
नगर के अधिवक्ता दीपक बजाज से जब लोक सदन ने पीके अग्रवाल जी के व्यक्तित्व पर विस्तृत चर्चा की तो जो बातें सामने आई उनसे पता चलता है कि पीके अग्रवाल जी जहां विधि के एक महान विद्वान अधिवक्ता थे वही तत्कालिक रूप से निर्णय लेकर के सामने की गंभीर घटनाओं पर भी काबू पा लिया करते थे।
दीपक बजाज बताते हैं कि एक दफा जब मैं उनके साथ जबलपुर हाईकोर्ट गया हुआ था तो हमारे साथ एक शख्स और भी थे। सुबह सुबह लगभग 4बजे मैंने देखा वह शख्स अचानक पलंग से नीचे गिर गए हैं उनका शरीर नीला पढ़ते जा रहा है या कोई जहर खुरानी की घटना ना हो मैं बहुत ही घबरा गया।
मगर, अग्रवाल साहब ने मामले को तत्काल समझा। मैं यही कह रहा था कि इनको हॉस्पिटल ले चलते हैं वही इलाज होगा। इस पर उन्होंने कहा कि पहले इनका शुगर चेक कर लिया जाए। शायद उन्होंने अपने अनुभव से यह समझ लिया था कि ब्लड प्रेशर अथवा कोई शुगर की समस्या हो सकती है और जब शुगर नापा गया तो वह अत्यंत कम था।

अग्रवाल साहब ने स्वयं अपने हाथों से उस शख्स को जिनका नाम बताना यहां उचित नहीं होगा अपने हाथों से शक्कर का घोल पिलाया तो धीरे-धीरे वह स्वस्थ होते चले गए उठ करके खड़े हो गए। मुझे तब पहली बार एहसास हुआ कि संकट की घड़ी में किस तरीके से अग्रवाल साहब निर्णय लेने में सक्षम है । मुझे उन पर सदैव गर्व होता था क्योंकि मैंने देखा अनेक दफा ऐसी घटनाएं घटी जब विधि के क्षेत्र में हमें लगता था कि कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने रास्ता निकाला। ऐसा निकाला जिसकी कोई तोड़ नहीं हुआ करती थी।
आज पीके अग्रवाल साहब की तीसरी पुण्यतिथि है मैं उन्हें अपने गुरु के रूप में याद करता हूं और शत-शत नमन करता हूं । मैं यहां यह भी कहना चाहूंगा कि जब मैं विद्यार्थी था तो मेरा रुझान विधि के तरफ बढ़ता चला गया क्योंकि अग्रवाल साहब मेरे सगे चाचा जी थे मुझे उनका सानिध्य मिला और उनकी विद्वता का लाभ मिला। कानून के प्रति उनके तथा ज्ञान को मैंने बहुत ही नजदीक से देखा और सीखा। यही नहीं सामाजिक संबंध कैसे बरकरार रखे जाते हैं यह भी मैंने उनसे सीखा है। वह अनेक संस्थाओं के पदाधिकारी रहे सदस्य रहे। रोटरी क्लब इंटक, कांग्रेस पार्टी में उनका महत्वपूर्ण स्थान रहा। विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के समय जब जयसिंह अग्रवाल जो वर्तमान में छत्तीसगढ़ में कैबिनेट मंत्री हैं जब साडा के अध्यक्ष हुआ करते थे अग्रवाल साहब ने रवि शंकर शुक्ल नगर में विधि वेत्ताओं के लिए मकान आवंटन में भूमिका निभाई थी। अग्रवाल साहब के संदर्भ में जितना भी लिखा जाए कम होगा। मैं बहुत ही संक्षिप्त में यही कहूंगा कि उन्होंने जो अथाह ज्ञान दिया वह हमारे जीवन की पूंजी है।







Comments are closed.