सवाल आपके जवाब गांधी भाई रोहरानंद के

रोहरानंद

दुनिया में रोज महात्मा गांधी पर एक पुस्तक प्रकाशित होती है….

प्रश्न -रमेश गुप्ता, रायगढ़ छत्तीसगढ़

आज अगर महात्मा गांधी होते तो रूस और यूक्रेन के बीच जो युद्ध चल रहा है ऐसे में वे किसकी तरफ होते रूस की तरफ अथवा यूक्रेन की तरफ।

–महात्मा गांधी के जीवन के दरमियान भी विश्व युद्ध हुआ था। मगर उन्होंने सदैव कमजोर का पक्ष लिया सच का पक्ष लिया। आज रूस और यूक्रेन का जो युद्ध दुनिया देख रही है उसमें निसंदेह महात्मा गांधी आज होते तो यूक्रेन के पक्ष में अपनी बात रखते और दुनिया को एक अद्भुत संदेश देते।
व्लादिमीर पुतिन ने एक तरह से तानाशाही का रास्ता अख्तियार कर लिया है। वह चाहता है कि डंडे की नोक पर यूक्रेन को झुका दे। यही कारण है कि यूक्रेन पर हमला बोल दिया है। मगर यूक्रेन ने जिस साहस का परिचय दिया है उसे दुनिया आज सलाम कर रही है। रूस जैसे महाशक्ति के सामने एक छोटा सा देश लगभग डेढ़ महीने से युद्ध रत है यह उसके साहस और आत्मबल का परिचय है।
यूक्रेन की जनता भी बलिदानी है और जिस साहस के साथ वह रूस का सामना कर रही है। मुझे महसूस होता है कि अगरचे महात्मा गांधी होते तो यूक्रेन के पक्ष में अपनी बात को रखते।
प्रश्न – लालचंद शर्मा, जयपुर राजस्थान
संपादक जी, पता नहीं क्यों मुझे मोहनदास करमचंद गांधी नामक शख्सियत अपनी ओर खींचती है आकर्षित करती है। पता नहीं क्या जादू है।
मैं गांधीजी को बहुत जानना समझना चाहता हूं और ज्यादा से ज्यादा जानना चाहता हूं। क्या यह कोई मेरा दिमागी फितूर है या और कुछ कृपया मार्गदर्शन करें।
-भाई आप तो बहुत ही खुश किस्मती है। आप जैसे लोग हमारे देश में बिरल हैं। और आप अगर महात्मा गांधी को पढ़ना चाहते हैं जानना चाहते हैं और ज्यादा जानना चाहते हैं तो यह आपकी खुश किस्मत है ईश्वर की आप पर कृपा है।
आप ऐसा कभी मत सोचिए कि यह कोई गलत काम है अपने देश के पुरखों महापुरुषों को जानना समझना हमारा कर्तव्य है। महात्मा गांधी दुनिया भर के करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं जाने कितने लोगों को उन्होंने नई जिंदगी दी है नया रास्ता दिखाया है। आप कह रहे हैं कि आप महात्मा गांधी को और ज्यादा जानना चाहते हैं अगर ऐसा है तो आपको भारत सरकार प्रकाशन विभाग के संपूर्ण महात्मा गांधी वांग्मय को पढ़ना चाहिए।
इसके साथ ही आपसे यह भी आग्रह है कि आप गांधी को पढ़ने समझने के साथ-साथ दूसरों को भी इसकी प्रेरणा दें उन्हें बताएं कि महात्मा गांधी का रास्ता मानव जीवन के लिए कितना सुखद और आवश्यक है। आज समाज में जितनी भी बुराइयां हैं इन सब का आरोग्य महात्मा गांधी की धरोहर में, गांठ में बंधा हुआ है।
प्रश्न- फूलचंद वर्मा, अंबिकापुर सरगुजा
-एक फिल्म आई थी-” लगे रहो मुन्ना भाई ” यह फिल्म देख कर के मुझे बहुत ही प्रेरणा मिली थी और गांधीजी को समझने के लिए रास्ता खुल गया था। क्या आपने भी यह फिल्म देखी थी आपकी दृष्टि में इस पर क्या राय है।
— “लगे रहो मुन्ना भाई” फिल्म जब आई थी तब निसंदेह महात्मा गांधी को समझने के लिए नया दृष्टि पटल खुल गया था। मैंने भी यह फ़िल्म देखी। मगर मैं यह कह सकता हूं कि मैंने अपना सर पकड़ लिया था।
क्योंकि महात्मा गांधी के सिद्धांतों को जिस बेतरतीब तरीके से उस फिल्म में दिखाया गया था उसे देखकर मुझे बड़ी ही‌ कोफ्त हुई थी।
लगे रहो मुन्ना भाई फिल्म में जो गांधीवाद दिखाया गया है वह सीधे सीधे अपने चश्मे से गांधीवाद को देखता है।
मेरा मानना है गांधीवाद ऐसा नहीं है कोई भी सच्चा गांधीवादी इस तरीके से काम नहीं कर सकता जिस तरीके से इस फिल्म का नायक करता है।
हां, यह सच है कि इस फिल्म से गांधीजी को समझने के लिए एक नया दरवाजा खुल गया। एक नया कपाट खुल गया। मगर इस फिल्म में गांधी जी के सिद्धांतों के साथ खिलवाड़ ही किया गया है और जो बारीक पकड़ समझ निर्देशक में होनी चाहिए उसकी कमी मुझे महसूस हुई।
जैसे फिल्म के नायक संजय दत्त यह महसूस करते हैं कि गांधीजी उनसे बातें कर रहे हैं उन्हें रास्ता बता रहे हैं यह कल्पना है जो रास्ता बताया जाता है और जिस पर नायक चलता है एक दूसरा रास्ता है गांधी जी का रास्ता नहीं है। कुल मिलाकर यह फिल्म दर्शकों का अच्छा मनोरंजन करती है।
प्रश्न – हरजीत सिंह खुराना, राजनांदगांव छत्तीसगढ़

