगनी नही पड़ती पापा हमेशा पहले से मेरी हर जरूरत का ध्यान रखते हैं वो कभी अपने लिए कुछ लाये न ऐसा हो नहीं सकता। पिता के सर पर पूरा घर होता है और वो पिता पुरे घर को संभाल लेता है। अगर सर पर पिता का हाथ न हो तो हमें दुनियाँ में पूछने वाला कोई नहीं होता क्योंकि जब भी हम किसी नए व्यक्ति से मिलते है तो वह यही पूछता है कि, तुम किसके बच्चे हो? तुम्हारा पिता कौन है?                               
पिता के दिल की हालात सिर्फ वो पिता ही जानता है। सच है शौक तो पापा की कमाई से पूरे होते हैं, अपनी कमाई से तो सिर्फ जरूरते पूरी होती हैं सिर्फ गुजारा होता है। पिता के इस महानता को दिल से व्यक्त करने बच्चों को अपने जीवन में पिता का महत्व उनकी उपयोगिता बताने आई0पी0एस0 दीपका द्वारा ‘‘फादर्स डे पर ऑनलाइन हिंदी एस्से ओन फादर्स डे एवं कविता प्रतियोगिता के माध्यम से अपनी भावनाएं व्यक्त की । इसके अलावा विद्यार्थियों ने अपने पिता के सम्मान में स्लोगन एवं आकर्षक पोस्टर भी बनाए। छात्र-छात्राओं द्वारा ‘‘फादर्स डे मनाया गया जिसमें विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों ने अपनी भावनाएं शेयर करते हुए कविता में पापा के लिए अपना प्यार दिखाने के लिए अपने पापा के लिए कुछ लाइन डेडिकेट शोसल मीडिया के माध्यम से शेयर किया  । कार्यक्रम में पिताओ के सम्मान में बच्चों एवं विद्यालय के  शिक्षक शिक्षिकाओं द्वारा मन को भावुक करने वाला गीत ऑनलाइन प्रस्तुत किये गये।  विद्यार्थियों ने कई मजेदार तस्वीरें भी शेयर की जिसमे से अपने प्यारे पापा के साथ मस्ती करते हुए,खेलते हुए,योगा करते हुए तो डांस करते हुए नजर आए।
 
विद्यालय के प्राचार्य डाॅ. संजय गुप्ता से हुई चर्चा में उन्होंने बतलाया कि फादर्स डे यानी की पिता दिवस इस साल 20 जून 2021 को मनाया जा रहा है । हमारे संपूर्ण जीवन में माता-पिता का अहम योगदान रहता है। पिता अपनी भूमिका प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनो रूप से अदा करता है। विभिन्न कठिनाइयों का सामना करते हुए अपने संतान की प्रत्यक्ष खुषियों को पूरा करने का प्रयास करता है। जीवन में कई परिस्थितियाँ ऐसी भी आती है, जब पिता को अपनी अकांक्षाओं की बाल अपनी संतानों के लिए देनी पड़ती है। परिवार में पिता का स्थान वृक्ष के बीज व जड़ के समान होता है एवं आसमान में चमकते सूरज के समान होता है। जिनका अस्तित्व खत्म को जाने पर पूरी जिंदगी बिखर जाती है। लेकिन यदि पिता साथ हैं तो जिंदगी निखर जाती है। हम सभी आपस में हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई आपस मे है भाई भाई चूंकि हम सभी आत्माएं एक परमात्मा की संतान है व सर्व आत्माओं का एक ही परम पिता परमात्मा है एक हम सबके लौकिक पिता होते हैं जो इस शरीर को जन्म देते हैं एक होते हैं परलौकिक पिता जो हम सभी मनुस्य आत्माओं के परमपिता परमात्मा हैं |

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