रानी पद्मावती के इतिहास को नही भूलना चाहिए भारत के युवाओं कोः हिमांशु कृष्ण


तिल्दा / नेवरा / स्व सोनचंद वर्मा स्मृति फाउंडेशन के तत्वावधान में श्रीमद भागवत कथा का आयोजन माहेश्वरी भवन कन्या हाई स्कूल के सामने तिल्दा नेवरा में किया गया है। कथा दोपहर 2 बजे से 6 बजे तक निर्धारित है। कथा के तीसरे दिन हिमांशु कृष्ण भरद्वाज ने बताया कि किस प्रकार से रानी पद्मावती ने अपने पतिव्रत धर्म का पालन करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। आज कथा के प्रसंग में बताया गया कि किस प्रकार अनुसूइया माता ने तीनों देवो को भी बालक बना कर अपने पालने में खिलाया व ध्रूव चरित्र और कपिल देवहूति सम्वाद इत्यदि कथाओ ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। हिमांशु कृष्ण जी ने बताया कि इतिहास ग्रंथों में अधिकतर पद्मिनी नाम स्वीकार किया गया है, पद्मावती के रूप का वर्णन सुनकर दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण कर दिया था। 8 माह के युद्ध के बाद भी अलाउद्दीन खिलजी चित्तौड़ पर विजय प्राप्त नहीं कर सका तो लौट गया और दूसरी बार आक्रमण करके उस ने छल से राजा रतनसिंह को बंदी बनाया और उन्हे लौटाने की शर्त के रूप में पद्मावती को मांगा। तब पद्मावती की ओर से भी छल का सहारा लिया गया और गोरा-बादल की सहायता से अनेक वीरों के साथ वेश बदलकर पालकियों में पद्मावती की सखियों के रूप में जाकर राजा रतनसिंह को मुक्त कराया गया। परंतु इस छल का पता चलते ही अलाउद्दीन खिलजी ने प्रबल आक्रमण किया, जिसमें दिल्ली गये प्रायः सारे राजपूत योद्धा मारे गये। राजा रतन सिंह चित्तौड़ लौटे परंतु यहाँ आते ही उन्हें कुंभलनेर पर आक्रमण करना पड़ा और कुंभलनेर के शासक देवपाल के साथ युद्ध में देवपाल मारा गया परंतु राजा रतन सिंह भी अत्यधिक घायल होकर चित्तौड़ लौटे और स्वर्ग सिधार गये। उधर पुनः अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण हुआ। रानी पद्मावती अन्य सोलह सौ स्त्रियों के साथ जौहर करके भस्म हो गयी तथा किले का द्वार खोल कर लड़ते हुए सारे राजपूत योद्धा मारे गये। अलाउद्दीन खिलजी को राख के सिवा और कुछ नहीं मिला। तीसरे दिवस पर विशेष अतिथि गौरीशंकर अग्रवाल पूर्व विधानसभा अध्य्क्ष एवं अशोक पांडे, भाजपा संगठन सह प्रभारी उपस्थित थे। जिनका स्वागत एवं सम्मान आयोजन समिति द्वारा किया गया। अग्रवाल जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्रीमद भागवत को ही महापुराण कहा गया है जिसमे आदमी के जन्म जीवन और मरण की कथा का दर्शन दखने को मिलता है और यही कथा ही मुक्ति का मार्ग है। इस अवसर पर अनिल अग्रवाल , भगबलि साहू , ईश्वर यदु गिरीश साहू , सुधा चौबे , कृष्णा शर्मा , चंद्रकला वर्मा सहित जनप्रतिनिधि और श्रोतागण उपस्थित थे l फ़ाउंडेशन के संयोजक टंक राम वर्मा के द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट कर अतिथियों का स्वागत किया गया l कार्यक्रम का संचालन राजकुमार कमल , डोमार सिंह वर्मा एवं अनिल वर्मा कर रहे थे।

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