
लगा था आग सीने में,
इंकलाब की जिसने ठानी थी।
मतवाले शहीद भगतसिंह ऐसी कहानी थी।
ना विचलित ना भयभीत ऐसी उसकी
तरुणाई थी।
बांध कफ़न सर पर आजादी की उसने चिंगारी भड़काई थी।
झूल गया वह फांसी के फंदों पर,
हंसते -हंसते ऐसी उसकी कुर्बानी थी।
आगाज़ कर गया वह स्वतंत्र भारत का ,जिसके लिए दी उसने अपनी जावानी थी।
शहीदे-ए-आज़म के रूप में अमर हो गया।ऐसी ख्याति उसने पायी थी।
( ज्योति सिंह ) उत्तर प्रदेश जिला-देवरिया







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