चाहे घूमना आवरा।मत छोड़िए इसको छुट्टा।पर यह मानता ही नहीं।इसका मन करता है कि खूब घूमो,खूब खाओ और आराम फरमाओ।पर इतनी छूट देने पर यह प्यारा सा दिल आपके बस में नहीं रहेगा और अपनी मर्जी से इधर-उधर घूमेगा।कभी तेज धढकेगा,कभी एकदम से धीमा हो जाएगा और नाराज हो गया तो चलना बंद भी कर सकता है।तो जनाब इसको अपने बस में रखना है। इसके लिए जबान और स्वाद पर जोर रखिए,गैर जरूरी चिंताओं को हवा में उड़ा दीजिए,पैसे और पेट्रोल बचाइए मतलब खूब पैदल चलिए तभी काबू में रहेगा दिल।

दिल को वैसे भी काबू में रखना चाहिए।आपका दिल,यह जो आसपास की समस्याओं को देख कर परेशान होने लगता है,तो उसको भी देश की तरह ही बेफिक्र होना सिखाइए।अब यह क्या कि आपका दिल गरीबों की परेशानियों पर भी आ जाता है।आपको उनके बच्चों की भूख, सेहत,बीमारी,पढ़ाई परेशान करती है।यह भी कोई बात हुई कि आपका दिल पैदल घर वापसी जा रहे मजदूरों की पीड़ा पर भी द्रवित हो उठता है। दिल को संभाल कर रखिए जनाब वरना यह यूं ही बेरोजगारी,महिलाओं पर अत्याचार, बलात्कार,छिनती नौकरियों,आत्महत्या जैसी घटनाओं पर भी तेज धड़कने लगेगा। सरकार और मीडिया तो आपको सुशांत,रिया, कंगना,जैसे तरह के अन्य दिल बहलाने के लिए ख्याल समय समय पर देते रहते हैं। फिर भी अगर आपका दिल श्रमिक, किसान,मजदूर मैं ही उलझा है तो कोई क्या कर सकता है। दिल को परेशान करने के लिए कुछ नहीं मिला तो आप को कोविड की चिंता भी दिखती है, ट्रेनों को प्राइवेट करने से भी परेशान हैं,सरकारी संस्थान को बेचने का भी विरोध कर रहे हैं तो कोई आपका क्या कर सकता है।अरे भाई आपको अपने देश के पूंजीपतियों का दिल भी तो रखना है।उनके दिल का ख्याल भी हम अपने देश के लोगों को ही रखना है। इस महामारी के बीच में हो रहे चुनावों के कैंडिडेट्स का भी तो ध्यान रखना ही है।अब दिल बेचारा क्या करें एक अनार सौ बीमार।
आज विश्व हृदय दिवस पर सभी को अपने दिल का ख्याल रखने के लिए शुभेचछाओं सहित समर्पित।
राकेश श्रीवास्तव
लखनऊ






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