
इमरान खान को ‘साहब’ कहते पढ़कर आप मुझसे खफा मत हो जाइये.इमरान साहब भले ही शत्रुदेश के वजीरेआजम हैं लेकिन हैं तो वजीरे आजम ही .हम जैसे हर वजीरेआजम के साथ सम्मान से पेश आते हैं वैसे ही इमरान खान साहब के साथ आ रहे हैं. इमरान खान साहब किसी जमाने में शत्रु देश की क्रिकेट टीम के कप्तान हुआ करते थे लेकिन वे हम जैसे अनपढ़ क्रिकेट प्रेमियों के बीच अच्छे-खासे लोकप्रिय थे .इसी लोकप्रियता की बिना पर वे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बन गए लेकिन अब हलकान हैं ,क्योंकि वे पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या ‘ भूख’ से नहीं निबट पा रहे हैं .
इमरान खान साहब की बदनसीबी है कि वे अपने मुल्क के वजीरे आजम बनने के बाद एक बार भी दिल्ली नहीं आ पाए और लगता है कि शायद आ भी नहीं पाएंगे क्योंकि उन्होंने तय कर लिया है की जब तक भारत में जम्मू -कश्मीरको दुबारा अनुच्छेद धारा 370 से लैस नहीं कर दिया जाता तब तक वे हिन्दुस्तान नहीं आएंगे .उन्होंने अपने मुल्क के सबसे बड़े मीडिया संस्थान ‘ डॉन ‘ के हवाले से ये बात कही है .इमरान साहब में एक बात अच्छी है की वे सच बात भी झूठ की ही तरह करते हैं ..
इमरान साहब पैदायशी सियासतदां नहीं हैं .पैदायशी तो वे क्रिकेटर हैं .और क्रिकेटर की खासियत ये होती है कि वो हर चुनौती का सामना आखरी सांस तक करता है .
मिसाल के तौर पर हमारे देश में किसान बीते छह -सात महीने से आंदोलनरत हैं लेकिन हमारे प्रधानमंत्री को किसानों के बीच जाने में या तो संकोच होता है ,या हेठी महसूस करते हैं जबकि इमरान खान साहब हकीकत का खुलासा करने इस्लामबाद में किसानों के बीच पहुँच गए . इस्लामाबाद में किसानों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए इमरान खान ने कहा कि पाकिस्तान ने पिछले साल 40 लाख टन गेहूं का आयात किया, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर बुरा असर पड़ा, जिसका पहले से ही अभाव है। इमरान खान ने कहा, ”पाकिस्तान के पास नई चुनौती है और सबसे बड़ी चुनौती है खाद्य सुरक्षा।” उन्होंने यह भी कहा कि तेजी से बढ़ती आबादी की जरूरत को पूरा करने के लिए तैयारी करने की आवश्यकता है।
भारत की खुश नसीबी है कि कोरोना काण्ड के बावजूद देश में अन्न का भंडार पर्याप्त है .हमें अपना विदेशी मुद्रा भण्डार अन्न मांगने पर खर्च नहीं करना पड़ रहा .हमारी बदनसीबी सिर्फ ये है कि हम हकीकत बयान करने में अति संकोची हैं .हम तीन की तेरह बना सकता हैं लेकिन हकीकत बयान नहीं कर सकते .क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान ने कहा कि पौष्टिक आहार नहीं मिलने की वजह से 40 फीसदी बच्चों का कद नहीं बढ़ पाता है और ना ही उनका दिमाग विकसित हो पाता है। उन्होंने कहा, ”खाद्य सुरक्षा असल में राष्ट्र सुरक्षा है।” इमरान ने कहा कि शुद्ध दूध की उपलब्धता भी बच्चों के विकास में एक अहम मुद्दा है।
जाती तौर पर मै इमरान खान का बड़ा प्रशंसक रहा ,क्योंकि उनके समूचे व्यक्तित्व में एक ठसक है,एक मौलिकता है ,लिजलिजापन नहीं है
