मिल जाते है पूजा स्थलों में भगवान
बड़ा मुश्किल है अभी मिल पाना इंसान
देखा है मैंने एक जीता जागता इंसान
जी हां, सही समझा आपने वों हैं हमारे कलाम……
कठिन है सब छोड़ वनो में एकांत तप करना
इससे भी कठिन है ऐशों आराम छोड़ रोज तपना
बग़ैर सन्यासी बने जिनका जीवन था सन्यास
इस दुनिया में रह जिनका ना टूटा कभी ध्यान
जी हां, सही समझा आपने वों हैं हमारे कलाम…..
ज्ञान भी अपरम्पार, न कभी अभिमान जताया
कर सही प्रयोग ज्ञान का, देश का गौरव बढ़ाया
कितने यतीम बच्चो को तुमने खुद से पढ़ाया
और ना जाने कितने हैं, इनके हमपर एहसान
जी हां, सही समझा आपने वों हैं हमारे कलाम…..
ना कोई दुनियावी पूंजी ना बनाया मकान
ये आंकड़े अक्सर कर जाते है सबको हैरान
परिवार भी नहीं, माना सबको अपनी संतान
आखिर कैसे हो गए तुम इतने महान
जी हां, सही समझा आपने वों हैं हमारे कलाम…..
ना केवल दिखावा भेद भाव के विरोध का
बल्कि इसे साक्षात जीवन में उतारा है
ये वाक्या है B H U दीक्षांत समारोह का
जब सभी कुर्सियां अपने पंक्तियों में बनी हुई थी
एक कुर्सी विशालता के अभिमान में तनी हुई थी
छोटी कुर्सियों के बीच एक बड़ी कुर्सी को नकारा है
तुमने एक समान कुर्सी में बैठना स्वीकारा है…..
कुर्सी के प्यारों के मुंह पर ये तमाचा है
दंब भरती कुर्सी को भी आज पछतावा है
इंसान से कुर्सी है कुर्सी से इंसान कहां
ये तुमने हम सब को बख़ूबी सिखाया वहां
ऐसी शख्सियत जिसे हर कुर्सी करता सलाम
जी हां, सही समझा आपने वों हैं हमारे कलाम….
इतनी सादगी इतनी रूहानियत, कलाम तुम पाक हो
कलाम तुमने पाक होने का हर मंज़र अख्तियार किया
“कलाम पाक” के मायने को तुमने साकार किया
तुम्हें जो पढ़ ले, वो समझो इस दरिया को पार किया…

नसरीन खातून
आसनसोल (पश्चिम बंगाल)






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