राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र पंडो जनजाति के आदिवासी, भूमि समतलीकरण करते अभिनव उदाहरण बने

कोरबा।छत्तीसगढ़ के एक
विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा का ग्राम पंचायत जलके आश्रित मोहल्ला तेंदू टिकरा है ….
यहां पर राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहलाने वाले कुल 74 परिवार पंडो़ जनजाति के हैं जो अभी खेती किसानी करके खाली समय का सदुपयोग करते हुए करीब 49 परिवार के लोग एक दूसरे की जमीन को कृषि उपजाऊ बनाने के लिए समतलीकरण कर रहे हैं। एक अभिनव प्रयास के तहत सामाजिक सहकारिता का उदाहरण दे रहे हैं।
विगत दो साल पहले वन अधिकार कानून के अंतर्गत अधिकार पत्र प्राप्त हुए हैं इस जमीन में खेती करने लायक नहीं था , उबड़ खाबड़ व पत्थर से भरा हुआ था।

फिर एक दिन एकता परिषद जन संगठन के माध्यम से एवं बापू की ग्राम स्वराज की कल्पना के साथ लोगों को सामूहिक कर रचनात्मक कार्य के लिए प्रेरित कर अपने जमीन को स्वयं सुधारने का काम पंडो समाज के मुखिया मोहन पंडो, बुद्धू पंडो एवं केवली बाई, परमेश्वरी बाई पंडो चैन साय पढ़ो आदि साथियों ने बैठकर “गांधी कुटी” में निर्णय लिया कि हम अपने जमीन पर सामूहिक श्रमदान से लगातार काम करके एक दूसरे की जमीन को कृषि योग्य बनाने का काम करेंगे… इसकी पहल एकता परिषद के एक कार्यकर्ता मुरली दास संत के द्वारा लोगों के साथ संवाद कर और आने वाले समय में अधिक उपजाऊ जमीन कैसे प्राप्त करें जैविक खाद का शत-प्रतिशत उपयोग कर और संगठन के माध्यम से एकता बनाकर सामूहिक काम करने का निर्णय लेकर विगत 1 सितंबर से शुरू किया है जो आगामी 20 सितंबर तक लगातार करने का संकल्प लिया हैं। गांव में सभी परिवार के लोग सुबह 8:00 बजे से लेकर दोपहर 12:00 बजे तक सामूहिक श्रमदान करते हैं लगातार कार्य करने से उनकी जमीन आज लगभग 16 एकड़ जमीन को समतलीकरण कर चुके हैं इस काम में कोई पैसा की जरूरत नहीं है सब अपने स्वप्रेरणा से एक दूसरे के जमीन में लगातार कार्य जमीन खुदाई, मेड़बंन्धी का कार्य करते आ रहे हैं।यह गांव गांधी जी के सपना ग्राम स्वराज ग्राम स्वावलंबन और सर्वोदय को सार्थक करते दिख रहा है। इन्हें देखकर अन्य लोगों ने भी तय किया है और कहा है आओ! हम सब मिलकर इन साथियों का हौसला बढ़ाते हुए इनको पुराने पद्धति से ए खेती के लिए प्रेरित करें । वर्तमान में अभी 15 किसानों की जमीन समतलीकरण हो गयी है बाकी बचे हुए पंडो जनजाति के किसानों का काम जारी है। इनके रोज के काम करने का हौसला देखने लायक है… कभी यह छत्तीसगढ़ी ददरिया गाना कभी करमा गीत खेत पर ही गाकर अपने मनोरंजन करते हुए लगातार अपने जीवन जीने के धरती मां को संवारने में लगे हुए हैं।
इस कार्य को करने के लिए युवा साथी भी बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं जिसमें राजकुमार पंडो, बुधराम पंडो, शीला कुमारी पंडो़, सभी युवा साथी भाग ले रहे हैं।

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