छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जैसे ही वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाते हुए फोटो अखबारों में प्रकाशित हुई और उन्होंने एक चिट्ठी संदेश छत्तीसगढ़ की आवाम को दिया कि वैक्सिन लगवाने में हमें आगे आना होगा….।

इसके साथ ही शातिराना तरीके से उनका एक फोटो जारी कर यह अफवाह फैलाई गई की मुख्यमंत्री भूपेश बघेल वैक्सीन नहीं लगवा रहे बल्कि दिखावा करके लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। ऐसी भोथरी बातें सोशल मीडिया में वायरल हो गई एक बारगी पढ़कर कोई भी गाल बजाते हुए यही कहेगा कि देखो! मुख्यमंत्री जी क्या कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में एक संवेदनशील मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पहचान बना चुके भूपेश बघेल और उनकी छवि पर जिस तरीके से बारंबार हमला किया जा रहा है और उसे ध्वंस करने का कुत्सित प्रयास जारी है,यह शर्मनाक है। कुछ संस्थाओं विशेष के द्वारा एक मायाजाल फैलाया जा रहा है लोगों के दिमाग में बैठाया जा रहा है कि प्रदेश की सरकार और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल में सिर्फ खामियां ही खामियां हैं।
…..और जैसे ही वैक्सीन को लेकर फर्जीवाड़ा शुरू हुआ वह तेजी से प्रसारित होता चला गया… क्योंकि झूठ बहुत तेजी से पैर पसरता है। मगर साथ ही यह भी सच है कि झूठ के पांव नहीं होते। वह बहुत जल्दी पकड़ में आ जाता है। इस मामले में भी यही हुआ भूपेश बघेल की छवि खराब करने का प्रयास और दांव उल्टा पड़ गया। क्योंकि लोगों को यह समझने में देर नहीं लगी कि यह एक झूठ है।
दरअसल, देश और प्रदेश में कुछ संस्थाएं छद्म रूप धारण करके अपने आप को राष्ट्रहित का प्रहरी बताते हुए सिर्फ झूठ का ही सहारा लेकर अपने विरोधियों की छवि धूमिल करने का प्रयास करती रहती हैं। वस्तुत: इन लोगों को हम बिना रीढ़ के कहेंगे। यह लोग नहीं जानते कि सच की ताकत कितनी बड़ी होती है। झूठ के तुमार पर खड़ी की गई छवियां कमजोर होती है और कभी भी आपको ना तो सम्मान और न ही
न ही मंजिल मिलती है। अपने आप को बौद्धिक कहने वाले यह लोग यह भी नहीं जानते कि काठ की हांडी दोबारा नहीं चढ़ती। मगर यह इतने पतित हो चुके हैं कि बारंबार प्रयास करते जाते हैं और चाहते हैं कि झूठ के आधार पर अपना सर्वस्व स्थापित कर ले।
और जैसा कि होना ही था विकसित लगाते हुए 20 सेकंड का एक वीडियो जारी हुआ वहां स्थापित लोगों ने भी जिन्होंने अपने मोबाइल पर वीडियो बनाए थे जब सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए तो यह सच सामने आ गया की यह सिर्फ एक ओछी हरकत थी जो अभी भी क्षम्य नहीं की जा सकती इससे आपको न तो मंजिल मिलती है। अपने आप को बौद्धिक कहने वाले यह लोग यह भी नहीं जानते कि काठ की हांडी दोबारा नहीं चढ़ती मगर यह इतने पतित हो चुके हैं कि बारंबार प्रयास करते जाते हैं और चाहते हैं कि झूठ के आधार पर अपना सर्वस्व स्थापित कर ले।







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