
हैदराबाद न्यूज़ ब्यूरो,
आज कल जिस तरह से माया नगरी पर नशा का फैला मकड़जाल देखने को मिल रहा है वो जगजाहिर है कहने को किसी के पास कोई शब्द नहीं है इससे समाज के साथ- साथ युवा वर्ग एवं बच्चों पर काफी बुरा असर देखने को मिलता है क्योंकि फ़िल्मी दुनिया का असर समाज के हर वर्गों से जुड़ा है। इसी विषय पर परिचर्चा करने हेतु एक ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसके अंतर्गत देश के विभिन्न प्रदेश से जुड़े साहित्यकार ,डॉक्टर,शिक्षिका, एवं युवाओं ने खुलकर अपनी बात रखी जिसके अंतर्गत पेशे से चिकित्सक डॉ मंजुला साहू जी ,जो कि मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थीं ,उन्होंने बताया ,की जिस प्रकार आज हम सब पाश्चात्य सभ्यता को अपना रहें हैं,उसका मूल कारण आज की फिल्में ही हैं ,क्युकी वहां उसी का प्रदर्शन होता है ।उन्होंने उसके कई कारण बताए जैसे – परिवार की भूमिका में संक्रीणता प्रकृति प्रदत्त भेद का खण्डन एकल परिवार चलन इत्यादि।
युवा,ज्योति जी ,जो कि पेशे से एक सह शिक्षिका हैं,उन्होंने अपने विचार सांझा करते हुए कहा , कि हमारा समाज पतन की ओर जा रहा है,संसाधनों का सशक्तीकरण उपयुक्त ढंग से नहीं हो पा रहा है ।
कोरबा अंचल के प्रसिद्ध साहित्यकार एवं इस कार्यक्रम में अध्यक्षता कर रहे घनश्याम तिवारी जी,जो कि एक संगीतज्ञ हैं,उन्होंने मायानगरी के बारे में अपने विचार उन्मुक्त रूप से रखते हुए कहा कि ,है सिक्के के दो पहलू होते हैं ।हिन्दी सीने जगत का भी वैसा ही हाल है ,परन्तु येे सोचना आवश्यक है कि हम उसमे अपने आपको किस हद तक बांध रहें है ।
परिचर्चा के दौरान युवा कवि एवं पेशे से इंजीनियर रमाकान्त श्रीवास जी ने इस विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ,हम जीवन में किसी भी स्तर पर पहुंच जाएं,पर अपने परिवार और अभिवावकों का सम्मान नहीं भूलना चाहिए ।दुनिया में सिर्फ अपना परिवार और घर ही हमारी असल सम्पत्ति है ,इसका मान बनाएं रखना हर युवा का कर्तव्य है।
पेशे से, लेक्चरर और स्व कम्पनी की अध्यक्षा, शिल्पी भटनागर,हैदराबाद ,ने संचालन के साथ साथ परिचर्चा पर अपने विचार सांझा करते हुए कहा , कि बॉलीवुड हमारे समाज का एक अभिन्न अंग है।हमारा समाज व बाॅलीवुड एक दूसरे पूरक हैं ।उन्होंने मंच के माध्यम से युवाओं से अपील की, कि वे यथार्थ को पहचानें,मायानगरी के मकड़जालों से दूर रहें ,अपनी संस्कृति और सभ्यता को अपनाएं ।







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