मेरी बड़ी इच्छा थी कि मै पाकिस्तान जाकर वहां के पर्यटन स्थल देखता,वहां के अवाम से मिलता ,लेकिन मौजूदा हालात में जैसे इमरान खान का भारत आने का सपना अधूरा रहने वाला है ठीक वैसे ही मेरा सपना कभी पूरा होने वाला नहीं है.इमरान खान साहब ने कहा, ”यदि कोई देश अपने लोगों को अच्छा भोजन नहीं दे सकता है तो वह कभी आगे नहीं बढ़ सकता। यदि 15-40 फीसदी आबादी भूखी हो तो वे देश को नीचे करेंगे और करना भी चाहिए। जो देश अपनी जनता को पर्याप्त खाना ना दे सके उसे सजा देनी चाहिए।”
इमरान खान साहब की तरह बातें तो हमारे साहब भी बड़ी-बड़ी करते हैं, उन्होंने भी नाकाम होने पर एक समय चौराहे पर खड़ा कर सजा देने की बात कही थी लेकिन वे कभी सजा स्वीकार करने किसी चौराहे पर आये नहीं .हमारे साहब केवल चुनाव जीतने के लिए चौराहों पर आते हैं .इमरान खान की तरह हमारे साहब कभी अपनी नेशनल असेंबली में चीन या पाकिस्तान के बारे में इतना खुलकर नहीं बोलते .वे केवल चुनावी रैलियों में खुलकर बोलते हैं या फिर टीवी और रेडियों पर अपने मन की बात करते हैं
इमरान खान साहब की साफगोई गोया किसे पसंद नहीं आएगी. खान ने नेशनल असेंबली में अपने संबोधन में कहा, ‘मैं साफ कर देना चाहता हूं कि जब तक भारत पांच अगस्त, 2019 के गैरकानूनी कदमों को वापस नहीं लेता तब तक उसके साथ राजनयिक संबंध बहाल नहीं होंगे।’ खान ने कहा कि समूचा पाकिस्तान अपने कश्मीरी भाइयों और बहनों के साथ खड़ा है।.इमरान खान साहब को समझना चाहिए कि भारत कभी कश्मीर पकिस्तान को देने वाला नहीं है .अब पकिस्तान कश्मीर का राग अलापना छोड़े या न छोड़े .हमें तो लगता है की आने वाले कुछ वर्षों में भारत में ही इतने प्रयोग हो जायेंगे की कश्मीर को ढूढंती रह जाएगी दुनिया .
हमारे साहब की एक ही बात इमरान खान साहब के मुकाबले अच्छी है कि वे दूध से जलने के बाद छाछ भी फूंक-फूंक कर पीने लगे हैं .अतीत में बिना बुलाये पाकिस्तान जाकर व्यौहार बढ़ाने की कोशिशों का कोई नतीजा न निकलने के बाद पहले की गलती को दोहराया नहीं .वे चाउमीन खाने शंघाई या बीजिंग भी दोबारा नहीं गए .एक लम्बे आरसे से देश में ही कोरंटीन हैं ,लेकिन मौक़ा है की वे भी संसद के मानसून सत्र में इमरान खान की तरह पाकिस्तान और चीन के बारे में खुलकर निडर होकर बोलें और पूरी दुनिया को बता दें की भारत क्या चीज है ?
आपका तो पता नहीं लेकिन मै बड़ी बेसब्री से संसद के मानसून सत्र का इन्तजार कर रहा हूँ. मुझे इन्तजार है आपने साहब के भाषण का की शायद वे इस बार कुछ नया बोल जाएँ .एक लम्बे समय से साहब की बोलती बंद है. तमाम मोर्चों पर साहब सबको साथ लेकर नहीं चल पाए,सबका विकास नहीं कर पाए. सोनार बांग्ला नहीं बना पाए ,सबको एक साथ मुफ्त में टीका नहीं लगवा पाए .बहरहाल ये हमारे अंदरूनी मुद्दे हैं .इन सब पर संसद में बात हो सकती है .हमारी तरह हमारे देश के किसान भी साहब से नाखुश हैं ,लेकिन बेचारे कुछ कर नहीं पा रहे हैं .देखिये आषाढ़ में शायद कुछ हालात सुधर जाएँ !
@ राकेश अचल







Comments are closed.