संपादक जी,आप गांधी गांधी भजते जाते हैं, मगर सच तो यह है कि महात्मा गांधी ने देश का बंटवारा करा दिया उनके समय में लाखों लोग विस्थापित हुए, मारे गए। इस सब का दोष क्या महात्मा गांधी को क्या नहीं लगता।

महात्मा गांधी ने तो अपना जीवन लोगों के लिए बलिदान कर दिया। उन्होंने तो हमेशा सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह का रास्ता दिखाया था देश की आजादी के समय बंटवारे का जब जबरदस्त दबाव उन पर डाला गया था तो उन्होंने कहा था कि बटवारा तो मेरी लाश पर होगा।
हमें ऐतिहासिक दृष्टि से यह समझना चाहिए कि एक तरफ जवाहरलाल नेहरू थे तो उसी तरह मोहम्मद जिन्ना।
जिन्ना किसी भी हालत में पाकिस्तान से पीछे हटने को तैयार नहीं थे। अंततः बंटवारा हुआ और उस दरमियान खून खराबा हुआ। तो उसका दोषी उस समय की चाहे पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार हो अथवा पाकिस्तान में जिन्ना की को कसूरवार ठहराया जा सकता है।
मगर यह दोनों भी नए-नए सत्ता संभालने वाले नेता थे। और आजादी के साथ थी भीषण रक्तपात शुरू हो गया था महात्मा गांधी ने तो कोलकाता में जाकर के वहां ऐसा जादू चलाया की उनके नेतृत्व में मुसलमान दोनों बाहर आए और शांति की स्थापना हुई। गांधी जी पर यह आरोप नहीं लगाया जा सकता कि उन्होंने कोई भेदभाव किया। बल्कि जनसंघ के लोगों को यह लगने लगा यह तो हिंदू होने के बाद भी मुसलमानों का पक्ष ले रहे हैं यह जो गांठ बंधी उसी का दुष्परिणाम आने वाले समय में देश को देखना पड़ा जब एक शख्स ने महात्मा गांधी पर गोलियां चला दी।

प्रश्न-राजू श्रीवास, चांपा जांजगीर छत्तीसगढ़
संपादक जी, आपके गांधीवादी विचारों को पढ़ करके मेरी इच्छा है कि मैं आपसे एक बार अवश्य मिलूं।
-भाई राजू जी, आपका सदैव स्वागत है मुझे भी बहुत प्रसन्नता होगी आपसे मिलकर के। आप जब भी चाहे आकर के मुझसे मिल सकते हैं। मुझे विश्वास है कि आपको इससे खुशी मिलेगी और निसंदेह मैं आपको कुछ गांधी साहित्य भेंट करूंगा। गांधीजी की पुस्तिका हिंद स्वराज, गांधीजी: हास परिहास पुस्तकों के नवीन संस्करण अभी अभी छप कर आएं है।
प्रश्न – ताराचंद रेलवानी, बिलासपुर
संपादक जी महात्मा गांधी की कौन सी पुस्तक आपको सबसे ज्यादा प्रिय है और हमें क्या सुझाव देंगे तो हम अवश्य पढ़ें।
-मोहनदास करमचंद गांधी के जीवन पर लाखों पुस्तकें हैं और कहा जाता है कि हर दिन दुनिया में कहीं ना कहीं महात्मा गांधी जी पर कोई पुस्तक प्रकाशित होती है विमोचन होता है। ऐसे में मैं आपको बताऊं गिरिराज किशोर की लिखी गई -“पहला गिरमिटिया” पुस्तक मुझे सबसे ज्यादा प्रिय है।
गिरिराज किशोर जी ने यह पुस्तक बड़े ही अनुसंधान के साथ और स्वयं दक्षिण अफ्रीका यात्रा करने के बाद लिखी थी। महात्मा गांधी की यह वृहदाकार किताब सभी को अवश्य पढ़नी चाहिए। इसके अलावा हिंद स्वराज , संपूर्ण गांधी वांग्मय भी पठनीय है ।

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