स्कूल में सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों को कोविड.19 वैक्सीन लेने की प्राथमिकता देना अत्यावश्यक है कोरोना योध्दाओं के रूप में शिक्षकों को भी पहली प्राथमिकता देते हुए वैक्सीनेसन कराना चाहिए ।

इस क्षेत्र में कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए भारत सरकार के सक्रिय प्रयासों की प्रशंसा की जा रही है।हमारे देश ने अपने नागरिकों को सुरक्षित और स्वस्थ रखने में भली भांति प्रबंध किया है।
कोरोना महामारी के खिलाफ चिकित्सा विभाग पुलिस सफाईकर्मी एवं जिला प्रशासन तो जी जान से जुटा हुआ है इस जंग में सैकड़ों शिक्षक भी कोरोना योद्धा बनकर अहम भूमिका निभा रहे हैं। शिक्षकों ने हर गांव में कोरोना को हराने के लिए मोर्चा खोल रखा है। वे स्वास्थ्यकर्मियों समेत अन्य कार्मिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर स्वास्थ्य सर्वे बाहरी लोगों की सूचनाए संकलित करना और होम क्वॉरंटीन किए गए लोगों पर निगरानी करने समेत कई कार्यों को बखूबी अंजाम दे रहे हैं। यहां तक की जिला कलक्ट्रेट में संचालित होने वाले वार रूम में भी शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका हैं।
वैश्विक महामारी कोविड-19 से निपटने के लिए शिक्षक वर्ग निरंतर अपने कर्तव्य से डटे हुए है। गांवों स्कूलों में बनाए गए क्वॉरंटीन सेंटर शिक्षक ही संभाल रहे हैं। वहीं ग्रामीणों को सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ भी पढ़ा रहे हैं। कई शिक्षक घर घर किए जा रहे स्वास्थ्य सर्वे में योगदान रहे हैं तो कइयों को राशन सामग्री बांटने में भी लगा रखा है। वे संस्थागत क्वॉरंटीन सेंटर और राहत शिविरों में रखे गए लोगों की निगरानी कर प्रशासन का भी पूरा कर सहयोग कर रहे हैं।
जज्बा ऐसा कि जख्म भी नहीं रोक पाए कदम –
शिक्षक पूरे जज्बे से कोरोना को हराने में जुटे हुए हैं। डेंडा गांव की स्कूल के क्वॉरंटीन सेंटर पर तैनात शिक्षक ईश्वरसिंह कूरणा इसकी बानगी है। ड्यूटी पर जाने के दौरान सिंह दुर्घटना में घायल हो गए। उनके हाथ व पैरों में गंभीर चोटें आई है। शरीर पर लगे जख्म भी उन्हें कर्तव्य पालन से नहीं रोक पाए। वे नियमित रूप से क्वॉरंटीन सेंटर पर ड्यूटी दे रहे हैं। उनका कहना है कि कर्तव्य पालन के सामने दर्द का अहसास नहीं होता।
लेकिन हमारे देश के वैज्ञानिकों ने जी जान लगाकर वैक्सीन की खोज की और उनके अथक प्रयास से वैक्सीनेशन का काम भी जारी है वैक्सीन के आते ही लगभग सभी राज्यों के स्कूल और काॅलेज खुल गए हैं पर खतरा अभी टला नहीं है । स्कूली बच्चों को कोरोना का खतरा बना हुआ है । स्कूलों का समुदाय का काफी बड़ा आधार है और वे अपने अपने समुदायों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखते हैं और शिक्षण, संदेश तथा जागरूकता का भी प्रसार कर रहे हैं। इसके लिए शिक्षकों को वैक्सिनेशन की प्राथमिकता मिलनी चाहिए ।
कोरोना महामारी को नियंत्रित करने के प्रयासों में शिक्षकों की भी अहम भूमिका है। बड़ी संख्या में शिक्षकों की फील्ड में ड्यूटी लगी हुई है। स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर फर्ज अदा कर रहे हैं। सभी क्षेत्र के स्कूलों के अधिकांश शिक्षक फील्ड में काम कर रहे हैं।
हम सभी कोरोना को एकजुटता से ही हराएंगे।








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